दिल्ली के बंदरों को पकड़ने के लिए दूसरे राज्यों से आएंगे मंकी कैचर!
SDMC ने फैसला किया है कि मंकी कैचर्स को बहाल करने के लिए करने के लिए हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के अखबारों में विज्ञापन निकाला जाएगा
नई दिल्ली। साउथ दिल्ली की जनता बंदरों के आतंक से परेशान है। हालांकि इस परेशानी से एमसीडी को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एमसीडी को मंकी कैचर नहीं मिल पा रहे। बंदरों के आतंक की ढेरों शिकायतें मिलने के बाद एमसीडी ने एक बंदर को पकड़ने के बदले फीस 1200 रुपये से बढ़ाकर 2400 रुपये कर दी। फिर भी उसे बंदर पकड़ने वाले नहीं मिल रहे है। अब SDMC ने फैसला किया है कि मंकी मैचर को बहाल करने के लिए दूसरे राज्यों में विज्ञापन निकाला जाएगा।

SDMC ने फैसला किया है कि मंकी कैचर्स को बहाल करने के लिए करने के लिए हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के अखबारों में विज्ञापन निकाला जाएगा। शहरके अंदर बेसहारा पशुओं के बाद अब बंदर लोगों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। बंदर बच्चों महिलाओं को काट रहे हैं तो कपड़े सहित अन्य कीमती सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शहर की यह विकट समस्या सीएम के खुले दरबार में भी रखी गई थी। लेकिन समस्या बनी हुई है।
एमसीडी ने दो बार इसके लिए निविदा भी निकाली। इसके बावजूद किसी एजेंसी ने आवेदन नहीं किया। अब साउथ एमसीडी के वेटरनरी विभाग ने हाई कोर्ट में गुहार लगाई है कि यह काम फॉरेस्ट ऐंड वाइल्ड लाइफ विभाग को सौंप दिया जाए। बंदरों को अलग-अलग पकड़ने पर कई गैर सरकारी संगठनों ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठनों का कहना है कि बंदर फैमिली में रहते हैं। उन्हें पकड़ना है तो पूरे परिवार को साथ पकड़ा जाए। लेकिन, एमसीडी के अफसर यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे कि बंदरों की फैमिली में कितने सदस्य हैं। एमसीडी के वेटरनरी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014-15 में सबसे अधिक 588 बंदर पकड़े गए। लेकिन अलगे साल ही यह काम सुस्त पड़ गया। 2015-16 में 43 और 2016-17 में 40 बंदर ही पकड़े जा सके। इस साल अभी तक 30 बंदर पकड़े गए हैं।












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