नरेंद्र मोदी और जयललिता के बीच जुबानी जंग, बीजेपी की मुसीबत

चेन्‍नर्इ। तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता और गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी, जहां मोदी इन चुनावों में बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार हैं तो वहीं जयललिता के समर्थक उन्‍हें अगले कुछ वर्षों में देश का प्रधानमंत्री करार देते रहते हैं।

जयललिता लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी के लिए भी काफी अहम हो सकती हैं क्‍योंकि अगर पार्टी बहुमत हासिल करने में असफल रही हो फिर जयललिता ही मोदी और पार्टी के लिए संकटमोचक साबित होंगी।

रविवार को हुई रैलियों के दौरान साफ नजर आया कि शायद जयललिता ने मूड बना लिया है कि वह चुनावों के बाद बीजेपी को समर्थन नहीं देंगी। रविवार को रैलियों के दौरान न सिर्फ मोदी बल्कि जयललिता ने भी बीजेपी और मोदी पर जमकर निशाना साधा।

साफ है कि बदलते चुनावी माहौल में मोदी और जयललिता के बीच जो रिश्‍ते थे वह भी बदल गए हैं। कौन भूला सकता है कि कभी नरेंद्र मोदी खुद जयललिता की तारीफ और उनके किए गए कामों की वकालत करते थे।

क्‍या कहा जयललिता ने
तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जयललिता अभी तक सार्वजनिक मंच पर बीजेपी और मोदी की आलोचना से बचती आई थीं लेकिन रविवार को करुर में हुई उनकी रैली ने उनकी बीजेपी को निशाना न बनाने की कसम को तोड़ दिया।

जयललिता ने इस रैली में बीजेपी पर धोखाधड़ी का आरोप तो लगाया ही साथ में यह भी कहा कि जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पानी के बंटवारे की बात आती है तो बीजेपी और कांग्रेस में कोई अंतर नहीं है। जयललिता ने कहा, 'लोकसभा चुनावों में सीटों के आंकड़े पर नजरें लगाने के बाद भी बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में इस मुद्दे का कोई जिक्र ही नहीं किया है।'

इसके साथ ही जयललिता ने लोगों से अपील की कि वह डीएमके, कांग्रेस और बीजेपी के उम्‍मीदवारों की जीत सुनिश्चित न होने की अपील भी की।

क्‍या कहा मोदी ने
वहीं मोदी भी रविवार को तमिलनाडु में थे और उन्‍होंने इस दौरान जयललिता पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ा। तमिलनाडु में छह पार्टियों के साथ गठबंधन के बाद मोदी की राज्‍य में पहली रैली थी। बीजेपी ने कहा कि न तो अन्‍नाद्रमुक की मुखिया और न ही उनके विरोधी डीएमको को राज्‍य के लोगों के कल्‍याण की कोई चिंता है। मोदी के मुताबिक दोनों पार्टियां सिर्फ एक दूसरे की आलोचना करने में ही अपना ध्‍यान लगाती हैं।

इसके अलावा मोदी ने इस दौरान श्रीलंका की नेवी की ओर से तमिलनाडु के मछुआरों पर होने वाले हमलों का मुद्दा भी उठाया। मोदी ने कहा कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो फिर वह उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाएंगे।

जयललिता हो सकती हैं बड़ा फैक्‍टर
मोदी भले ही जयललिता पर निशाना साधे लेकिन उन्‍हें यह नहीं भूलना चाहिए कि एग्जिट पोल्‍स के नतीजे साफ दिखा रहे हैं कि तमिलनाडु में जयललिता की पार्टी को चुनावों के दौरान 39 सीटें यानी सबसे ज्‍यादा सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में केंद्र में बनने वाली सरकार पर जयललिता सीधा असर डाल सकती हैं और अगर केंद्र में त्रिशंकु संसद की संभावना बनी तो फिर जयललिता का समर्थन पार्टियों के लिए जड़ी-बूटी से कम नहीं होगा।

कभी बताया था अच्‍छा दोस्‍त
जयललिता ने नरेंद्र मोदी को अपना दोस्‍त बताया था। सिर्फ इतना ही जिस समय मोदी ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री के तौर पर वर्ष 2012 में तीसरी बार शपथ ली तो जयललिता बतौर मेहमान कार्यक्रम में मौजूद थीं। भले ही बीजेपी एग्जिट पोल्‍स में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभरे लेकिन बीजेपी और एनडीए गठबंधन के लिए बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों का आंकड़ा मुश्किल लग रहा है।

ऐसे में मोदी और जयललिता के बीच जारी जुबानी जंग से जयललिता को तो नुकसान नहीं होगा लेकिन बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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