आरुषि मर्डर केस में नया खुलासा, सुनवाई पूरी होने से पहले लिख लिया था 'फैसला'
नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मिस्ट्री मर्डर आरुषि-हेमराज हत्या मामले में भले ही फैसला आ गया हो, दोषियों को सजा भी मिल गई हो, लेकिन देश और दुनिया में सनसनी फैलानी वाली इस मर्डर मिस्ट्री में नया खुलासा हुआ हैं। साल 2008 में नोएडा के सेक्टर 21 के जलवायु विहार फ्लैट में हुए इस हादसे को लेकर लंबे वक्त कर इसे कवर करने वाले पत्रकार अविरूक सेन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।

अविरूक ने आरुषि नाम से किताब लिखी है जिसमें कई सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं।इस किताब के मुताबिक इस मर्डर के आरोप में सजा काट रहे दोषी राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को मारा क्योंकि उसने बेटी के कमरे में दोनों को सेक्स करते देख लिया था। लेकिन अविरूक ने इस पर सवाल खड़ा किया है कि क्या किसी ने ये साबित करने की कोशिश की कि हेमराज वहां पर था।
पापा ने ही खींची थी आरुषि की आखिरी फोटो, इसी कपड़े में मिली थी लाश
अविरूक ने अपने इस सवाल का सोर्स एमएस दाहिया की उस रिपोर्ट को बनाया जिसमें यह गलत तरीके से माना गया था कि हेमराज का खून आरुषि के तकिये पर पाया गया। तनवीर अहमद मीर ने दाहिया को उनकी रिपोर्ट पर कायम रहने दिया और इसकी बरामदगी की जगह को कोई चुनौती नहीं दी गई। हेमराज के खून से सने तकिये के कवर की बरामदगी से जुड़ा फैक्ट साल भर में कोर्ट में साबित हुआ।
गलती तो मां-बाप की थी फिर हत्या आरुषि की क्यों?
बचाव पक्ष के वकील तनवीर अहमद मीर ने 24 अक्टूबर को अपनी बहस शुरू की और अगले दो हफ्ते तक केस से जुड़ी परिस्थितियों पर बहस करते रहे , मामले की सुनवाी कर रहे जज श्याम लाल के बेटे ऐडवोकेट आशुतोष यादव के मुताबिक उन्हें फैसला लिखने में एक महीने से ज्यादा का वक्त लग गया। इसे लेकर पत्रकार अविरूक ने लिखा कि इसका मतलब साफ था कि बचाव पक्ष की दलील शुरू होने से बहुत पहले श्याम लाल और उनके बेटे ने जजमेंट लिखना शुरू कर दिया था।












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