ONGC में कई वर्षों से आरक्षण के नियमों का हो रहा उल्लंघन, पिछड़ा वर्ग आयोग ने कारण बताओ नोटिस भेजा
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने शुक्रवार को तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ओएनजीसी पर आरोप लगा है कि वह कई वर्षों से आरक्षण के नियमों का उल्लंघन कर रही है और पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों का 'शोषण' कर रही है। इससे पहले एनसीबीसी ने 14 अगस्त को ओएनजीसी को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें उससे अपने सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक में शामिल होकर इस 'उल्लंघन' के बारे में बताने को कहा था। लेकिन कंपनी का कोई भी सदस्य इस बैठक में नहीं आया। जिसके बाद एनसीबीसी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, एनसीबीसी ने इसे लेकर जो आंकड़े एकत्रित किए हैं, उनमें पता चला है कि 1993 से जितने ओबीसी कर्मचारियों की नियुक्ति की जानी थी, उतनी की नहीं की गई। इसके अलावा ओबीसी कर्मचारियों का शोषण किया जाता है और जो भी इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे प्रताड़ित किया जाता है। अब एनसीबीसी ने कंपनी से अगले हफ्ते हाजिर होकर इस गड़बड़ी के बारे में बताने को कहा है। अगर कंपनी ये जवाब नहीं दे पाती है कि उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं ओएनजीसी का कहना है कि वह इन आरोपों का जवाब सोमवार को दे देगी।
एनसीबीसी के कारण बताओ नोटिस के अनुसार, 'ओएनजीसी को आयोग के मुख्यालय में 25 अगस्त, 2020 की सुबह 11.30 बजे आकर जवाब देना होगा।' अपने 14 अगस्त के नोटिस में एनसीबीसी ने कहा था कि ओएनजीसी में आरक्षण नियमों को लेकर कई गड़बड़ियों का पता चला है। नोटिस के अनुसार, भर्ती किए जाने वाले कर्मचारियों की कम संख्या के अलावा ओबीसी कर्मचारियों का शोषण भी किया जाता है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 1993 में 11 ओबीसी उम्मीदवारों की भर्ती की गई। जबकि कुल भर्ती 286 थीं और इनमें से 77 ओबीसी उम्मीदवारों की भर्ती होनी थी।
इसके अलावा 1994 में ओएनजीसी में 99 पदों पर भर्ती की गई थी, जिनमें से 26 ओबीसी उम्मीदवारों को भर्ती किया जाना था। लेकिन कंपनी ने केवल 8 ओबीसी उम्मीदवारों की भर्ती की। आयोग के आंकड़ों में पता चला है कि ऐसा कंपनी पिछले 13 सालों (1993-2016) से कर रही है। वहीं आयोग ने 27 फरवरी को भी कंपनी को इन गड़बड़ियों को लेकर एक प्रश्नावली भेजी थी, उसपर भी कंपनी का कोई जवाब नहीं आया है।
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