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Nimisha Priya Case: "भारत सरकार कर रही है हर संभव प्रयास", सुप्रीम कोर्ट ने जताया केंद्र पर भरोसा

Nimisha Priya Case Update: केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में फांसी की सजा सुनाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रयासों पर संतोष जताते हुए कहा कि, "वे जो भी संभव है, वह सब कर रहे हैं।" कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब शुक्रवार, 18 जुलाई को सुनवाई के दौरान प्रिया के परिवार की ओर से यमन जाने की अनुमति मांगी गई।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि यमन पर भारत की यात्रा संबंधी पाबंदियां लागू हैं, इसलिए इस मामले में केंद्र सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य है।

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क्या है पूरा मामला?

निमिषा प्रिया, 38 वर्षीय भारतीय नर्स, यमन में कार्यरत थीं और उन पर 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप लगा था। प्रिया का दावा है कि उस व्यक्ति ने उन्हें शारीरिक और आर्थिक शोषण का शिकार बनाया था। बताया गया है कि उन्होंने उस व्यक्ति को बेहोश करने की कोशिश की थी ताकि वह अपने पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज वापस ले सकें, जो कथित रूप से उस व्यक्ति ने जब्त कर रखे थे।

लेकिन दवा की अधिक मात्रा के कारण उसकी मौत हो गई। यमनी अदालत ने 2020 में उन्हें दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई, जिसे बाद में हौथी नियंत्रित सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल ने भी बरकरार रखा।

16 जुलाई को होनी थी फांसी, 15 जुलाई को मिली राहत

प्रिया की फांसी 16 जुलाई 2025 को तय की गई थी, लेकिन ऐन मौके पर, 15 जुलाई को भारत के ग्रैंड मुफ्ती और केरल के सुन्नी इस्लामी नेता, कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के हस्तक्षेप के बाद यमन सरकार ने फांसी पर रोक लगा दी।

SC में सुनवाई के दौरान, एक निजी संगठन ने ग्रैंड मुफ्ती के एक प्रतिनिधि सहित अपनी टीम को यमन भेजने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से मांगी थी ताकि वे वहां जाकर कानूनी और धार्मिक स्तर पर मामले को संभाल सकें। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की यात्रा की अनुमति केंद्र सरकार ही दे सकती है।

अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. ने क्या कहा?

भारतीय नागरिक निमिषा प्रिया, जो यमन में हत्या के एक मामले में मौत की सजा का सामना कर रही हैं, उनके मामले में अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. ने कहा, "सुबह अटॉर्नी जनरल ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के समक्ष इस मामले का ज़िक्र किया और तीन सप्ताह की मोहलत मांगी, क्योंकि फिलहाल निमिषा प्रिया की फांसी पर रोक लगी हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से हमने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि यमन में समझौते के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाए, जिसमें याचिकाकर्ता संस्था, उसके प्रतिनिधि और 'ब्लड मनी' वार्ता का नेतृत्व कर रहे कंथापुरम अबूबकर मुसलियार के प्रतिनिधि शामिल हों।"

उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आज अदालत ने हमारे अनुरोध को स्वीकार कर लिया और केंद्र सरकार से कहा कि वह इस पर विचार करे। साथ ही, कोर्ट ने हमें निर्देश दिया है कि हम इस संबंध में एक औपचारिक निवेदन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करें। जब हम यह अनुरोध करेंगे, तो उम्मीद है कि भारत सरकार इस पर सकारात्मक विचार करेगी।

भारत सरकार ने क्या कहा?

भारत सरकार ने इस मामले में शुरू से सक्रियता दिखाई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान में कहा, "हमने निमिषा प्रिया के परिवार को कानूनी सहायता प्रदान की है। एक वकील की नियुक्ति की गई है, और नियमित तौर पर कांसुलर विज़िट्स की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, हम यमन की स्थानीय प्रशासन और पीड़ित परिवार के लगातार संपर्क में हैं।"

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि मामले की बारीकी से निगरानी की जा रही है और हर जरूरी कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।

ग्रैंड मुफ्ती की भूमिका बनी बड़ी वजह

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ग्रैंड मुफ्ती अबूबकर मुसलियार ने यमन की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं से संपर्क साधा। उनकी अपील के बाद ही यमन की ओर से मानवीय आधार पर फांसी पर अस्थायी रोक लगाई गई। ऐसे में धार्मिक कूटनीति और सांस्कृतिक संवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मामलों में अहम साबित हुई है।

निमिषा की मां का आग्रह - बेटी को बचाएं

इस बीच, निमिषा प्रिया की मां और परिजनों ने भारत सरकार से भावुक अपील की है कि उनकी बेटी को बचाया जाए। परिवार की ओर से यमन जाकर 'दिया' (रक्तपात माफी) कानून के तहत मृतक के परिवार से बातचीत करने की इच्छा भी जताई गई है, जिससे फांसी से बचा जा सके।

निमिषा प्रिया का मामला ना केवल कानूनी बल्कि मानवीय, सामाजिक और कूटनीतिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। जहां एक ओर कानून का पालन जरूरी है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नागरिकों की रक्षा और उनकी मदद करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने भले ही सीधी अनुमति नहीं दी हो, लेकिन केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना कर यह स्पष्ट किया है कि यह मामला भारत सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

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