Bengal Repolling: बंगाल में बड़ा बवाल! स्ट्रॉन्ग रूम में BJP लोगो वाली कार की एंट्री पर TMC का हंगामा

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक माहौल फिर से गरमा गया है। मतगणना शुरू होने से एक दिन पहले कोलकाता में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोगो लगी एक सफेद कार को बिना जांच के स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में जाने दिया गया। यही स्ट्रॉन्ग रूम वह जगह होती है जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (EVM) सुरक्षित रखी जाती हैं।

घटना को लेकर TMC समर्थकों ने कड़ा विरोध जताया और सवाल उठाया कि जब सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त होती है, तब किसी वाहन को बिना जांच के अंदर कैसे जाने दिया गया। इस पूरे मामले ने मतगणना से पहले चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।

Bengal Repolling Magrahat Diamond Harbour

कोलकाता में क्या हुआ?

यह विवाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर विधानसभा सीट के मतगणना केंद्र के बाहर सामने आया। आरोप है कि दो वाहन, जिन पर BJP का झंडा और पहचान चिन्ह लगे थे, उस परिसर में दाखिल हुए जहां EVM मशीनें रखी गई हैं।

TMC कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक सफेद रंग की कार पर सामने BJP का लोगो लगा था और पीछे 'Army' लिखा हुआ था। दावा किया गया कि पुलिस ने वाहन की जांच नहीं की और उसे सीधे अंदर जाने दिया।

स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब आम लोगों की एंट्री सीमित होती है और सुरक्षा के कई स्तर होते हैं, तब ऐसी एंट्री कैसे संभव हुई। इस मुद्दे को लेकर मतगणना केंद्र के बाहर काफी देर तक हंगामा और नारेबाजी हुई।

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TMC का आरोप क्या है?

TMC कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक वाहन का मामला नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि वाहन के अंदर कौन लोग थे, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि यदि जांच की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो यह सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा सकती है।

इससे पहले भी TMC प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी मतगणना केंद्र के बाहर धरना दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास अनधिकृत लोगों की मौजूदगी देखी गई थी। यह धरना कई घंटों तक चला और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की गई।

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मतगणना से पहले क्यों बढ़ी संवेदनशीलता?

पश्चिम बंगाल में मतगणना 4 मई की सुबह 8 बजे से शुरू होनी है। सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होगी और उसके बाद EVM मशीनों के वोट गिने जाएंगे। राज्य के 77 मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

चूंकि पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है, इसलिए राजनीतिक दलों की नजर हर छोटी गतिविधि पर है। रिकॉर्ड मतदान और कई सीटों पर करीबी मुकाबले के कारण परिणाम को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।

TMC सत्ता बचाने की कोशिश में है, जबकि BJP पहली बार राज्य में बड़ी जीत दर्ज करने का दावा कर रही है। CPI(M) और कांग्रेस भी लंबे समय बाद अपनी राजनीतिक वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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फालता सीट पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने एक और बड़ा फैसला लिया। आयोग ने फालता विधानसभा सीट पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया है। 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान यहां कई पोलिंग स्टेशनों पर हिंसा, गड़बड़ी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा की शिकायतें मिली थीं।

चुनाव आयोग ने कहा कि बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर गंभीर चुनावी उल्लंघन और प्रक्रिया प्रभावित होने के कारण सभी 285 बूथों पर 21 मई को फिर से वोटिंग कराई जाएगी। इस सीट का परिणाम 24 मई को घोषित होगा।

फालता सीट पर एक बूथ में EVM मशीन के BJP बटन के आगे टेप मिलने की घटना भी चर्चा में रही। इसी वजह से राजनीतिक दलों ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।

री-पोलिंग वाले इलाकों में कैसी रही वोटिंग?

इससे पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल के मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों के कुल 15 बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया। इनमें मगराहाट पश्चिम के 11 बूथ और डायमंड हार्बर के 4 बूथ शामिल थे।

रिपोर्ट के मुताबिक इन बूथों पर करीब 90 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दौरान कुछ जगहों पर राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। दक्षिण 24 परगना जिले में TMC और BJP समर्थकों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं। बाद में सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।

कुछ मतदाताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मतदान के दौरान धमकाने या रोकने की कोशिश हुई। हालांकि प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा बल तैनात थे और मतदान शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराया गया।

BJP का दावा और राजनीतिक बयानबाजी

चुनाव नतीजों से पहले BJP नेताओं ने भी जीत को लेकर भरोसा जताया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में BJP का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहने वाला है।

उन्होंने कहा कि पार्टी को विभिन्न राज्यों में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और परिणाम उम्मीद से बेहतर हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल के अलावा असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी चुनाव हुए हैं।

दूसरी तरफ TMC सांसद सौगत रॉय ने फालता सीट पर दोबारा मतदान कराने के फैसले पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र को अलग करके री-पोलिंग कराने का आधार पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग के फैसले का पालन करेगी और मतदान में हिस्सा लेगी।

मतगणना से पहले क्यों बढ़ी चिंता?

स्ट्रॉन्ग रूम किसी भी चुनाव प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। मतदान के बाद EVM मशीनों को इन्हीं कमरों में सील करके रखा जाता है। राजनीतिक दलों के एजेंट और सुरक्षा बल लगातार इनकी निगरानी करते हैं।

ऐसे में किसी वाहन या अनधिकृत व्यक्ति की एंट्री को लेकर विवाद होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक तनाव बढ़ा देता है। चुनाव आयोग आमतौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास बहुस्तरीय सुरक्षा रखता है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, पुलिस तैनाती और प्रतिबंधित प्रवेश शामिल होता है।

अब सबकी नजर 4 मई पर

अब पूरा पश्चिम बंगाल 4 मई के नतीजों का इंतजार कर रहा है। एक तरफ TMC लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर BJP राज्य में ऐतिहासिक जीत का दावा कर रही है।

मतगणना से पहले स्ट्रॉन्ग रूम विवाद ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक जांच में यह साबित नहीं हुआ है कि वाहन की एंट्री नियमों के खिलाफ थी या नहीं। लेकिन राजनीतिक दलों के आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल का चुनाव सिर्फ वोटों की लड़ाई नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता की परीक्षा भी बन गया है।

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