Nitin Nabin: क्यों नितिन नबीन बने BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष? मोदी-शाह का दांव, वजह जान चौंक जाएंगे
BJP President Nitin Nabin: भारतीय जनता पार्टी ने संगठन की कमान संभालने के लिए जिस नाम पर भरोसा जताया है, उसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बिहार सरकार में मंत्री और पटना की बांकीपुर सीट से विधायक नितिन नबीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। 14 दिसंबर को पार्लियामेंट्री बोर्ड के फैसले की जानकारी राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने दी। 45 साल के नितिन नबीन नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
जेपी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 में पूरा हो चुका है और वे फिलहाल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कई दिग्गज नामों के बीच आखिर मोदी-शाह की पसंद नितिन नबीन ही क्यों बने। इसके पीछे संगठन की एक साफ रणनीति और नितिन नबीन की कुछ खास खूबियां मानी जा रही हैं।

पीएम मोदी का भरोसा और खुली तारीफ
नितिन नबीन की ताजपोशी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी। पीएम ने एक्स पर लिखा कि नितिन नबीन एक मेहनती कार्यकर्ता हैं, युवा हैं और उनके पास समृद्ध संगठनात्मक अनुभव है। बिहार में विधायक और मंत्री के रूप में उनके काम को भी पीएम ने सराहा। यह संदेश साफ करता है कि शीर्ष नेतृत्व उन्हें भविष्य के बड़े रोल के लिए तैयार मान रहा है।

🟡 लगातार पांच बार जीत, आसान नहीं था सफर
नितिन नबीन 2006 से लगातार बांकीपुर विधानसभा सीट से जीतते आ रहे हैं। यह सीट किसी एक जाति या पार्टी की परंपरागत सीट नहीं मानी जाती। यहां राजद और कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है। इसके बावजूद नितिन नबीन ने हर चुनाव में अपनी पकड़ बनाए रखी। 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा और पुष्पम प्रिया चौधरी जैसे चर्चित चेहरों को हराकर अपनी चुनावी क्षमता साबित की। यही जीत की आदत पार्टी नेतृत्व को भरोसा देती है।

🟡 छत्तीसगढ़ में दिखाया चुनावी मैनेजमेंट
साल 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने नितिन नबीन को प्रभारी बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। उस वक्त भूपेश बघेल की सरकार को मजबूत माना जा रहा था। नितिन नबीन ने रणनीति बदली, एसी कमरों से निकलकर नक्सल प्रभावित इलाकों और दूर-दराज के गांवों में कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताया। नतीजा यह रहा कि बीजेपी ने कांग्रेस की किलेबंदी तोड़ दी और सत्ता में वापसी कर ली। इस अनुभव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का भरोसेमंद रणनीतिकार बना दिया।
🟡 युवा मोर्चा से राष्ट्रीय पहचान
नितिन नबीन दो बार भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। संगठन ने उन्हें सीधे ऊंचे पद पर लाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता भी मिली और शीर्ष नेतृत्व के साथ काम करने का अनुभव भी। यही वजह है कि आज उनका नाम सेकेंड लाइन लीडरशिप में सबसे ऊपर गिना जा रहा है।

🟡 सौम्य स्वभाव, बड़ी ताकत
राजनीति में आक्रामकता के दौर में नितिन नबीन की पहचान उनके सौम्य व्यवहार से है। वे विरोध सुनते हैं, धैर्य रखते हैं और संवाद पर भरोसा करते हैं। यही गुण संगठन के भीतर उन्हें अलग बनाता है। कार्यकर्ता हों या आम लोग, नितिन नबीन हर किसी को समय और सम्मान देते हैं। पार्टी नेतृत्व को लगता है कि यही संतुलन उन्हें राष्ट्रीय भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है।
🟡 विरासत के बाद भी जमीन से जुड़ाव
नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा सात बार विधायक रहे। बावजूद इसके नितिन नबीन ने कभी सिर्फ विरासत के भरोसे राजनीति नहीं की। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने संगठन में निचले स्तर से काम किया और परिवारवाद के आरोप से खुद को दूर रखा। यही ग्राउंड से जुड़ा अनुभव आज उनके काम आ रहा है।
कुल मिलाकर नितिन नबीन का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनना अचानक लिया गया फैसला नहीं है। यह भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें युवा, संगठनात्मक रूप से मजबूत और चुनावी तौर पर आजमाए हुए नेताओं को आगे लाया जा रहा है। यही वजह है कि मोदी-शाह ने इस बार भरोसा नितिन नबीन पर जताया।
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