Navy Day : नौसेना की जांबाज लेडी ऑफिसर, जिन्होंने समंदर पर लिखी इबारत
आज4 दिसंबर को नेवी दिवस पर आइए जानते हैं भारतीय नौसेना की समंदर की सिकंदर छह जाबांज नेवी महिला ऑफीसर के आईएनएस तारिणी के कामयाब ऐतिहासिक सफर से जुड़े अनुभव,
बेंगलुरु। हर साल भारतीय नौसेना दिवस 4 दिसंबर को मनाया जाता है। भारतीय नौसेना की उपलब्धियों को याद करने तथा मोर्चे पर जाने वाले जवानों को सम्मान देने के लिए भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है। भारतीय नौसेना की की छह महिला अधिकारी जिन्होंने हर बाधाओं को पार कर समुद्र के रास्ते दुनिया की सैर कर समंदर पर इबादत लिखी थी। उन्होंने भारतीय नेवी में नया इतिहास लिख कर पूरे विश्व में भारत को गौरान्वित किया। आज नेवी दिवस पर आइए जानते हैं भारतीय नौसेना की समंदर की सिकंदर छह जाबांज नेवी महिला ऑफिसर के कामयाब ऐतिहासिक सफर से जुड़े उनके अनुभव ..
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छोटी सी पाल नौका (नौकायन पोत) आईएनएस तारिणी के जरिए दुनिया का चक्कर काट कर नौसेना की जांबाज महिला इन अफसरों ने पिछले वर्ष इतिहास रचा था। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के प्रतिनिधित्व वाली टीम ने 26 हजार समुद्री मील का सफर तय किया था। कभी 140 किलोमीटर की रफ्तार तो कभी तेज हवा ने उनका रास्ता रोका, तो कभी 10-10 मीटर ऊंची लहारों ने इनका रास्ता रोका लेकिन भारत की इन बेटियों का हौसाला डिगा नहीं।

उन्होंने हर मुश्किलों को चीरते हुए यह सफर पूरा किया। इस अभियान को नाविका सागर परिक्रमा नाम दिया गया। इस दल को रक्षा मंत्री ने 7 सितंबर 2017 में गोवा से रवाना किया था। इन महिला अधिकारियों ने आठ महीने और 11 दिनों तक समुद्री रास्ते से दुनिया का चक्कर काटा। यह पहला मौका था जब नौसेना की महिला अधिकारियों ने समुद्र के रास्ते विश्व परिक्रमा पूरी करने का साहसिक कारनामा कर दिखाया था।

भारतीय नेवी की यह पहली टीम थी, जिसने देश में निर्मित आईएसएनवी नौका से सागर परिक्रमा की। टीम का नेतृत्व ऋषिकेश की ले. कमांडर वर्तिका जोशी ने किया। टीम में लेफ्टिनेंट कमांडर स्वाती (विशाखापट्टनम), लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा (कुल्लू), बी ऐश्वर्य (हैदराबाद), लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता (देहरादून), लेफ्टिनेंट ए विजया देवी (मणिपुर) शामिल थीं।

200 दिन तक बारिश का पानी पीना पड़ा
इन्होंने समुद्र की उठती-गिरती लहरों के बीच 254 दिन में तीन महासागर, चार महाद्वीप और पांच देशों की साहसिक यात्रा के दौरान करीब 200 दिन का सफर बारिश का पानी पीकर करना पड़ा। 17 मीटर की छोटी सी बोट होने के कारण अधिक राशन-पानी रखना संभव नहीं था। इनकी बोट में लगा आरओ खराब भी गया और रेन हार्वेस्टिंग के जरिये पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ी।
समुद्री तूफान नहीं डिगा पाया इनका हौसला
गोवा से ये आफिसर जब तारिणी लेकर निकली तो वहां तापमान 40 डिग्री था। प्रशांत महासागर तक पहुंचते ही वहां तापमान माइनस में पहुंच गया। यह केवल अकेली कठिनाई नहीं थी, यहां उन्हें तेज तूफान का भी सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं इस अभियान के दौरान पूरा सभी अधिकारी कई दिनों तक जागते रहे। टीम का कोई भी सदस्य नहीं सोया। इसके अलावा कई जगहों पर हवा नहीं होने के चलते उन्हें लंबा इंतजार भी करना पड़ा।

यात्रा के दौरान जब टूट गया स्टेयरिंग व्हील
वहीं, मॉरिशस से पहले बोट का स्टेयरिंग व्हील भी टूट गया, लेकिन इस पर भी इन्होंने धैर्य नहीं खोया। 8 महीने 11 दिन में गोवा से आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फॉकलैंड, आईलैंड, केपटाउन और मॉरिशस होते हुए 21600 नॉटिकल माइल का सफर पूरा किया। आठ महीने 11 दिन के इस लंबे सफर में कई चुनौतियां आईं लेकिन टीम सदस्यों ने हिम्मत नहीं हारी। आईएनएस तारिणी पर सवार इस टीम ने पांच देशों, 4 महाद्वीपों, तीन महासागर और तीन अंतरीपों के साथ-साथ भूमध्य रेखा को भी दो बार पार कर किया। दल ने आस्ट्रेलिया के फ्रेमन्टाइल और न्यूजीलैंड के लेटिल्टन से पोर्ट स्टेनली और केपटाउन होते हुए अभियान पूरा किया।

जब केपहॉर्न (चिली) में महिला क्रू ने फहराया तिरंगा
समुद्री रास्ते के जरिए पूरी दुनिया का चक्कर लगा रही INSV 'तारिणी' केपहॉर्न (चिली) पहुंची तो तारिणी के साथ सागर परिक्रमा का पराक्रम कर दिखाया था। यहां पहुंचने के बाद आइएनएसवी की महिला क्रू सदस्यों ने तिरंगा लहराया था। केप हॉर्न (चिली) को पार करने का मतलब एक तरह से एवरेस्ट फतह करने जैसा है क्योंकि यह समुद्री सफर की सबसे मुश्किल चुनौती समझा जाता है। केपहॉर्न में हवा की रफ़्तार करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से चलती हैं। यहां हमेशा पानी की कई मीटर उंची लहरें उठती हैं। जिन्हें पार करना आसान नहीं होता है।
लेफिनेन्ट विजया ने केपहार्न को लेकर बताया कि , केप हॉर्न को माउंट एवरेस्ट कहा जाता है। वहां उन्हें तूफान का सामना करना पड़ा। 140 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं। उन्होंने नाव को बचाकर निकालने के लिए कड़ी मशक्कत की।विजया ने बताया कि कई जगहों पर ब्लू वेल और शार्क नाव के पास मंडराते रहे। उन्होंने बताया कि ऐसा लग रहा था मानो लाइफ ऑफ पाई फिल्म जी रहे हों।

समुद्र को नहीं पता कि नाविक महिला या पुरुष है
क्या इस सफर पर महिला या पुरुष होने से फर्क पड़ता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि समुद्र को नहीं पता कि नाविक महिला या पुरुष है। विजया ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी समुद्र से होने वाली बीमारी होती है। एक किस्सा याद करते हुए वर्तिका ने बताया कि उनकी नाव का स्टीयरिंग पोर्ट लुइस के पास खराब हो गयी। छोटी-मोटी चीजें वे लोग सुलझा लेते थे लेकिन इसके लिए उन्हें मॉरीशस में रुकना पड़ा। वहां के अधिकारियों ने उसे रिपेयर किया। उनकी नाव इक्वेटर से 9 बार गुजरी। जोशी ने बताया कि बेल्ट ऑफ डॉल्ड्रम्स पर कभी एकदम शांति से चल रही हवा अचानक 95 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ लेती थी।
ओडिशा के मशहूर तारा-तारिणी मंदिर का दिया गया था नाम
गोवा के एक्वेरियस शिपयार्ड लिमिटेड में तैयार की गई तारिणी हॉलैंड के टोन्गा 56 नाम के डिजाइन पर आधारित था। इसे बनाने में फाइबर ग्लास, एल्युमिनियम और स्टील जैसी धातुएं इस्तेमाल की गई। ओडिशा में मशहूर तारा-तारिणी मंदिर के नाम पर इस पोत का नाम रखा गया है। 23 टन वजन वाला आइएनएसवी तारिणी 56 फुट लंबा जहाज था, जिसका निर्माण गोवा में हुआ था। स्वदेशी तकनीक से निर्मित आईएनएसवी तारिणी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय फोरम में इसने ‘मेक इन इंडिया'के पहल का भी मंचन किया था।
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