नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के छठे दिन रीडिंग इंडिया संवाद और सेना दिवस रहे मुख्य आकर्षण
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के छठे दिन में रीडिंग इंडिया डायलॉग सत्र, पुस्तकालय नवाचार पर चर्चा, और सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में पढ़ने की संस्कृति, पुस्तकालयों तक पहुंच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने पर जोर दिया गया, जिसमें सरकार, शिक्षा जगत और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के उल्लेखनीय वक्ता शामिल थे।
*नई दिल्ली, 15 जनवरी 2026:* नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 के छठे दिन विचारों, इतिहास और राष्ट्रबोधका प्रभावशाली संगम देखने को मिला। जहां एक ओर राष्ट्रीय पठन संस्कृति कोसशक्त बनाने के उद्देश्य से रीडिंग इंडिया संवाद की शुरुआत हुई, वहीं दूसरी ओरसेना दिवस के अवसर पर देश के वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को भावपूर्णश्रद्धांजलि दी गई।

पठन एवं पुस्तकालयों के उन्नयन पर केंद्रित दो दिवसीय *रीडिंग इंडिया संवाद2026* का शुभारंभ गुरुवार को भारत मंडपम, नई दिल्ली में हुआ। भारत सरकार केशिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) द्वारा आयोजित यहराष्ट्रीय नेतृत्व संवाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और *विकसितभारत@2047* के विज़न के अनुरूप भारत के पठन, पुस्तकालय और ज्ञान तक पहुंच केपारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
संवाद का उद्घाटन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार नेकिया। इस अवसर पर सेतु आयोग, उत्तराखंड के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, स्कूलीशिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अपर सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी, राष्ट्रीय पुस्तकन्यास के निदेशक युवराज मलिक तथा एनबीटी के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशककुमार विक्रम उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में युवराज मलिक ने कहा कि पठन किसी भी प्रगतिशील समाज कीआधारशिला है। उन्होंने सिकंदर, चंद्रगुप्त मौर्य और नेपोलियन बोनापार्ट जैसेऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए बताया कि पुस्तकें व्यक्ति केचिंतन, जिज्ञासा और व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाती हैं।संजय कुमार ने कहा कि "पुस्तकों से भरी दीवार से अधिक सुंदर कुछ नहीं होता।"उन्होंने पठन को दूसरे के मन में प्रवेश करने की शक्ति बताते हुए भारतीयभाषाओं में पुस्तकों के अधिक प्रकाशन और व्यापक पाठकवर्ग विकसित करने कीआवश्यकता पर बल दिया।अर्चना शर्मा अवस्थी ने बचपन में पुस्तक मेले में बिताए गए अनुभव साझा करतेहुए पठन संस्कार विकसित करने में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका को रेखांकितकिया। वहीं राजशेखर जोशी ने पुस्तकालयों को प्रौद्योगिकी और व्यक्तिगत पठनमार्गों से युक्त जीवंत ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई।
संवाद के पहले दिन दो समूह चर्चाएं आयोजित की गईं—*पाठ्यपुस्तकों से पठनसंस्कृति तक: कक्षा की पुनर्कल्पना* और *पुस्तकालय सीखने के केंद्र के रूपमें: पठन स्थलों का पुनः अधिग्रहण*। इनमें एमसीडी के शिक्षा निदेशक निखिलतिवारी, यूनिसेफ इंडिया के शिक्षा विशेषज्ञ दानिश अज़ीज़, टाटा ट्रस्ट्स कीमौलश्री कलोथिया, एएसईआर सेंटर की श्वेता भुटाडा, इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशनके अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राय, एमिटी विश्वविद्यालय की प्रो. सुनीता रतन औरस्कॉलास्टिक इंडिया के नीरज जैन ने विचार रखे।
थीम पवेलियन में सेना दिवस के अवसर पर भारत की सैन्य विरासत को समर्पित विशेषसत्र आयोजित किए गए। एक पैनल में परमवीर चक्र से सम्मानित पहले जीवित सैनिकमेजर राम राघोबा राणे के जीवन और योगदान पर चर्चा की गई। डॉ. डी. वी.गुरुप्रसाद ने कर्नाटक के कारवार से शुरू हुई उनकी यात्रा का उल्लेख करते हुएअनुशासन और सेवा मूल्यों पर प्रकाश डाला।
लेफ्टिनेंट कर्नल अन्नप्पा नारायण शेट ने 1947–48 के संघर्ष के दौरान एकइंजीनियर अधिकारी के रूप में मेजर राणे के अद्वितीय साहस का वर्णन किया, जबउन्होंने दुश्मन की भारी गोलाबारी के बीच बारूदी सुरंग निष्क्रिय कर भारतीयसेनाओं को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
*ऑपरेशन विजय (कारगिल युद्ध, 1999)* पर आयोजित एक अन्य चर्चा में लेफ्टिनेंटजनरल मोहीन्द्र पुरी और ब्रिगेडियर ओम प्रकाश यादव ने कर्नल एस. सी. त्यागी केसाथ अपने अनुभव साझा किए। लेफ्टिनेंट जनरल पुरी ने दुर्गम भूभाग और विषम मौसमपरिस्थितियों में कमान संभालने की चुनौतियों का उल्लेख किया, जबकि ब्रिगेडियरयादव ने सामरिक योजना, सैनिकों की सुरक्षा और आपूर्ति लाइनों की निरंतरता परप्रकाश डाला।
इसी क्रम में लेखक तरुण विजय की पुस्तक *"मंत्र विप्लव"* का लोकार्पण भी कियागया। कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबले ने महर्षि अरविंद के विचारों को स्मरणकरते हुए प्राचीन ज्ञान के संरक्षण, उसकी उपयोगिता और नए ज्ञान की सतत खोज परबल दिया।
अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में *"समकालीन साहित्य और ईरान–भारत के साझा सांस्कृतिकपक्ष"* विषय पर आयोजित चर्चा में डॉ. मोहम्मद फतेहली, डॉ. ग़ह्रेमान सुलेमानीऔर डॉ. सैयद अख़्तर हुसैन काज़मी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक साहित्यिकसंबंधों पर विचार रखा। वक्ताओं ने फ़ारसी भाषा की ऐतिहासिक भूमिका, प्रशासनिकऔर बौद्धिक आदान-प्रदान में उसके योगदान और पंचतंत्र के फ़ारसी अनुवाद *कलीलावा दिम्ना* को भारत-ईरान संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।
पुस्तक मेले में आज आने वाले प्रमुख अतिथियों में सत्य पाल सिंह, पूर्वकेंद्रीय राज्य मंत्री, मेजर जनरल (डॉ.) बिपिन बख्शी और राज्यसभा सांसदसुधांशु त्रिवेदी शामिल रहे।
बच्चों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा मेला
बाल मंडप में कहानी सत्र, वैदिक गणित और विज्ञान कक्षाएं, कठपुतली शो, बाललेखक सम्मेलन और बाल फिल्मों की स्क्रीनिंग ने बच्चों का ध्यान आकर्षित किया।वहीं एम्फीथिएटर में रूसी लोक परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति औरलोक-फ्यूजन बैंड *रहस्य: द प्रोजेक्ट* की संगीतमय प्रस्तुति ने दर्शकों कोमंत्रमुग्ध कर दिया। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का छठा दिन ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रीयस्मृति का उत्सव बनकर उभरा।












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