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'सब देख रहे थे पर कोई नहीं आया', पुरी हादसे में पत्नी की मौत पर फूट-फूटकर रोया पति, उठाए सवाल

ओडिशा के पुरी में रविवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो गया, जब गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ मचने से तीन श्रद्धालुओं की जान चली गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हादसा उस वक्त हुआ जब सुबह-सुबह भारी भीड़ भगवान जगन्नाथ के रथ 'नंदीघोष' के दर्शन के लिए उमड़ी।

इस हादसे में सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली कहानी है उस व्यक्ति की, जिसने अपनी पत्नी को खो दिया। दुख में डूबे उस शख्स ने कहा- 'जब मेरी पत्नी गिर पड़ी और हालात बेकाबू हो गए, तब न कोई फायर ब्रिगेड पहुंचा, न कोई रेस्क्यू टीम और न ही अस्पताल से कोई मदद मिली। कोई नहीं आया...किसी ने भी नहीं थामा हमारा हाथ।'

man who lost his wife in the stampede

उसकी शिकायत सिर्फ एक नहीं थी, वह एक पूरे सिस्टम की असंवेदनशीलता को बयां कर रहा था। मृतकों की पहचान बसंती साहू (खोरधा), प्रेमकांति मोहंती और प्रभाती दास (बलियांता) के रूप में हुई है।


घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी (Mohan Charan Majhi) ने श्रद्धालुओं से क्षमा मांगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।


साथ ही पुरी के जिलाधिकारी और एसपी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। क्राउड मैनेजमेंट में लापरवाही के आरोप में डीसीपी विष्णुपति (DCP Bishnu Pati ) और कमांडेंट अजय पाधी (Commandant Ajay Padhi) को सस्पेंड कर दिया गया है।

विपक्ष का हमला, नवीन पटनायक बोले- सरकार नदारद थी'
पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि हादसे के वक्त कोई सरकारी अमला मौजूद नहीं था। उन्होंने इस त्रासदी को सरकार की 'गंभीर नाकामी' करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती मदद लोगों के रिश्तेदारों ने ही की, प्रशासन पूरी तरह विफल रहा।

पुरी की रथ यात्रा क्या है?
पुरी की रथ यात्रा एक बहुत खास त्योहार है जो हर साल ओडिशा के पुरी शहर में होता है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा एक बहुत बड़े रथ (यानि लकड़ी की बनी विशाल गाड़ी) में बैठकर अपने दूसरे मंदिर- गुंडिचा मंदिर - जाते हैं। लोग मानते हैं कि ये मंदिर भगवान की मौसी का घर है, और वे वहां 9 दिन रहने जाते हैं।

यह रथ यात्रा बहुत, बहुत पुरानी है- करीब 800 साल से भी ज्यादा पुरानी! कहा जाता है कि यह परंपरा राजा अनंतवर्मा चोडगंग ने शुरू की थी। उस समय उन्होंने पुरी में बहुत सुंदर जगन्नाथ मंदिर बनवाया था। इस दिन लाखों लोग इकट्ठा होते हैं, भगवान के रथ को खींचते हैं, गाते-बजाते हैं और दर्शन करते हैं।

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