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Nitish Sequel: बिहार में नीतीश कुमार ने ठीक पांच साल बाद फिर दोहराई वही कहानी

नई दिल्ली, 09 अगस्त: आज से ठीक पांच साल पहले जुलाई 2017 में नीतीश कुमार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए आरजेडी के साथ गठबंधन तोड़ सरकार गिरा दी थी। बिहार में 5 साल बाद फिर सावन के महीने में राजनीति करवट बदल रही है।। मंगलवार को नीतीश कुमार ने बीजेपी पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाते हुए खुद को एनडीए से अलग कर दिया। 2017 में सावन का महीना था और एक बार फिर 2022 में भी सावन का महीना चल रहा है। नीतीश अब एक बार फिर आरजेडी के साथ सरकार बनाने की तैयारी में हैं।

एक बार फिर सावन में गठबंधन तोड़ा

एक बार फिर सावन में गठबंधन तोड़ा

अब आपको पास 5 साल पीछे ले चलते हैं। साल 2017 में नीतीश कुमार आरजेडी के साथ सरकार चला रहे थे। लालू के छोटे बेटे उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और बड़े बेटे तेजप्रताप कैबिनेट में थे। नीतीश 2013 में बीजेपी का साथ छोड़कर लालू के साथ आए थे। दोनों मिलकर चुनाव लड़ा। मोदी लहर के बावजूद वे बिहार में सरकार बनाने में सफल रहे। दो साल तक साथ में सरकार चलाने के बाद नीतीश ने आरजेडी पर भ्रष्टाचार के आरोप गठबंधन तोड़ लिया।

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    2017 में बीजेपी के साथ मिलकर बनाई थी सरकार

    2017 में बीजेपी के साथ मिलकर बनाई थी सरकार

    सावन के महीने में आरजेडी के साथ गठबंधन तोड़ नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन थाम लिया। नीतीश में राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा और बीजेपी के विधायकों का समर्थन पत्र लेकर अगले ही दिन फिर राज्यपाल से मिलने पहुंच गए। 27 जुलाई 2017 को फिर से अपनी नई सरकार बना ली और वह छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। कोरोना काल में नवंबर 2020 बिहार में विधानसभा चुनाव हुए।

    नीतीश सातवीं बार सीएम तो बने लेकिन मन में रही ये कसक

    नीतीश सातवीं बार सीएम तो बने लेकिन मन में रही ये कसक

    नीतीश कुमार और बीजेपी ने मिलकर चुनाव लड़ा। बीजेपी जहां दूसरे नंबर की पार्टी बनी तो वही नीतीश का काफी सीटों का नुकसान उठाते हुए तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीतीश कुमार ने बिहार के सीएम के तौर पर सातवीं बार शपथ ली। लेकिन इस चुनाव में नीतीश की पार्टी से आवाजें उठने लगी कि, बीजेपी ने उनके साथ भीतरघात किया है। हालांकि नीतीश कुमार ने उस समय खुलकर इस पर कुछ नहीं कहा।

    नीतीश के सताने लगा जेडीयू के खत्म होने का डर

    नीतीश के सताने लगा जेडीयू के खत्म होने का डर

    भले ही नीतीश कुमार ने सातवीं बार सीएम पद की शपथ ले ली। लेकिन पार्टी को तीसरे नंबर पर पहुंचाने के लिए नीतीश कुमार बीजेपी को ही जिम्मेदार मान रहे थे। इसके बाद धीरे धीरे बीजेपी और जेडीयू के बीच मतभेद शुरू हो गए। बीजेपी और जेडीयू भले ही सत्ता में साथ थे लेकिन दोनों के बीच कई मुद्दों पर टकराव सामने बार-बार नजर आया। जेडीयू को एहसास होना कि बीजेपी बिहार में जेडीयू की कीमत पर बढ़ रही है। नीतीश कुमार के कई विधायक और नेता बार-बार कह रहे थे कि बीजेपी नीतीश कुमार के नाम पर बिहार में आगे बढ़ रही है जब्कि जेडीयू कमजोर हो रही है।

    नीतीश के हाथ से फिसला बड़ा वोटबैंक

    नीतीश के हाथ से फिसला बड़ा वोटबैंक

    बीजेपी जहां हार्डकोर हिन्दुत्व के मुद्दे को लेकर चल रही है। वहीं नीतीश की छवि सेक्यूलर और प्रोग्रेसिव नेता की है। विचारधारा पर समझौते के कारण उन्हें वोटबैंक का भी नुकसान उठाना पड़ा। मुसलमान उनसे दूर हो रहे थे और अगड़ी जातियां बीजेपी की ओर जा रही थीं। इतना ही नहीं बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग के कारण ओबीसी और महादलित भी नीतीश के अलग हो रहे थे।

    कई मुद्दों पर बीजेपी और जेडीयू में था मतभेद

    कई मुद्दों पर बीजेपी और जेडीयू में था मतभेद

    इसके अलावा अगर मुद्दों की बात करें तो जाति जनगणना का मुद्दा हो या बिहार को स्पेशल दर्जा देने का, नीतीश बीजेपी के स्टैंड से अलग खड़े दिखते रहे हैं। बीजेपी जहां इसके खिलाफ थी। वहीं नीतीश इसकी लगातार मांग कर रहे थे। केंद्र की अग्निपथ योजना के चलते बिहार में हुए दंगों ने नीतीश की छवि को नुकसान पहुंचाया। नीतीश ने अग्निपथ के मुद्दे पर चुप्पी साध ली।वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भी नीतीश पर निशाना साधा था।

    नड्डा के बयान में बढ़ा दी थींं चिंताएं

    नड्डा के बयान में बढ़ा दी थींं चिंताएं

    इसके इतर नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्रिमंडल में समान अनुपात में प्रतिनिधित्व चाहते हैं। इस समय बिहार में दोनों दलों के 16-16 लोकसभा सांसद हैं।नीतीश चाहते थे कि जितने मंत्री बिहार कोटे से केंद्र में बीजेपी से बनाए गए हैं उतने ही जदयू से भी बनाया जाना चाहिए। जबकि उन्हें केंद्र में केवल एक पद मिला। अभी हाल ही में बीजपी संयुक्त मोर्चा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने पटना पहुंचे जेपी नड्डा ने कहा था कि क्षेत्रीय दल सफाया होने की कगार पर है, और रहेगी तो सिर्फ बीजेपी। बस ये बात जेडीयू को खटक गई।

    पांच साल नीतीश ने फिर लिया यूटर्न

    पांच साल नीतीश ने फिर लिया यूटर्न

    जिसके बाद नीतीश कुमार ने पांच साल फिर से यू टर्न लिया। नीतीश कुमार ने मंगलवार शाम 4 बजे राज्यपाल फागू चौहान को अपना इस्तीफा सौंप दिया। नीतीश ने तुरंत ही नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया। उनके पास कुल 164 विधायकों का सपोर्ट है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार आठवीं बार बिहार के सीएम के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं।

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