Premanand Maharaj ने सपने में क्या कहा? रातों-रात साध्वी बन गई एकता कपूर की ये टॉप एक्ट्रेस! त्याग दी लग्जरी
Who is Anna Jaisinghani: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की चमक-दमक, नाम और पहचान के बाद इस लाइफस्टाइल से दूरी बनाना हर किसी के लिए आसान बात नहीं है। लेकिन कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर आ जाती है, जहां इंसान सुकून की तलाश करने लगता है। कुछ ऐसा ही एकता कपूर के शो से नेम-फेम पाने वाली एक्ट्रेस अन्ना जयसिंघानी के साथ हुआ है।
दरअसल, अन्ना ने एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कहकर अब भक्ति मार्ग अपना लिया है। उन्होंने सिर्फ अपना करियर ही नहीं छोड़ा, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी बदल दी है और अब वह ग्लैमर की दुनिया से कोसों दूर सादगी भरी लाइफ जीने निकल पड़ी हैं।

बचपन से ही क्रिएटिव चीजों के लिए जुनूनी रहीं अन्ना
अन्ना जयसिंघानी के करियर की शुरुआत बेहद शानदार रही थी। बचपन से ही डांस और क्रिएटिव चीजों के लिए जुनूनी अन्ना अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंची थीं। साल 2011 में उन्होंने एक फ्रीलांस कोरियोग्राफर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और उन्हें एक्टिंग की बारीकियां सीखने का मौका मिला एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस 'बालाजी टेलीफिल्म्स' में।
TV जगत का एक जाना-माना चेहरा
अन्ना को असल पहचान 'देखा एक ख्वाब' जैसे धारावाहिकों से मिली। इसके अलावा उन्होंने 'सावधान इंडिया' और 'क्राइम पेट्रोल' जैसे मशहूर क्राइम शो में भी काम किया, जिससे वह टीवी जगत का एक जाना-माना चेहरा बन गईं।
अन्ना जयसिंघानी को कब चढ़ा भक्ति रंग?
मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अन्ना के कुछ ऐसे दोस्त बने जो नियमित रूप से इस्कॉन मंदिर जाते थे। अन्ना भी उनके साथ मंदिर जाने लगीं और यहीं से उनकी दिलचस्पी धीरे-धीरे भक्ति की ओर बढ़ने लगी। भक्ति का रंग उन पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने अपनी पूरी लाइफस्टाइल ही बदल डाली।
एक्ट्रेस ने पूरी तरह से सात्विक जीवन अपनाते हुए लहसुन-प्याज, शराब और मांसाहार का सेवन बंद कर दिया। वह अक्सर कुंज बिहारी से प्रार्थना करती थीं कि वे उन्हें वृंदावन बुला लें। यह बदलाव उनकी सोच पर इस कदर हावी हुआ कि उन्हें शोबिज की दुनिया में मिलने वाला सुख अब अस्थायी लगने लगा था।
सपने में आए प्रेमानंद महाराज और त्याग दिया सबकुछ
अन्ना के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें एक रात बेहद खास सपना आया। अन्ना ने यूट्यूब चैनल MERO VRINDAVAN पर बताया कि सपने में उन्हें विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन हुए, जिन्होंने उन्हें 'नाम जप' करने का आदेश दिया। बस उस एक रात के बाद अन्ना के लिए सबकुछ बदल गया। उन्होंने तुरंत अभिनय करियर और मुंबई की लग्जरी लाइफ छोड़कर वृंदावन जाने की ठान ली।
आज अन्ना पूरी तरह से एक साध्वी का जीवन जी रही हैं और अपना पूरा समय कृष्ण भक्ति में लगा रही हैं। उनका मानना है कि उन्हें असली सुकून और शांति अब भक्ति में मिल रही है, जो उन्हें लाइमलाइट की दुनिया में कभी महसूस नहीं हुई।
एक्ट्रेस अन्ना जयसिंघानी का पूरा इंटरव्यू यहां देखें
कौन हैं प्रेमानंद महाराज? घर क्यों छोड़ा?
दरअसल, प्रेमानंद महाराज का जन्म 1969 में कानपुर (उत्तर प्रदेश) के अखारी गांव में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडेय था और वो एक ब्राह्मण परिवार से आते हैं। बचपन से ही उनका मन दुनियादारी से हटकर भक्ति में लगता था। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार और सांसारिक जीवन का त्याग करने का फैसला लिया। यह फैसला उनके परिवार के लिए चौंकाने वाला था।
इस फैसले के पीछे की वजह उनका आध्यात्म की तरफ गहरा झुकाव था। पांचवीं कक्षा से ही उन्होंने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करना शुरू कर दिया था। जीवन के इस मोड़ पर उन्होंने अपने माता-पिता और भाई से दूर होकर एक नया सफर शुरू किया।
बीमारी से जंग: जब दोनों किडनियां हो गईं फेल
प्रेमानंद महाराज की जिंदगी आसान नहीं रही। जब वो 35 साल के थे, तो उन्हें अचानक पेट में तेज दर्द हुआ। जांच में पता चला कि उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं। यह एक बहुत ही गंभीर बीमारी थी, लेकिन उन्होंने इसे कभी भी अपनी भक्ति के रास्ते में नहीं आने दिया।
आज भी, वो हर हफ्ते तीन बार डायलिसिस करवाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है। वे बिना किसी शिकायत के अपने प्रवचन देते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। उनकी यही दृढ़ता और साधना लोगों को और भी ज्यादा प्रेरित करती है।
आखिर क्यों दूर-दूर से लोग आते हैं उनके पास?
प्रेमानंद महाराज की सबसे बड़ी खासियत उनकी वाणी की सरलता है। वो बेहद सरल भाषा में जीवन की बड़ी से बड़ी बातों को समझाते हैं। उनकी बातें सीधे दिल को छूती हैं, यही वजह है कि उनकी ख्याति सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैल चुकी है।
उनके आश्रम में न केवल आम लोग, बल्कि देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, स्टार क्रिकेटर विराट कोहली जैसी अन्य हस्तियां भी मार्गदर्शन लेने आ चुकी हैं और विराट कोहली तो आज भी समय-समय पर आते रहते हैं। उनकी इस लोकप्रियता का कारण उनका जाति और धर्म से ऊपर उठकर हर व्यक्ति को सहजता से स्वीकार करना है। प्रेमानंद महाराज सही मायनों में एक सच्चे मार्गदर्शक हैं, जिनका जीवन ही उनका सबसे बड़ा संदेश है।














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