NEET-JEE परीक्षा कराना 'नसबंदी' जैसी गलती होगी, सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार को दी ये नसीहत
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) और जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा) परीक्षा 2020 को कराए जाने का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। राजनेताओं के साथ-साथ छात्र भी कोरोना वायरस (कोविड-19) के बीच परीक्षाओं के आयोजन को गलत मान रहे हैं। देशभर के 4000 से अधिक छात्रों ने इन परीक्षाओं को स्थगित करवाने की मांग को लेकर एक दिन की भूख हड़ताल आरंभ कर दी है। इस बीच भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि इस समय में जेईई-नीट परीक्षा को कराया जाना बिल्कुल इंदिरा सरकार में हुई नसबंदी जैसी गलती होगी।

सुब्रमण्यम स्वामी ने क्या कहा?
सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'अगर हमारी मोदी सरकार अभी जेईई/नीट परीक्षाओं का आयोजन करती है तो ये 1976 में हुई नसबंदी जैसी बड़ी गलती होगी। जिसके कारण इंदिरा सरकार का 1977 में पतन हुआ था। भारतीय मतदाता चुपचाप सह सकते हैं लेकिन उनकी यादें लंबी होती हैं।' आपको बता दें इससे पहले सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर अपील की थी कि इन परीक्षाओं का आयोजन दिवाली के बाद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि युवाओं में महामारी के बीच परीक्षा कराए जाने को लेकर निराशा है।
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NTA ने नोटिस जारी किया
वहीं नेशनल टेस्टिक एजेंसी (एनटीए) ने एक अहम नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि जेईई मेन 2020 परीक्षा अपने तय समय पर 1-6 सितंबर, 2020 के बीच आयोजित होगी। इसके साथ ही नीट-यूजी 2020 परीक्षा का आयोजन भी शेड्यूल के अनुसार, 13 सितंबर को होगा। अपने नोटिस में एनटीए ने कहा है कि बेशक ये महामारी का समय है लेकिन जीवन को रोका नहीं जा सकता है। छात्रों के करियर को लंबे समय तक के लिए जोखिम में नहीं डाला जा सकता और ना ही पूरे अकैडमिक ईयर को बर्बाद किया जा सकता है। इसलिए इन दोनों परीक्षा का आयोजन समय पर होगा। हालांकि वायरस से बचाव के लिए सभी उपायों का पालन होगा। परीक्षाओं को स्थगित नहीं किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी जेईई मेन 2020 और नीट 2020 परीक्षा को स्थगित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था, 'कोविड के बावजूद जीवन को आगे बढ़ना ही है और कोर्ट नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के फैसले में दखल देकर छात्रों के करियर को खतरे में नहीं डाल सकता है।' इस बेंच में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी भी शामिल थे। बेंच ने कहा था कि 'छात्रों के करियर को संकट में नहीं डाला जा सकता है। याचिका खारिज की जाती है।'













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