राज्यसभा में गालिब के नाम पर मोदी ने सुनाया ना जाने किसका शेर, जावेद अख्तर ने कही ये बात

राज्यसभा में गालिब के नाम पर मोदी ने सुनाया ना जाने किसका शेर, हुए ट्रोल मोदी ने राज्यसभा में गालिब का बताकर पढ़ा 'फेसबुकिया' शेर, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल

नई दिल्ली। बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। इस दौरान मोदी एक गालिब के नाम पर एक ऐसा शेर भी सुना गए जो कभी गालिब ने नहीं कहा था। बल्कि किसने कहा ये पता ही नहीं है। क्योंकि ये सोशल मीडिया पर चलने वाली शायरी से आया है। शेर को लेकर सोशल मीडिया पर मजाक भी उड़ रहा है।

 गालिब के नाम पर शेर कह सोशल मीडिया पर फंसे मोदी

गालिब के नाम पर शेर कह सोशल मीडिया पर फंसे मोदी

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के भाषण पर मोदी ने कहा कि शायद इसीलिए गालिब ने कहा है, ताउम्र ग़ालिब ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी आईना साफ करता रहा। प्रधानमंत्री के शेर सुनाने के बाद सोशल मीडिया पर इस पर चर्चा शुरू हुई तो लोगों ने पूछा कि आखिर ये शेर गालिब ने कब लिखा। मशहूर शायर जावेद अख्तर ने ट्वीट कर कहा कि जो शेर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनाया है, वह गालिब का है ही नहीं। वह सोशल मीडिया में गलत तरीके से फैलाया गया है। उन्होंने लिखा कि शेर के दोनों मिसरे भी शायरी के लिहाज से ठीक नहीं हैं।

'बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूंचे से हम निकले'

जावेद अख्तर ही नहीं और भी कई भाषा के जानकारों ने मोदी की इस गलती को पकड़ लिया और कहा कि वो गालिब को इस शेर के साथ ना घसीटें। रेडियो जॉकी सायमा ने ट्विटर पर सवाल उठाया कि क्या मोदी के भाषण के लिए कोई रिसर्च नहीं हो रही है? उन्होंने तंजिया लहजे में लिखा कि गालिब ने लिखा है- बड़े बे-आबरू बोकर तेरे कूंचे से हम निकले।

राज्यसभा में चर्चा के दौरान पढ़ा नरेंद्र मोदी

राज्यसभा में चर्चा के दौरान पढ़ा नरेंद्र मोदी

राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कहा, सबका साथ और सबका विकास' इस मंत्र को लेकर के हम चले थे। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास यह अमृत 5 साल के हमारे कार्यकलाप से देश की जनता ने अमृतरूपी ने जोड़ा है, लेकिन आजाद साहब को धुंधला नजर आ रहा है। मुझे लगता है, आज़ाद साहब को धुंधला दिखाई देता है, शायद वह राजनैतिक चश्मे से सब कुछ देखते हैं। गालिब ने ऐसी शख्सियतों के लिए कहा था, 'ताउम्र ग़ालिब ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पे थी, आईना साफ करता रहा।

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