अब मोदी सरकार के सहयोगी ने अयोध्या में भव्य बौद्ध मंदिर के लिए मांगी 20 एकड़ जमीन

नई दिल्ली- अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की तारीख की घोषणा किसी भी दिन की जा सकती है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी यूपी सरकार की ओर से आवंटित 5 एकड़ की जमीन के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है और वहां मस्जिद निर्माण के साथ-साथ दूसरी चैरिटेबल भवन बनाने को लेकर मंथन शुरू है। मसलन, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सभी पक्ष अपने-अपने हिसाब से आगे की ओर बढ़ चले हैं। लेकिन, इसी दौरान मोदी सरकार में शामिल आरपीआई के नेता ने अयोध्या में अलग से 20 एकड़ जमीन दिलाए जाने की मांग शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के मुताबिक उस 20 एकड़ की जमीन पर वो एक विशाल बौद्ध मंदिर का निर्माण कराना चाहते हैं।

अयोध्या में बौद्ध मंदिर के लिए चाहिए 20 एकड़ जमीन

अयोध्या में बौद्ध मंदिर के लिए चाहिए 20 एकड़ जमीन

अयोध्या में कई मुस्लिम संगठनों के विरोध के बावजूद सुन्नी वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सरकार से 5 एकड़ जमीन लेने को तैयार हो गया है। लेकिन, अब मोदी सरकार के एक सहयोगी ने अयोध्या में ही भव्य बौद्व मंदिर बनाने के लिए राज्य सरकार से 20 एकड़ जमीन की मांग कर दी है। ये मांग केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने की है, जो अब अयोध्या में ही एक भव्य बौद्ध मंदिर का भी निर्माण कराना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि वे जल्द ही इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं बौद्ध लोगों को 20 एकड़ जमीन आवंटित करने की मांग करता हूं और अयोध्या में एक भव्य बौद्ध मंदिर बनाया जाना चाहिए। मैं जल्द ही यूपी के सीएम से मिलूंगा।" हालांकि, बौद्ध मंदिर के लिए जमीन आवंटित नहीं होने की स्थिति में अठावले ने प्लान बी भी तैयार कर रखा है। उनके मुताबिक, "अगर मेरी मांग नहीं मानी जाती है, हम बुद्ध के विचारों में विश्वास रखने वाले लोग एक ट्रस्ट बनाएंगे, अयोध्या में जमीन खरीदेंगे और वहां एक बौद्ध मंदिर का निर्माण करेंगे।"

सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मंजूर

सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन मंजूर

दूसरी तरफ तमाम अटकलों और विरोधों को नजरअंदाज करते हुए यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए यूपी सरकार से मिली 5 एकड़ जमीन स्वीकार कर ली है। इसके बारे बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारूकी ने साफ किया है कि, " (सुप्रीम कोर्ट के फैसले) उसके बाद इसे नामंजूर करने की आजादी नहीं थी।" उन्होंने बताया, "जमीन स्वीकार करने या अस्वीकार करने का सवाल हमारी ओर से कभी नहीं उठाया गया। जिन लोगों को भी सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमीन नहीं दी गई, वही लोग इसे नहीं लेने का हल्ला कर रहे थे। हमने सर्वोच्च अदालत के फैसले को मानने का निर्णाय लिया है।" यूपी सरकार ने अयोध्या के सोहवाल तहसील में रौहानी थाना इलाके के धन्नीपुर गांव में मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन तय की है।

कई मुस्लिम संगठनों का विरोध नजरअंदाज

कई मुस्लिम संगठनों का विरोध नजरअंदाज

बता दें कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई मुस्लिम संगठनों की ओर से जमीन कभी नहीं लेने की बातें सुनाई पड़ रही थीं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में भी इसको लेकर भारी विरोध था। एआईएमआईएम पार्टी के अध्यक्ष और हैदराबाद के बड़बोले सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी ऐलान किया था कि मुसलमानों को 'खैरात' में मस्जिद के लिए जमीन नहीं चाहिए। लेकिन, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कभी भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अलग हटकर कोई बात नहीं की थी और अब जाकर साफ कर दिया है कि उसे यूपी सरकार से दी गई जमीन मंजूर है।

24 फरवरी को मस्जिद निर्माण पर फैसला

24 फरवरी को मस्जिद निर्माण पर फैसला

सुन्नी वक्फ बोर्ड 24 फरवरी को होने वाली अपनी बैठक में आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा। फारूकी के मुताबिक उस बैठक में ये तय किया जाएगा कि, "जमीन पे क्या करना है और कैसे करना है.." उनके मुताबिक, "हमें बुद्धिजीवियों समेत तमाम तरह के लोगों से कई तरह के प्रस्ताव मिले हैं, जिसमें जमीन का इस्तेमाल चैरिटी के लिए करने की सलाह मिली है। एक प्रस्ताव में मस्जिद के साथ-साथ इस्लामिक कल्चर सेंटर बनाने का भी प्रस्ताव है।" उन्होंने कहा कि मस्जिद के अलावा बाकी सुविधाओं के लिए 5 एकड़ जमीन काफी बड़ी है। फारूकी ने कहा कि, "बाबरी मस्जिद एक-एकड़ के एक-तिहाई हिस्से पर ही बनी थी। अगर अब वैसी ही मस्जिद बनाएं, जिसकी कि वहां जरूरत भी नही है, उसके बावजूद काफी जमीन बच जाएगी।" हालांकि बोर्ड ने जमीन के संबंध में सरकार से मिली चिट्ठी का अभी जवाब नहीं भेजा है।

जल्द हो सकता है मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान

जल्द हो सकता है मंदिर निर्माण की तारीख का ऐलान

उधर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के लिए गतिविधियां जोड़ पकड़ती जा रही हैं। हालांकि, अभी तक इसके निर्माण की तारीक का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन यह किसी भी दिन होने की संभावना है। गौरतलब है कि गुरुवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे भूमिपूजन के मौके पर अयोध्या आने का निमंत्रण दिया। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव और वीएचपी नेता चंपत राय, स्वामी गोविंद गिरी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील के परासरण भी मौजूद थे।

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