मोदी के मंत्रिमण्डल में नहीं बजी वंशवाद की वंशी

नए मंत्रीमंडल में वंशवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है। जहां यूपीए सरकार के दौरान वंशवाद की खासी झलक देखने को मिल रही थी। कई सांसदों को पारिवारिक विरासत के चलते मंत्रीमंडल में शामिल किया गया। इनमें दीपेंद्र हुड्डा, सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद जैसे नाम शामिल हैं। जिन्हें मनमोहन सरकार में कई अहम पद दिए गए।
इन सबसे अलग मोदी सरकार में इस बात का खास ख्याल रखा गया है। नई सरकार में 'शहजादे' मंत्रियों को खास प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। ऐसा नहीं की बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों में ऐसे सांसदों कमी रही हो। करीब दर्जनभर सांसद ऐसे हैं, जो राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन मोदी की कैबिनेट में अभी केवल दो ऐसे मंत्री हैं जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है।
इनमें से अकाली दल की हरिसिमरत कौर और पीयूष गोयल को सरकार में जगह मिल पाई है। इसमें भी पीयूष गोयल पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे हैं और पूर्व शिपिंग मंत्री वेदप्रकाश गोयल के बेटे हैं। यहां ये जानना भी जरूरी है कि पीयूष को मंत्रीमंडल में शामिल करने की घटना को वंशवाद से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पीयूष पिछले 27 साल से पार्टी-संगठन में काम कर रहे हैं। दूसरी ओर अकाली दल की हरसिमरत कौर पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हैं।
कई बड़े नामों को मौका नहीं-
इनके अलावा भी बीजेपी समेत एनडीए में कई ऐसे बड़े नाम हैं जिन्हें नई सरकार में प्रतिनिधित्व का इंतजार था। इनमें पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह का नाम सबसे अव्वल है।
इसके साथ ही राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह भी हैं, जो झालवाड़-बारां लोकसभा सीट से जीत कर आए हैं। इसके अलावा राजस्थान में बीजेपी ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए राज्य की सभी 25 सीटों पर कब्जा किया है।
इसके बाद भी मोदी मंत्रीमंडल में राजस्थान से निहालचंद मेघवाल को ही जगह दी गई है। उन्हें राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। कुल मिलाकर मोदी के मंत्रमंडल गठन में बेहद सतर्कता बरती गई है व सभी का चयन संयम के साथ किया गया है, जिससे 'अच्छे दिन' लाने में नरेंद्र मोदी को रुकावट ना आए।












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