'UPA का शासन घोटालों से भरा हुआ', जानें केंद्र सरकार के श्वेत पत्र की 10 बड़ी बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज (8 फरवरी) लोकसभा में 'भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र' पेश किया। जिसका उद्देश्य पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार और वर्तमान बीजेपी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के तहत भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की तुलना करना था।
दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि यूपीए शासन को 2004 में एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था विरासत में मिली थी। लेकिन, 2014 में जब वर्तमान सरकार ने सत्ता संभाली तो इसे संकट में छोड़ दिया। आइए जानते हैं श्वेत पत्र की 10 बड़ी बातें...

- अर्थव्यवस्था को चरण दर चरण सुधारने और शासन प्रणाली को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी।
- एनडीए सरकार ने 2014 में सत्ता संभाली, तो अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में थी, बल्कि संकट में थी।
- एक दशक से कुप्रबंधित अर्थव्यवस्था को ठीक करने और इसके बुनियादी सिद्धांतों को बेहतर स्वास्थ्य के लिए बहाल करने की भारी चुनौती का सामना करना पड़ा।
- एनडीए सरकार के 10 वर्षों में हासिल की गई प्रगति ने यूपीए सरकार के पिछले 10 वर्षों की अस्वस्थता और पक्षाघात को दूर कर दिया।
- 2024 में, आत्मविश्वास और उद्देश्य ने 2014 के अविश्वास और बहाव की जगह ले ली है।
- अमृत काल अभी शुरू हुआ है और लक्ष्य '2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना'है। यह कर्तव्य काल है।
- इसमें यूपीए सरकार में हुए 15 घोटालों का जिक्र भी किया गया है। जिसमें 2G स्कैम, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला शामिल है।
- यूपीए सरकार ने देश की आर्थिक नींव कमजोर की।
- यूपीए शासन काल में रुपए में भी गिरावट देखी गई।
- राजस्व का गलत इस्तेमाल हुआ।
क्या होता श्वेत पत्र ?
दरअसल, श्वेत पत्र एक रिपोर्ट होती है। जिसमें सरकार की उपलब्धियों के बारे में उल्लेख किया जाता है। खास बात यह है कि यह पत्र कई रंगों में होते हैं। जिसके हिसाब से दस्तावेजों में उल्लेख किया जाता है।












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