CBI के दुरुपयोग पर अरुण जेटली की चिठ्ठा पर नहीं होगा ऐक्शन!

मंगलवार एक खबर सुर्खियों में आयी कि जेटली ने 27 सितंबर को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमें कांग्रेस पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को फर्जी मामलों में फंसाने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया गया है। चिट्ठी को मीडिया के सामने पेश करते हुए जेटली ने कहा कि सीबीआई ने नरेंद्र मोदी के सहयोगी एवं गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह को बिना किसी 'अभियोज्य सबूत' के ही गिरफ्तार कर लिया।
जेटली ने कहा, "उन्होंने दो झूठे गवाहों, रमनभाई पटेल और दशरथभाई पटेल की झूठी गवाहियों पर विश्वास करके अमित शाह को गिरफ्तार किया, जबकि ये दोनों गुजरात के चिन्हित भूमाफिया हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि इशरत जहां मामले में सीबीआई ने दूसरों के फंसाने के लिए कुछ संदिग्धों के साथ समझौता किया। जेटली ने इसके अलावा सीबीआई की जांच के राजनीतिकरण के आरोपों की सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से जांच कराए जाने की मांग भी की।
यह तो रही जेटली की बात लेकिन अगर सामने वाले पलड़े में देखें तो वहां सारे निर्णय लेने के लिये मनमोहन अकेले नहीं बैठे हैं। उनके अलावा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी तमाम सरकारी फैसले करते हैं। ऐसे में यह सोचना कि पीएम को लिखी गई इस चिठ्ठी से अरुण जेटली की बात का असर हो जायेगा और सीबीआई मोदी या अन्य नेताओं के खिलाफ काम करना बंद कर देगी, गलत होगा। सच पूछिए तो जेटली को भी अच्छी तरह पता है कि उनकी इस चिठ्ठी पर कोई ऐक्शन नहीं होने वाला, लेकिन वो अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहते थे और उन्होंने पहुंचा दी, ताकि आने वाले चुनाव में भाजपा के वोटों पर इस वजह से कोई असर नहीं पड़े।












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