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निर्भया केस: क्या दरिंदें मुकेश की गुहार सुनकर कोर्ट देगी एक और मौका, जानिए

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बेंगलुरु। निर्भया गैंगरेप और हत्‍या मामले में डेथ वारंट जारी होने के बाद चारों दोषियों को दी जानी वाली फांसी का काउंटडाउन शुरू हो गया हैं। इस डेथ वारंट के हिसाब से 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे निर्भया के चारों दरिंदों को फांसी पर लटकाया जाएगा। लेकिन चौथी बार डेथ वारंट जारी होने के अगले ही दिन निर्भया के साथ दरिंदंगी करने वाले दोषी मुकेश ने नया पैंतरा चला।

    Nirbhaya Case: दोषी Mukesh ने बचने के लिए चला नया पैंतरा, क्या फिर टल जाएगी फांसी? | वनइंडिया हिंदी

    nirbhya

    उसने अपनी पूर्व वकील पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फिर से क्यूरेटिव पिटीशन और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने की इजाजत मांगी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट 16 मार्च को सुनवाई करेगा। ऐसे में सवाल उठता हैं कि क्या सुप्रीम कोर्ट उसकी ये गुहार सुनकर क्या उसे एक मौका देगा? आइए जानते हैं...

    इसलिए दोषी अक्षय के लिए अहम हैं 16 मार्च

    इसलिए दोषी अक्षय के लिए अहम हैं 16 मार्च

    बता दें निर्भया के चारों दोषी मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय सिंह (31) की फांसी 20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे तय की है क्योंकि वो अपने तमाम कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल पहले ही कर चुके हैं। दोषियों के चारों कानूनी विकल्‍प समाप्‍त हो जाने के बाद ही चौथी बार पटियाला हाउस कोर्ट ने डेथ वारंट जारी किया था। लेकिन इसके बाद भी फांसी रुकवाने के लए दोषियों का नए-नए पैंतरे आजमाना जारी है। ऐसे में अगले सप्ताह की शुरुआत का दिन सोमवार बेहद अहम होगा, क्योंकि निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चार दोषियों में से एक मुकेश की फांसी से बचने की एक और याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अहम सुनवाई करेगा।

    जानिए वृंदा ग्रोवर को जिस पर निर्भया के दरिंदें मुकेश ने लगाए हैं ये संगीन आरोप

    वकील पर लगाया हैं ये संगीन आरोप

    वकील पर लगाया हैं ये संगीन आरोप

    मुकेश सिंह ने अपने नए वकील मनोहर लाल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में मुकेश ने अपनी पूर्व वकील एमीकस क्यूरी वृंदा ग्रोवर पर ही नहीं केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया और सीबीआई जांच की मांग की। उसने कहा- मैं गृह मंत्रालय, दिल्ली सरकार, वृंदा ग्रोवर और सेशन कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मौजूद अन्य वकीलों की आपराधिक साजिश का शिकार हुआ। इन लोगों ने मुझे सेशन कोर्ट के आदेश का भय दिखाकर कई कागजातों पर दस्तखत करवाए। इन लोगों ने कहा कि अदालत ने याचिकाएं दाखिल करने के लिए मेरे दस्तखत लेने का आदेश दिया था। उनके द्वारा उसे नहीं बताया गया कि क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने के लिए तीन वर्ष का वक्त होता है। वकील के जरिये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसकी पूर्व वकील ने उसके साथ छल किया है। यह याचिका का पिछले सप्ताह 6 मार्च को दायर की गई है।

    दया याचिका दाखिल करने वाले निर्भया के हत्‍यारें मुकेश ने निर्भया को लेकर दिया था ये बेशर्मी भरा बयान

    दोषी मुकेश जुलाई 2021 तक फांसी टलवाना चाहता है

    दोषी मुकेश जुलाई 2021 तक फांसी टलवाना चाहता है

    दरिंदे मुकेश के वकील ने याचिका में तर्क दिया है कि सुधारात्मक याचिका दायर करने की समय सीमा तीन साल थी, लेकिन मुकेश को इस बात की जानकारी नहीं देकर उससे बहुत पहले ही यह याचिका दायर करवा दी गई और यह खारिज भी हो गई। उसने कहा है कि क्युरेटिव प्रिटीशन खारिज होने की तारीख से तीन साल के भीतर सुधारात्मक याचिका दायर की जा सकती है और इसलिए उसे उपलब्ध कानूनी उपाय बहाल किए जाए तथा जुलाई, 2021 तक उसे सुधारात्मक याचिका और दया याचिका दायर करने की अनुमति दी जाए।

    जानें कानून के जानकारों का इस बारे में क्या है कहना

    जानें कानून के जानकारों का इस बारे में क्या है कहना

    कानून के जानकारों की मानें चूंकि दोषी मुकेश की ओर से पहले ही फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने के लिए राष्‍ट्रपति के पास दया याचिका भेजी गई और जिसे राष्‍ट्रपति द्वारा रद्द किया जा चुका है और क्यूरेटिव याचिका भी कोर्ट में रद्द की जा चुकी है इसलिए अब उसका फांसी टलवाने का पैतरा कारगर नहीं साबित होगा। इसलिए पिछली याचिकाओं की तरह मुकेश याचिका रद्द हो जाएगी। हालांकि मौत की सजा के फैसले पर अमल के लिए जारी दूसरे वारंट को चुनौती देते समय दोषी मुकेश की याचिका पर दिल्ली सरकार और केंद्र ने न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल को बताया कि यह समय से पूर्व दायर की गई याचिका है। ऐसे में अगर वो मुकेश का नए वकील ये साबित कर देते हैं कि समय से पूर्व उसकी याचिका दाखिल करवाई गई तो एक बार फिर दरिंदों की फांसी में पेंच फस सकता है।

    जेल मेन्‍युअल के इस नियम के कारण बार-बार टल रही फांसी

    जेल मेन्‍युअल के इस नियम के कारण बार-बार टल रही फांसी

    गौरतलब हैं कि कानूनी पैंतरे चलकर दो महीने से फांसी से बच रहे निर्भया केस के चारों दोषियों के सभी कानूनी विकल्प अब खत्म हो चुके हैं। जेल मेन्युअल के मुताबिक, किसी एक भी दोषी की याचिका अगर लंबित रहती है तो फैसला होने तक निर्भया जैसे केस में सभी दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकती। जिसका एक-एक करके ये फायदा उठा रहे हैं।

     तिहाड़ जेल में चल रही तैयारी

    तिहाड़ जेल में चल रही तैयारी

    कोर्ट द्वारा जारी डेथ वारंट के बाद एक बार फिर चारों दोषियों को फांसी देने के लिए तिहाड़ जेल संख्या-3 में तैयारी तेज कर दी गई है। फांसी के फाइनल ट्रायल के लिए जल्द ही मेरठ से जल्लाद पवन को भी बुलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखा जाएगा।

    अलग-अलग फांसी देने पर 23 मार्च को होनी है सुनवाई

    अलग-अलग फांसी देने पर 23 मार्च को होनी है सुनवाई

    अलग अलग फांसी देने की केंद्र की मांग पर 23 मार्च को है सुनवाई निर्भया के दोषियों को अलग अलग फांसी देने की केंद्र की मांग पर सुप्रीम कोर्ट 23 मार्च को अगली सुनवाई करेगा। गृह मंत्रालय ने तिहाड़ जेल की गाइडलाइन में बदलाव को लेकर याचिका दायर की है।

    16 दिसंबर, 2012 में निर्भया से चलती बस में हुआ था गैंगरेप

    16 दिसंबर, 2012 में निर्भया से चलती बस में हुआ था गैंगरेप

    दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 की रात 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में गैंगरेप हुआ था और दोषियों ने उसके साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की थी। छात्रा ने 29 दिसंबर 2012 को दम तोड़ दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को फांसी की सजा सुनाई थी। एक अन्य दोषी रामसिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

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    English summary
    Nirbhaya case: Will the Supreme Court give another chance after hearing this plea of ​​guilty Mukesh
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