गुजरात दंगों का दुख, लेकिन कोई अपराध बोध नहीं : मोदी

मोदी ने कहा कि दंगों के वक्त वो अपने पद से इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन उनकी पार्टी ने ऐसा नहीं करने दिया। उन्होंने कहा कि वह दंगों के बाद से 12 साल सार्वजनिक तौर पर 'मोदी आलोचना' का सामना करते रहे, लेकिन उन्होंने निर्णय किया कि 'मीडिया को अपना काम करने दें' और कोई टकराव नहीं करें।
मोदी ने कहा कि मैंने कभी टकराव में अपना समय नहीं गंवाया। ब्रिटेन के लेखक और टीवी प्रोड्यूसर एंडी मैरिनों द्वारा लिखित जीवनी में इस बात का खुलासा किया है। इस किताब के मुताबिक 2002 में गुजरात में हुए दंगों पर मोदी ने अपना रुख रखा। उन्होंने कहा कि जो हुआ मुझे उसका दुख है, लेकिन कोई अपराध बोध नहीं है और कोई अदालत यह स्थापित करने के करीब भी नहीं पहुंची। इस किताब की पेज नबंर 310 में इस बात का खुलासा हुआ है कि मोदी दंगों के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें पद पर बने रहने को कहा।
मोदी ने पणजी बैठक में कहा कि मैं गुजरात के बारे में कुछ कहना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बेबाक चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दंगों के बाद मैं इस्तीफा देना चाहूंगा। मोदी ने लेखक से कहा कि यह मेरे ऊपर निर्भर नहीं था। मैं पार्टी अनुशासन के खिलाफ जाने को तैयार नहीं था। उन्होंने कहा कि मैं अपनी पार्टी से नहीं लड़ना चाहता था। मेरे नेता जो कहें, मुझे उसका पालन करना चाहिए।












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