Meenakshi Natarajan: कांग्रेसी ने कहा '100 टका टंच माल', Rahul Gandhi ने दिया इनाम, अब नामांकन रद्द

Meenakshi Natarajan Nomination Cancel: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों शह-मात का खेल तेज है। राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस ने अपनी एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हो जाने के बाद तूफान खड़ा कर दिया है। 10 जून 2026 को कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में चुनाव आयोग पहुंचा।

अभिषेक मनु सिंघवी समेत नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गलत और कानून के खिलाफ बताया। लेकिन इस घटना के पीछे की कहानी सिर्फ नामांकन रद्द होने की नहीं, बल्कि कांग्रेस की अंदरूनी रणनीति, ईमानदारी की मिसाल और पुराने विवादों की है। आइए इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं - क्यों चुनी गई मीनाक्षी, किस कांग्रेसी ने '100 टका टंच माल' का तमगा दिया?

meenakshi-natarajan-nomination-cancelled

नामांकन रद्द: विवाद की शुरुआत

मध्य प्रदेश विधानसभा सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने 9 जून को मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया। बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट और राज्य बीजेपी महासचिव राहुल कोठारी की आपत्ति पर कार्रवाई हुई। आधार बताया कि नामांकन पत्र के साथ दिए गए हलफनामे में एक पुराने मामले का खुलासा नहीं किया गया।

कांग्रेस का दावा है कि यह मामला 2022 का है, हैदराबाद में एक निजी शिकायत (हरासमेंट संबंधी), जिसमें सिर्फ नोटिस आया था। कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई, न कोई चार्जशीट। कोर्ट ने सिर्फ यह पूछा था कि आगे सुनवाई शुरू हो या नहीं। पार्टी का कहना है कि ऐसे नोटिस को 'आपराधिक मामले' की श्रेणी में गिनना कानून के मुताबिक गलत है। अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, 'इस आधार पर नामांकन रद्द करने का कोई प्रावधान नहीं है।'

कांग्रेस ने इसे बीजेपी की 'सीट चोरी' की साजिश बताया। नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस अब दूसरे उम्मीदवार नहीं उतार सकती क्योंकि नामांकन की आखिरी तारीख बीत चुकी है। इससे बीजेपी के तीन उम्मीदवार, तरुण चुघ, राजनेश अग्रवाल और महेश केवट बिना मुकाबले जीत सकते हैं।

Who Is Meenakshi Natarajan: मीनाक्षी नटराजन कौन हैं?

मीनाक्षी नटराजन (जन्म 23 जुलाई 1973) मध्य प्रदेश की नागदा की रहने वाली हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से एमएससी (बायोकेमिस्ट्री) और एलएलबी किया। 2009 में मंदसौर से लोकसभा सांसद चुनी गईं। वह राहुल गांधी की युवा ब्रिगेड की प्रमुख सदस्य रहीं और कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। फिलहाल वह एआईसीसी की तेलंगाना प्रभारी भी हैं।

राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान 'कड़क, ईमानदार और सादगी भरी' नेता के रूप में है। आज के वीआईपी कल्चर वाले दौर में उनकी लाइफस्टाइल जमीन से जुड़ी हुई मानी जाती हैं। साधारण खान-पान, साधारण रहन-सहन और बड़ी गाड़ियों-घरों से दूर।

ईमानदारी की मिसाल: ₹4 करोड़ वापस

2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मीनाक्षी को मंदसौर से लड़ने के लिए करीब ₹5 करोड़ का फंड दिया। चुनाव खत्म होते ही उन्होंने ₹4 करोड़ से ज्यादा की राशि पार्टी फंड में वापस जमा करा दी। यह कोई पहली बार नहीं था।

विधानसभा चुनावों के दौरान भी उन्हें जो चंदा मिला, उसका लगभग 75% उन्होंने पार्टी को लौटा दिया। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि जहां ज्यादातर नेता चुनावी फंड की कमी का रोना रोते हैं, वहां मीनाक्षी का यह कदम राहुल गांधी के 'ईमानदार नेतृत्व' वाले विजन पर मुहर लगाता है। यह कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। एक तरफ जहां राजनीति को 'सब भ्रष्ट' बताने वाले नैरेटिव चलते हैं, वहीं मीनाक्षी जैसी नेता उस नैरेटिव को चैलेंज करती हैं।

किस कांग्रेसी ने दिया '100 टका टंच माल' का तमगा?

2013 में दिग्विजय सिंह ने मंदसौर की रैली में मीनाक्षी की तारीफ करते हुए कहा था कि मैं राजनीति का पुराना जौहरी हूं। मीनाक्षी जी का काम देखकर कह सकता हूं कि वह 100 टका टंच माल हैं। यह बयान विवादास्पद हो गया। 'टंच माल' शब्द को कुछ लोगों ने सेक्सिस्ट माना, जबकि दिग्विजय सिंह ने सफाई दी कि उनका मतलब 'खरा सोना' या 'शुद्ध' से था। मीनाक्षी ने खुद कहा कि उन्हें बुरा नहीं लगा। उन्होंने बयान को पूरे संदर्भ में देखने की अपील की । यह उनकी मेहनत और ईमानदारी की तारीफ थी। आज जब मीनाक्षी राज्यसभा उम्मीदवार बनीं, तो दिग्विजय सिंह ने उन्हें बधाई भी दी। लेकिन पुराना बयान फिर से सोशल मीडिया पर घूम रहा है।

राहुल गांधी ने मीनाक्षी को क्यों चुना?

कांग्रेस हाईकमान ने कमलनाथ जैसे दिग्गजों को किनारे कर मीनाक्षी पर दांव खेला। इसके कई कारण लगते हैं:

  • राहुल गांधी का भरोसा: मीनाक्षी को राहुल की करीबी माना जाता है। उनकी सादगी और फंड वापस लौटाने वाली घटनाएं राहुल के 'नए राजनीतिक संस्कार' वाले विजन से मैच करती हैं।
  • महिला और युवा चेहरा: कांग्रेस महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दे रही है। मीनाक्षी अनुभवी लेकिन अपेक्षाकृत साफ छवि वाली नेता हैं।
  • मध्य प्रदेश में रणनीति: बीजेपी ने आखिरी वक्त पर महेश केवट को उतारकर मुकाबला कड़ा किया। कांग्रेस को एक ऐसे उम्मीदवार की जरूरत थी जिसकी छवि पर कोई कीचड़ न उछला जा सके। मीनाक्षी की बेदाग छवि पार्टी के लिए ढाल बन सकती थी।
  • संगठनात्मक अनुभव: तेलंगाना प्रभारी के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत करने का काम किया है।

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव का गणित

मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। बीजेपी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस के पास पर्याप्त विधायक नहीं हैं, इसलिए क्रॉस वोटिंग की उम्मीद थी। लेकिन नामांकन रद्द होने से कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो गई है।

कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने RO के जरिए राजनीतिक दखल दिया। पार्टी कार्यकर्ता चुनाव आयोग के बाहर धरना दे रहे हैं। जितु पाटवारी जैसे राज्य नेताओं ने भी हैरानी जताई है कि हाईकमान ने उन्हें पहले सूचित नहीं किया।

चुनाव 18 जून को होने हैं। नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस कानूनी रास्ता अपनाने की बात कर रही है। अगर नामांकन बहाल नहीं हुआ तो बीजेपी तीनों सीटें आराम से जीत जाएगी। क्या कांग्रेस इस विवाद को अपने पक्ष में मोड़ पाएगी? या बीजेपी की रणनीति कामयाब हो जाएगी? मध्य प्रदेश की राजनीति फिर एक बार देश का ध्यान खींच रही है।

ECI से आखिर क्यों Meenakshi Natarajan का Nomination रद्द? कांग्रेस-BJP के क्या तर्क? कहां अटका कानूनी पेच?
ECI से आखिर क्यों Meenakshi Natarajan का Nomination रद्द? कांग्रेस-BJP के क्या तर्क? कहां अटका कानूनी पेच?
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+