भूमि अधिग्रहण कानून के पीछे सिंगूर जैसे आंदोलन: रमेश
भोपाल। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण कानून के पीछे पश्चिम बंगाल का सिंगूर जैसे आंदोलन है। इस कानून के बन जाने से किसानों गरीब, दलित और जनजातीय वर्ग को अपना हक मिलेगा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रवास पर आए रमेश ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि नए कानून के बनने से लगभग 119 वर्षों से चले आ रहे अंग्रेजों के भूमि अधिग्रहण संबंधी कानून से छुटकारा मिलेगा।
इसे लोकसभा व राज्यसभा में सभी दलों की सहमति से पारित कर दिया गया है, अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना शेष है। रमेश ने आगे कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों मे बीते 20 वर्षों से जमीन को लेकर अनेक आंदोलन चल रहे हैं। उन्होंने माना कि नया कानून सिंगूर से प्रभावित होकर बनाया गया है। जब भी कोई उद्योग स्थापित हेाता है तो एक बड़ा वर्ग प्रभावित होता है।

इसके लिए जरूरी है कि उनका पुर्नवास और पुर्नव्यवस्थापन हो। ऐसा इसलिए क्योंकि भूमि अधिग्रहण से किसान, खेतिहर मजदूर से लेकर छोटे कारोबारी तक प्रभावित होते हैं। देश में बढ़ती नक्सलवादी समस्या का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि जनजातीय वर्ग के बीच नक्सल संगठनों की पैठ इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वे जंगल व जमीन को आधार बनाते हैं।
इस कानून के आने से किसान, गरीब, जनजातीय वर्ग को अपनी जमीन का हक मिलेगा तो नक्सलवाद का असर अपने आप कम हो जाएगा। रमेश ने कहा कि इस कानून के आने से जमीन अधिग्रहण के लिए कलेक्टर की मनमर्जी नहीं चलेगी, इतना ही नहीं सार्वजनिक हित के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का उपयोग किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। इस कानून में पुर्नव्यवस्थापन व पुनर्वास का विशेष प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि नए कानून के मुताबिक किसानों को बाजार दर से चार गुना और शहरी इलाकों में दो गुना मुआवजे के साथ पुनर्वास व पुर्नव्यवस्थापन का प्रावधान है। जनजातीय इलाके में जमीन का अधिग्रहण ग्राम सभा की अनुमति और गैर जनजातीय क्षेत्र में ग्राम सभा की सहमति से ही जमीन का अधिग्रहण किया जा सकेगा। इन नए कानून से कानूनी आधार पर ही विकास हो सकेगा।
इंदिरा सागर बांध प्रभावितों के सवाल पर रमेश ने कहा कि अब देश को दूसरे इंदिरा सागर की जरूरत नहीं है, जो प्रभावित हैं, उन्हें उनका हक मिलेगा, मगर नए कानून की शर्तों के मुताबिक। मध्य प्रदेश की ओर से सिंचाई परियोजनाओं को लेकर आए सुझाव के आधार पर संशोधन भी किए गए हैं।
उन्होंने नए भूमि अधिग्रहण कानून की खूबियां गिनाते हुए कहा कि कानून से प्रभावितों को लाभ तो होगा ही साथ में जिस प्रयोजन के लिए जमीन अधिग्रहित की गई है उसे तय समय में पूरा करना होगा। जो परियोजनाएं लंबित हैं और तय प्रावधानों को पूरा नहीं किया गया है, उन प्रभावितों को भी लाभ मिलेगा।












Click it and Unblock the Notifications