जासूसी के आरोप पर NSO ग्रुप की सफाई, कहा- मीडिया रिपोर्ट वास्तविकता से बहुत दूर
नई दिल्ली, 19 जुलाई: 'पेगासस स्पाइवेयर' के जरिए कई भारतीय पत्रकारों, नेताओं सहित सैकड़ों लोगों की जासूसी करने के दावा करते हुए फोन हैकिंग की खबरों के बीच इजराइल की साइबर इंटेलिजेंस कंपनी एनएसओ ग्रुप ने सोमवार को अपनी सफाई पेश की है। ग्रुप ने कहा कि उस पर लगाए गए आरोप झूठे हैं और भ्रामक।एनएसओ ग्रुप ने एक बयान साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि फॉरबिडन स्टोरीज की रिपोर्ट गलत धारणाओं और गलत जानकारी से भरी है, जो विश्वसनीयता और हितों के बारे में गंभीर संदेह पैदा करती है। ऐसा लगता है कि अज्ञात सोर्स ने ऐसी जानकारी दी है, जिसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और वास्तविकता से बहुत दूर हैं।

इसके अलावा एनएसओ ग्रुप ने कहा कि इस मामले में पब्लिश रिपोर्ट का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और कंपनी मानहानि के मुकदमे पर विचार कर रही है। ग्रुप का कहना है कि उनके दावों की जांच करने के बाद हम उनकी रिपोर्ट में लगाए गए झूठे आरोपों का दृढ़ता से खंडन करते हैं। उनके सोर्स ने उन्हें ऐसी जानकारी दी है, जिसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है, जैसा कि उनके कई दावों के लिए सहायक डॉक्यूमेंटेशन की कमी से स्पष्ट है। कंपनी ने आगे कहा कि वास्तव में ये आरोप अपमानजनक और वास्तविकता से बहुत दूर है, ऐसे में एनएसओ मानहानि के मुकदमे पर विचार कर रही हैं।
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Cyber intelligence company- NSO Group says the report by Forbidden Stories is “full of wrong assumptions and uncorroborated theories.” The statement says that the report “has no factual basis and are far from reality” #Pegasus pic.twitter.com/RNSQOrqa7w
— ANI (@ANI) July 19, 2021
डेटा हमारे किसी भी सर्वर में नहीं था
कंपनी का मानना है कि ऐसी सेवाएं किसी के लिए भी, कहीं भी, और कभी भी खुले तौर पर उपलब्ध हैं। और आमतौर पर सरकारी एजेंसियों द्वारा कई उद्देश्यों के लिए, साथ ही दुनिया भर में निजी कंपनियों द्वारा उपयोग की जाती हैं। यह दावा कि डेटा हमारे सर्वर से लीक किया गया था, जो पूरी तरह से झूठा और हास्यास्पद है, क्योंकि ऐसा डेटा हमारे किसी भी सर्वर पर कभी मौजूद नहीं था।
इस काम काम में आती हैं तकनीक
साथ ही एनएसओ ग्रुप ने कहा कि उसकी तकनीकों का इस्तेमाल हर दिन पीडोफिलिया, सेक्स और ड्रग-तस्करी, लापता और अपहृत बच्चों का पता लगाने, ढह गई इमारतों के नीचे फंसे बचे लोगों का पता लगाने और खतरनाक ड्रोन जैसे हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
बता दें कि द वायर में एक रिपोर्ट के अनुसार पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल कर 40 से अधिक भारतीय पत्रकारों की जासूसी कराने का मामला सामने आए या है, जिसका विवाद अब बढ़ता जा रहा है। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पत्रकारों की निगरानी की रिपोर्टों को सिरे से खारिज किया है।












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