NCC डीजी बोले- वर्तमान नियम एनसीसी में ट्रांसजेंडरों के नामांकन की अनुमति नहीं देते
नई दिल्ली। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल तरुण कुमार आइच ने शुक्रवार को कहा कि, वर्तमान नियमों नें एनसीसी में ट्रांसजेंडर के नामांकन की अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा कि, एनसीसी को थर्ड जेंडर शामिल होते है तो उसके लिए इस संगठन में कई तरह के बदलावों की जरूरत पड़ेगी। लेफ्टिनेंट जनरल तरुण कुमार आइच ने इस साल की शुरुआत में नेशनल कैडेट कोर यानी एनसीसी के महानिदेशक का पदभार संभाला है। वे राष्ट्रीय कैडेट कोर के 33 वें डीजी बनाए गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जब डीजी एनसीसी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, तब केरल हाईकोर्ट एनसीसी अधिनियम की धारा 6 के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्ति के नामांकन को हटाने के खिलाफ एक ट्रांसवूमन की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। लेफ्टिनेंट जनरल तरुण कुमार आइच ने कहा कि, हम एनसीसी में उन नियमों के अनुसार चलते हैं जो 1948 के एनसीसी अधिनियम द्वारा शासित हैं। जब हम पुरुष या महिला की बात करते हैं, तो हमारे पास ट्रांसजेंडर को नामांकित करने के लिए खंड नहीं है।
डीजी एनसीसी ने कहा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा थर्ड जेंडर को मान्यता मिलने के बाद भी हमारे नियम इसकी अनुमति नहीं देते हैं। भविष्य में ट्रांसजेंडर्स को लेने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर, डीजी ने कहा, मुझे लगता है कि निर्णय उच्चतम स्तर पर लिया जाना है क्योंकि निर्णय में सभी वर्दीधारी बलों को शामिल करता है। यह एक निर्णय है जिस पर मैं टिप्पणी नहीं कर सकता। इसे राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना होगा। डीजी ने बताया कि इस वक्त एनसीसी में करीब 15 लाख कैडेट्स हैं जिनमें 13.84 प्रतिशत गर्ल-कैडेट्स हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महानिदेशक (एनसीसी) ने भी स्कूलों में एनसीसी की अनिवार्यता के बारे में बात की और कहा कि वर्तमान में यह संभव नहीं है क्योंकि इसमें वित्तीय बोझ होगा। अगर देश के सभी स्कूल-कॉलेजों में एनसीसी ट्रेनिंग को अनिवार्य किया जाता है तो एक अनुमान के मुताबिक, इसका सालाना बजट करीब-करीब 96 हजार करोड़ हो सकता है, यानि लगभग उतना जितना कि देश की सेनाओं के आधुनिकिकरण का बजट है।












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