संसद के सेंट्रल हाल में ही सौंपी गई थी नेहरु को देश की सत्ता
नई दिल्ली। मंगलवार को देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही संसद भवन के सेंट्रल हॉल का खूब जिक्र हो रहा था। संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बीजेपी के नए संसदीय दल की एक मुलाकात हुई और इसमें नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे।
बीजेपी के संसदीय दल ने भारतीय संसद के इस एतिहासिक सेंट्रल हॉल में नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना। नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस हॉल में कदम रखा और पहली बार ही उन्होंने भारतीय संसद को करीब से देखा।
इससे पहले मोदी जब बैठक में पहुंचे तो उन्होंने संसद के सेंट्रल हॉल के मुख्य द्वार पर मत्था टेका। अंदर आने पर मंच से राजनाथ सिंह ने भी इस बात की जानकारी दी कि मोदी पहली बार सेंट्रल हॉल में आए हैं।
सेंट्रल हॉल भारतीय संविधान के मंदिर भारतीय संसद का एक अहम हिस्सा है। इसकी अपनी कुछ खासियतें हैं और इसकी कुछ खासियतों का जिक्र बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी अपने शुरुआती संबोधन में किया।
भारतीय संसद का सेंट्रल हॉल ही वह जगह है जहां पर सन 1947 में अंग्रेजों ने पंडित जवाहर लाल नेहरु को सत्ता हस्तांतरति की थी। आगे की स्लाइड्स के जरिए भारतीय संसद के इस खास सेंट्रल हॉल से जुड़ी ऐसी ही कुछ खासियतों पर डालिए एक नजर।

यहां हस्तानंतरित हुई थी नेहरु को सत्ता
संसद के सेंट्रल हॉल में ही सन् 1947 में अंग्रेजों ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को सत्ता का हस्तांतरण किया था। इसके साथ ही देश को अंग्रेजों के शासन से आजादी मिली थी।

9 दिसंबर 1946 को शुरू हुआ संविधान बनाने का काम
देश की संविधान सभा पहली बार नौ दिसंबर 1946 को सेंट्रल हॉल में पहली बार मिली और इसके साथ ही यहां पर संविधान के लिखे जाने का काम शुरू हुआ। नौ दिसंबर 1946 से लेकर 26 नवंबर 1949 तक यहीं पर संविधान लिखा गया।

कभी लाइब्रेरी के तौर पर होता था प्रयोग
सन् 1946 तक संसद के सेंट्रल हॉल का प्रयोग लाइब्रेरी के तौर पर होता था। 1946 तक इस हॉल को केंद्रीय संसदीय सभा और कॉउंसिल ऑफ स्टेट्स की लाइब्रेरी के तौर पर प्रयोग किया जाता था। इसके बाद इसे फिर से सजाया गया और इसे संसदीय हॉल का रूप दिया गया।

यहीं मिलते हैं राज्यसभा और लोकसभा सांसद
वर्तमान में संसद का यह सेंट्रल हॉल वह जगह है जहां पर राज्यसभा और लोकसभा के सांसद आपस में मिलते हैं और आपस में अपने विचार साझा करते हैं।

दोनों सदनों को राष्ट्रपति का संबोधन
हर लोकसभा चुनावों के बाद होने वाले पहले सत्र के दौरान इसी हॉल में सांसद इकट्ठा सांसदों को राष्ट्रपति संबोधित करते हैं।

सांसद आपस में मिलकर करते हैं बहस
जिस समय संसद का सत्र चल रहा होता है उस समय संसद के सेंट्रल हॉल में ही सांसद इकट्ठा होते हैं और किसी मुद्दे पर खूब चर्चा करते हैं।

यहां पर सेलिब्रेट होता है सांसदों का बर्थडे
सेंट्रल हॉल में कई विशेष मौकों को आयोजित किया जाता है। इसके अलावा कई देशों के प्रमुख जैसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जब भारत के दौरे पर आते हैं, तो इसी हॉल में उनका सम्मान किया जाता है। इसके अलावा जब सांसदों का बर्थडे होता है तो इसी सेंट्रल हॉल में उसका भी आयोजन किया जाता है।

ताकि हर भाषा में सुनाई दे संदेश
सेंट्रल हॉल संसद का एक ऐसा हॉल जो पूरी तरह से सिम्यूलेंटेनियस इंटरप्रिटेशन सिस्टम से लैस है। इस सिस्टम की बदौलत अलग भाषा के लोग सेंट्रल हॉल में होने वाले संबोधन को अपनी भाषा में सुन सकते हैं।

कई एतिहासिक पलों का गवाह
सेंट्रल हॉल का लॉन भी अपने आप में कई मायनों में खास है। सेंट्रल हॉल यह हरा-भरा लॉन में कई एतिहासिक मौकों का गवाह बना है। कई सुंदर पेड़ पौंधों और कई तरहों के सजावटी झरनों के साथ सेंट्रल हॉल का लॉन भी यहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।












Click it and Unblock the Notifications