गंगाराम हॉस्पिटल के प्रमुख बोले- कोरोना पर रेमडेसिविर के असर के सबूत नहीं, इस्तेमाल पर लग सकती है रोक
गंगा राम हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. डीएस राना ने मंगलवार को कहा कि रेमडेसिविर दवा का कोरोना के मरीजों पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है, इसलिए जल्द ही कोरोना मरीजों के इलाज में इसके इस्तेमाल को बंद किया जा सकता है।
नई दिल्ली, 19 मई। गंगा राम हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. डीएस राना ने मंगलवार को कहा कि रेमडेसिविर दवा का कोरोना के मरीजों पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखा है, इसलिए जल्द ही कोरोना मरीजों के इलाज में इसके इस्तेमाल को बंद किया जा सकता है। इससे पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कोरोना मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का लेकर कहा था कि प्लाज्मा थेरेपी का कोरोना मरीजों के स्वास्थ्य पर कोई सकारात्क प्रभाव देखने को नहीं मिला है इसलिए इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए।

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गंगा राम हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. डीएस राना ने आगे कहा कि, 'प्लाज्मा थेरेपी में हम किसी ऐसे व्यक्ति को प्री-फॉरवर्ड एंटीबॉडी देते हैं, जो पहले संक्रमित हो चुका है, ताकि एंटीबॉडी वायरस से लड़ सके। आमतौर पर एंटीबॉडी तब बनते हैं जब कोरोनावायरस हमला करता है। हमने पिछले साल देखा है कि प्लाज्मा देने से मरीज और अन्य लोगों की स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ता है और यह आसानी से उपलब्ध भी नहीं होता। प्लाज्मा थेरेपी वैज्ञानिक आधार पर शुरू की गई थी और सबूतों के आधार पर बंद कर दी गई है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'अगर हम कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अन्य दवाओं की बात करते हैं तो रेमडेसिविर के बारे में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले हैं जो यह बताते हों कि यह कोरोना के इलाज में प्रभावी है। जिन दवाओं से कोई फायदा ही नहीं हो रहा है उन्हें बंद करना होगा। इस समय कोरोना के इलाज में केवल तीन दवाएं कारगर हैं।'
डॉ. राना ने आगे कहा कि, 'अभी हम सभी जांच और निगरानी कर रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग और जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक हम इस महारारी के बारे में पूरी जानकारी हासिल करेंगे, मुझे लगता है कि तब तक यह खत्म हो जाएगा।' मालूम हो कि आईसीएमआर द्वारा सोमवार को जारी किये गए दिशा-निर्देश के बाद कोरोना मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है।
देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ, प्लाज्मा डोनर्स की मांग तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन विशेषज्ञों ने कोरोना मरीजों पर इसके प्रभाव पर सवाल उठाने के बाद इसका इस्तेमाल बंद कर दिया गया है।












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