दिल्ली गैंगरेप-मर्डर: सात साल गुजर जाने के बाद अब कहां है निर्भया का दोस्त? पिता ने क्या कहा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में निर्भया गैंगरेप के दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है। याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस की जांच सही हुई है और उसमें कोई कमी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा पर दोषी को बचाव का पूरा मौका दिया गया है। सात साल पहले के गैंगरेप-हत्या के दिल दहला देने वाले केस में चार दोषियों में से एक अक्षय ने सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की थी। दोषी के वकील ने इस केस के एकमात्र गवाह और निर्भया के दोस्त अवनींद्र पांडेय के बयान पर भी सवाल उठाए थे, हालांकि कोर्ट ने उसकी सारी दलीलें खारिज कर दी थीं। बता दें कि अवनींद्र वारदात के वक्त मौके पर ही थे और दरिंदों ने उनकी भी पिटाई की थी।

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    Nirbhaya Case : Seven Years गुजर जाने के बाद कहां और किस हाल में है निर्भया का दोस्त अवनींद्र
    एक गुमनाम जिंदगी जी रहे अवनींद्र

    एक गुमनाम जिंदगी जी रहे अवनींद्र

    16 दिसंबर, 2012 को वारदात वाली रात को दरिंदों ने अवनींद्र की भी पिटाई थी और निर्भया के साथ बस से नीचे फेंक दिया था। अवनींद्र इस वक्त कहां हैं, ये हर कोई जानना चाहता है लेकिन इसकी कोई जानकारी नहीं है। उनके परिवार के लोग नहीं चाहते हैं कि अवनींद्र के बारे में कोई जानकारी दी जाए। बताया जाता है कि अवनींद्र अब एक गुमनाम जिंदगी जी रहे हैं।

    अवनींद्र दूसरी जिंदगी जी रहा है- पिता

    अवनींद्र दूसरी जिंदगी जी रहा है- पिता

    अमर उजाला की खबर के मुताबिक, अवनींद्र के पिता भानु प्रताप पांडेय ने कहा कि इस निर्भया के साथ दरिंदगी की वारदात को सात साल हो गए हैं, अब उनका बेटा अवनींद्र दूसरी जिंदगी जी रहा है। उनके पिता कहते हैं कि अवनींद्र इस हादसे के बाद से आगे नहीं बढ़ पा रहा था। दिल्ली या गोरखपुर में रहने पर वह कुछ सोच भी नहीं पा रहा था क्योंकि उससे बहुत से सवाल पूछे जा चुके हैं। पिता ने बताया कि अवनींद्र इन दिनों एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर के तौर पर विदेश में काम कर रहा है।

    अवनींद्र को निर्भया को ना बचा पाने का अफसोस- पिता

    अवनींद्र को निर्भया को ना बचा पाने का अफसोस- पिता

    पिता कहते हैं कि निर्भया के दरिंदों को फांसी की सजा बरकरार रही, वह भी यही चाहता है। अवनींद्र को इस बात का हमेशा अफसोस रहता है कि वह निर्भया को बचा नहीं पाया, शायद उसके दिलल में हर पल अपराध बोध होता है कि दिल्ली अगर पहले जाग गई होती दो निर्भया जिंदा होती और हम सबके बीच होती। बता दें कि निर्भया के साथ सात साल पहले, दिल्ली में चलती बस में 6 दरिंदों ने गैंगरेप किया था और उसके प्राइवेट पार्ट्स में लोहे की रॉड से आघात किया था। इसके बाद दरिंदों ने निर्भया और उसके दोस्त को बस से नीचे फेंक दिया था।

    सात साल पहले निर्भया के साथ हुई थी हैवानियत

    सात साल पहले निर्भया के साथ हुई थी हैवानियत

    पटियाला हाउस कोर्ट में इस केस से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि वे दोषियों को एक नया नोटिस भेजकर पूछें कि वे राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजना चाहते हैं। अदालत में इस मामले में अब अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, जारी किए जाने वाले नए नोटिस में दोषियों को एक हफ्ते का वक्त दिया जाएगा।

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