यूपी में सपा-कांग्रेस के लिये नरेंद्र मोदी की लहर है या कहर

Narendra Modi
लखनऊ। नरेंद्र मोदी जहाँ जाते हैं छा जाते हैं, देश के हर कोने में, समुदाय में सभी वर्गों में मोदी का नाम सबकी ज़ुबां पर चढ़ा हुआ है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि देश की 48 फीसदी आव़ाम मोदी को भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है। आखिर ऐसा क्या है मोदी में कि जनता उन पर इतना विश्वास करती है, क्या कारण है मोदी की इतनी लोकप्रियता का? यह सवाल ज़ाहिर तौर पर एक विश्लेषणात्म्क मुददा बन कर मन में उभरता है। यदि गहराई से इस विषय पर विचार किया जाए कई ऐसे कारक नज़र आते हैं, जो मोदी की इस व्यापक जनप्रसिद्धि का कारण बनते हैं।

देखा जाए तो मोदी को छोड़ कर लोकसभा चुनाव के लगभग सभी दिग्गज उम्मीदवार उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए हैं, चाहे वो राहुल गांधी हों, मायावती हों या मुलायम सिंह यादव। यूपी की जनता अपने इन जन प्रतिनिधियों से कितनी खुश और संतुष्ट है, यह सब जानते हैं। ऐसे में मोदी एक बहतर विकल्प बन कर जनता के समक्ष उपस्थित हैं।

वो मोदी ही हैं, जिनके कारण आज गुजरात देश के सबसे अधिक विकसित राज्यों में सम्मिलित है। परिवहन, सड़क, शिक्षा, समाज, रोजगार, स्वास्थ्य, सभी -दृष्टियों से गुजरात उन्नत है। यह मोदी की मेहनत का ही परिणाम है, कि जनता ने तीसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री के पद पर प्रतिष्ठित किया। यह गुजरात की उन्नत स्तिथियों का ही परिणाम है कि रतन टाटा जैसे उधोगपति ने रातोंरात अपना नैनो प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल से गुजरात में स्थानान्तरित कर दिया। आज बड़े-बड़े उधोगपति गुजरात में निवेश करने के लिए उत्साहित हैं। कहा जाए तो आज मोदी के कारण ही गुजरात देश के अन्य राज्यो़ं के समक्ष विकास का एक आदर्श बन कर प्रकट हुआ है। ऐसे में जनता का मोदी को अपने भावी नायक के रूप में देखना स्वाभाविक ही लगता है।

विकास की भूख से तड़प रहा उत्तर प्रदेश

यदि इसी -दृष्टि से यूपी के विकास की स्थितियों पर गौर किया जाए तो परिवहन से लेकर सड़क तक, बिजली-पानी से लेकर रोजगार तक और कानुन व्यवस्था से लेकर सरकार तक हर जगह व्यवस्थाहीनता देखी जा सकती है। नौबत यहां तक आ गई है कि यूपी के उधोग भी पड़ोसी राज्य उत्तराखण्ड में स्थानान्तरित होने लगे हैं। यहाँ यदि सरकार कोई योजना लागू भी करती है, तो अल्पसंख्यक समुदायों की लाभ की दृष्टि से क्योंकि यह अल्प संख्यक समुदाय ही यूपी सरकार वोट बैंक राजनीति का मुख्य आधार हैं। ऐसी परिस्थितियों में जनता के मन में असंतोष की भावना आना स्वाभाविक है। अब जनता बदलाव चाहती है। विकास की भूख से तड़प रही है। इन स्थितियों में मोदी जनता के लिए एक आशा की किरण हैं।

वर्तमान परिस्थितियों को देखा जाए तो बहुत लम्बे अरसे बाद जनता किसी राजनेता को सुनने में उत्तसाहित दिखाई देती है। इसका कारण है नरेंद्र मोदी के भाषण में झलकता आत्मविश्वास। आज जनता ज्यादा से ज्यादा मोदी को सुनना चाहती है, क्योंकि कहीं न कहीं उनके भाषण में देश के प्रभुत्वशाली भावी प्रधानमंत्री की छवि दिखाई देती है। जनता के प्रति कर्तव्यबोध, अपनापन दिखाई देता है। उनके शब्दों से जनता में एक जोश जागृत होता है, एक विश्वास का संचार होता है। शायद यहीं कारण है मोदी की रैली की सफलता का। 2 मार्च को लखनऊ में भी मोदी की रैली होने वाली है और 15 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मोदी लोकसभा चुनाव जीत पाएगें या नहीं यह कहना तो संभव नहीं है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकते हैं कि मोदी की वजह से काग्रेंस और समाजवादी आदि पार्टियों ने अपनी नसें टटोलनी जरूर शुरु कर दी हैं। अब देखना यह है कि यूपी में मोदी की लहर सपा और कांग्रेस के लिये लहर है या कहर!

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