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ब्रिटिश संसद से भेजा गया नित्यानंद को दिवाली पार्टी में आमंत्रण, सेवक ने लिया था हिस्सा.. मचा बवाल

नित्यानंद का दावा है कि उसने कैलासा नाम के एक अलग देश की स्थापना की है, जहां का अपना पासपोर्ट, अपनी करेंसी और अपनी शिक्षा व्यवस्था है।

Nithyananda Britain: रेप के आरोपी और भारत के भगोड़े नित्यानंद को इस साल ब्रिटेन के दो सांसदों ने हाउस ऑफ लॉर्ड्स में दिवाली की पार्टी में आमंत्रित किया था और उनके एक सेवक ने इस पार्टी में हिस्सा भी लिया था। ऑब्जर्वर की इस रिपोर्ट के बाद बवाल मच गया है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद के एक प्रतिनिधि ने इस साल की शुरुआत में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में एक दिवाली पार्टी में भाग लिया था और दो ब्रिटिश सांसदों ने उन्हें आमंत्रित किया था।

नित्यानंद को आमंत्रण क्यों?

नित्यानंद को आमंत्रण क्यों?

नित्यानंद भारत को भगोड़ा है और उसके ऊपर रेप और यौन हिंसा के कई आरोप हैं। भारत से भागने के बाद उसने अपना खुद का देश बनाया, जिसका नाम उसने कैलासा रखा हुआ है। वहीं, जिन दो सांसदों ने नित्यानंद को दिवाली पार्टी में आमंत्रित किया था, उनके नाम बॉब ब्लैकमैन और रामी रेंजर हैं और ये दोनों ब्रिटेन की सत्ताधारी कंजर्वेटिव पार्टी के सदस्य हैं। ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, नित्यानंद को आमंत्रित करने को लेकर कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद खुद नित्यानंद को दिवाली पार्टी में नहीं पहुंचा था, लेकिन ब्रिटेन में उसके प्रतिनिधि आत्मदया ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। नित्यानंद के संगठन,'नित्यानंद ध्यानपीतम' और 'नित्यानंद मेडिटेशन एकेडमी' ने इस बाबत एक ब्रॉशर भी बनवाया था, जो उसके प्रतिनिधि ने कार्यक्रम में आए मेहमानों को गिफ्ट दिया था। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि, कार्यक्रम में आए कुछ प्रतिनिधियों को जब नित्यानंद के बैकग्राउंड की जानकारी मिली, तो उसके प्रतिनिधि के वहां होने को लेकर कई मेहमान काफी असहज थे।

कैलासा गणराज्य की स्थापना

कैलासा गणराज्य की स्थापना

नित्यानंद ने दावा किया है, कि उसने अपने खुद के देश की स्थापना की है, जिसका नाम उसने 'कैलासा गणराज्य' रखा हुआ है। इस बारे में बहुत सी अटकलें हैं, कि क्या कैलासा वास्तव में भौतिक क्षेत्र वाला एक वास्तविक राष्ट्र है। इसकी आधिकारिक वेबसाइट का दावा है कि, यह "दुनिया भर के बेदखल हिंदुओं द्वारा बनाई गई सीमाओं के बिना बना एक राष्ट्र है, जिन्होंने अपने ही देशों में प्रामाणिक रूप से हिंदू धर्म का अभ्यास करने का अधिकार खो दिया है"। इसे "विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल हिंदू राष्ट्र" कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कैलासा की अपनी एक अलग सरकार है, अपनी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था है। वहीं, नित्यानंद को कैलाश का 'सुप्रीम पोंटिफ' कहा जाता है।

कैलासा को मान्यता देने की मांग

कैलासा को मान्यता देने की मांग

आपको बता दें कि, नित्यानंद साल 2019 से इक्वाडोर के पास स्थित एक द्विप पर छिपा हुआ है, जिसे उसने कैलासा नाम दिया है। कैलासा बनाने के बाद नित्यानंद लगातार यूनाइटेड नेशंस से मांग कर रहा है, कि कैलासा को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया जाए। साल 2020 में नित्यानंद ने कैलासा के लिए अलग रिजर्व बैंक की भी घोषणा की थी, जिसका नाम उसने रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा रखा है और उसके देश की मुद्रा का नाम कैलाशियन डॉलर है। । नित्यानंद ने दावा किया था, कि कैलासा के उच्चायोग यूरोपीयन देश, ब्राजील, भारत और मलेशिया में हैं। लेकिन, बाद में पड़ताल में पता चला था, कि नित्यानंद का ये दावा पूरी तरह से गलत है। अभी तक एक भी देश में कैलासा का उच्चायोग नहीं है और ना ही किसी देश ने पुष्टि की है।

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