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Nithyananda Kailasa: दुष्कर्म के आरोपी और भगोड़े स्वयंभू स्वामी ने ऑफर की ई नागरिकता, जानिए डिटेल

स्वयंभू स्वामी नित्यानंद भारत की सोशल लाइफ में विवादित हस्ती हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा नाम का देश बसाने का दावा करने वाले नित्यानंद दुष्कर्म के आरोपी और भगोड़े हैं। इन्होंने ई नागरिकता का ऑफर निकाला है। जानिए डिटेल

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Nithyananda Kailasa: स्वयंभू स्वामी नित्यानंद भारत की अदालत में लंबित रेप मामले में भगोड़े हैं। नित्यानंद के आइलैंड को मीडिया में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा का नाम दिया गया है। ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर जारी एक विज्ञापन में कहा गया कि जिन लोगों को कैलासा की ई सिटीजनशिप चाहिए, वे अप्लाई कर सकते हैं। अप्लाई करने के लिए लिंक भी शेयर किया गया है।

परमशिव का अवतार!

बता दें कि कैलासा और नित्यानंद पर मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग दावे किए गए हैं। नित्यानंद को मूलत: तमिलनाड़ु का निवासी माना जाता है। खबरों के अनुसार, 1978 में तिरुवन्नामलाई नाम की जगह पर जन्मे नित्यानंद को बचपन में ए. राजशेखरन कहा जाता था। उम्र बढ़ने के साथ-साथ नित्यानंद पर ढोंग के आरोप लगे। रिपोर्ट्स में उन्होंने खुद को 'परमशिव' का अवतार तक करार दिया। ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के बायो के अनुसार, यह सोशल मीडिया अकाउंट- नित्यानंद- हिंदू धर्म के सर्वोच्च पुजारी, नित्यानंद परमशिवम, कैलासा को पुनर्जीवित करने वाले - प्राचीन प्रबुद्ध हिंदू सभ्यता राष्ट्र का है।

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यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा में ई नागरिकता

नित्यानंद का कैलासा नागरिकता ऑफर करने के मामले में दिसंबर 2020 में भी सुर्खियों में आया था। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि कैलासा पर नित्यानंद एक लाख लोगों को बसाने की प्लानिंग कर रहे हैं। देश छोड़कर भागे युवतियों को बंधक बनाने एवं उनके अपहरण के आरोपी विवादास्पद गुरू स्वामी नित्यानंद ने अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर जारी वीडियो संदेश में कहा, "मैं कम से कम एक लाख लोगों को 'कैलासा' में बसाने की योजना बना रहा हूं।" अब मार्च, 2023 में ई-नागरिकता की बात सामने आई है।

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UN से अपील- कैलासा को अलग देश का दर्जा मिले!

कैलासा वेबसाइट के अनुसार, इसका दावा "विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल हिंदू राष्ट्र" होने का है। रिपोर्ट्स के अनुसार नित्यानंद का कैलासा इक्वाडोर के पास एक आइलैंड यानी द्वीप पर है। भारत से भागकर यहां छिपा हुआ स्वयंभू स्वामी नित्यानंद ने द्वीप को देश घोषित कर कैलासा नाम दिया है। नित्यानंद संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूनाइटेड नेशंस (UN) से कैलासा को स्वतंत्र देश घोषित करने की डिमांड भी कर रहा है।

ब्रिटिश सांसदों से कनेक्शन!

बता दें कि दिसंबर, 2022 में ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद बवाल हुआ था। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद के प्रतिनिधि को हाउस ऑफ लॉर्ड्स की मेजबानी वाली दिवाली पार्टी में देखा गया। दो ब्रिटिश सांसदों ने आमंत्रित किया। ब्रिटेन की सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्य- बॉब ब्लैकमैन और रामी रेंजर पर नित्यानंद को इन्वाइट करने के आरोप लगे। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद खुद नित्यानंद तो दिवाली पार्टी में नहीं पहुंचे, लेकिन ब्रिटेन में उसके प्रतिनिधि आत्मदया को पार्टी ने स्पॉट किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने दो साल पहले क्या कहा?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च, 2020 में भगोड़े स्वयंभू संत स्वामी नित्यानंद के अदालत में पेश न होने पर नाराजगी जाहिर की थी। देश की सबसे बड़ी अदालत ने नित्यानंद की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। मामला कर्नाटक के रामनगर जिले की निचली अदालत का है। मामला 2010 में कथित बलात्कार का है। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ में इस केस की सुनवाई हुई थी।

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    गैर जमानती वारंट

    शीर्ष अदालत ने मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को इस शर्त पर रद्द करने का आदेश दिया कि वह आज ही रामनगर जिले की निचली अदालत में पेश होगा। CJI बोबडे की कोर्ट में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें सबूत दर्ज करने के लिए अदालत में पेश नहीं होने पर नित्यानंद के ड्राइवर लेनिन के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

    क्यो विवादित हैं नित्यानंद

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने फरवरी, 2020 में नित्यानंद को दी गई जमानत को रद्द कर दिया था, यहां तक कि राज्य पुलिस ने दावा किया था कि भगोड़ा तांत्रिक 'आध्यात्मिक दौरे' पर था। नित्यानंद पर रेप और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप हैं। उन्हें 22 अप्रैल, 2010 को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि, उसी वर्ष 11 जून को जमानत दे दी गई थी।

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