मोदी का पहला दिन: बैठकों, मुलाकातों और कालेधन पर लिया फैसला

narendra modi
नयी दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शपथ ग्रहण के बाद मंगलवार ने अपना पदभार संभाल लिया है। मोदी ने पीएम की पदवी हासिल करने के साथ ही एक्शन का मूड बना लिया है। मोदी का पहला दिन बैठकों और मुलाकातों में व्यस्त रहा। तमाम व्यस्तताओं के बावजूद मोदी ने अपने दिन ही ईतिहास रच दिया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सार्क के सात सदस्य देशों के प्रमुखों से 'अच्छा और सार्थक' मुलाकात करने से लेकर विदेशों में जमा कालाधन की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की घोषणा की। इसके अलावा मंगलवार को नव गठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक भी हुई।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता ने सुबह 8 बजे साउथ ब्लाक में देश के प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण किया और वहां से शीघ्र ही अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से मिलने हैदराबाद हाउस चले गए। सुबह 9:30 बजे शुरू हुई 30 मिनट की मुलाकात में दोनों पक्षों ने 'समृद्ध और संप्रभु' अफगानिस्तान के निर्माण में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। 10 से 12 बजे दोपहर के बीच मोदी ने शेष पड़ोसी देशों के प्रमुखों के साथ मुलाकात की। ये सभी पड़ोसी मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रण पर आए हुए थे।

मोदी ने जिन हस्तियों से मुलाकात की उनमें मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला अमीन अब्दुल गयूम, श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे, भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोब्गेय, मारिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला शामिल हैं। इन नेताओं के साथ थोड़ी-थोड़ी देर की मुलाकात होती रही और उसके बाद 12:10 बजे मोदी की प्रधानमंत्री शरीफ के साथ मुलाकात शुरू हुई।

करीब 45 मिनट तक चली मुलाकात के दौरान उन्होंने आतंकवाद सहित कई मसलों पर बातचीत की। दोनों पक्षों ने अपने तनाव भरे रिश्ते में नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद जाहिर की। उसके बाद मोदी ने बांग्लादेश की संसद की स्पीकर शिरीन शरमिन से मुलाकात की और सीमा समझौता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पड़ोसी देश के साथ तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर बातचीत करने से भारत पीछे नहीं हट रहा है।

अपनी कूटनीतिक मुलाकातों के बाद मोदी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 3 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर गए और उनसे मुलाकात की। इसके बाद साउथ ब्लॉक में उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की पहली बैठक की अध्यक्षता की। कानून और सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बाद में घोषणा की कि भाजपा नीत सरकार ने विदेशों में जमा काला धन की जांच करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम.बी. शाह की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला लिया है।

प्रसाद ने कहा, "यह संतोष का विषय है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक काला धन लाने के लिए हमने एसआईटी गठित करने का फैसला लिया है।" उन्होंने कहा, "उच्चस्तर के वित्तीय, राजस्व और आर्थिक प्रबंधन एसआईटी के सदस्य बनाए गए हैं। यह देश की नई सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" यद्यपि इस बारे में कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है, लेकिन विभिन्न अनुमानों में कहा गया है कि विदेशों में जमा काला धन 1.4 खरब डॉलर हो सकता है।

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