तस्वीरों में देखें: बेबुनियाद आरोपों को दरकिनार कर आगे बढ़ते रहे नरेन्द्र मोदी
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। अवरोधों को पार करना तो कोई नरेन्द्र मोदी से सीखे। उनके ऊपर तमाम बेबुनियाद लगते रहे पर वे लगातार आगे बढ़ते रहे। वे रूके नहीं, थके नहीं। और उन्होंने रच दिया नया इतिहास। 16 वीं लोकसभा चुनाव की कैंपेन के दौरान उनके सामने उनके विरोधी बौने और कमजोर साबित हुए। अपने ओजस्वी भाषणों और जनता से सीधा संवाद करने की क्षमता के चलते वे देश के बेहद लोकप्रिय नेता के रूप में उभरे। उत्तर गुजरात के महेसाणा जिले में स्थित एक छोटे से गांव वडनगर में सितंबर, 1950 को जन्मे श्री नरेन्द्र मोदी का लालन-पालन एक ऐसे माहौल में हुआ, जिनसे उन पर उदारता, परोपकार और सामाजिक सेवा जैसे मूल्यों का प्रभाव पड़ा।
साठ के दशक के मध्य में भारत-पाक युद्ध के दौरान, कम उम्र होने के बावजूद, उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर आवागमन के दरमियान सैनिकों की स्वैच्छिक सेवा की थी। 1967 में उन्होंने गुजरात के बाढ़ पीड़ितों की सेवा की थी। उत्कृष्ट संगठनात्मक सामर्थ्य और मनोविज्ञान की गहरी समझ होने की वजह से उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में अपनी सेवाएं प्रदान की थीं और गुजरात के अलग-अलग सामाजिक-राजनैतिक आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। आईए तस्वीरों के माध्यम से देखते हैं नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक सफर:

बेबुनियाद आरोपों को दरकिनार कर आगे बढ़ते रहे नरेन्द्र मोदी
किशोरावस्था के दिनों से ही उन्हें अनेक मुश्किलों और तकलीफों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अपने सशक्त व्यक्तित्व और साहस की बदौलत उन्होंने प्रत्येक चुनौतियों को अवसर में तब्दील कर दिखाया। विशेषकर, जब उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, तब उनकी राह कठिन संघर्ष और पीड़ादायी परिश्रम से भरी पड़ी थी। लेकिन जीवन संग्राम में वे हमेशा एक योद्धा, एक सच्चे सैनिक की भांति रहे। एक बार कदम बढ़ाने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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हार मानना या पराजित होना उन्होंने कभी स्वीकार नहीं किया। अपने इसी दृढ़निश्चय की वजह से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी की। भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करने वाले संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (आरएसएस) से उन्होंने शुरुआत की और निःस्वार्थता, सामाजिक जवाबदारी, समर्पण एवं राष्ट्रवाद की भावना को आत्मसात किया। आरएसएस में अपने कार्यकाल के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी ने 1974 के भ्रष्टाचार विरोधी नवनिर्माण आंदोलन और 19 महीने (जून 1975 से जनवरी 1977) की दीर्घावधि तक रहे भयंकर ‘आपातकाल', जब भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों का गला घोंट दिया गया था, जैसी विभिन्न घटनाओं के वक्त अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई।

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इस पूरे समयकाल के दौरान भूमिगत रहते हुए मोदी जी ने गुप्त तरीके से केन्द्र सरकार की फासीवादी नीतियों के खिलाफ जोशीले अंदाज में जंग छेड़ते हुए लोकतंत्र की भावना को जीवित रखा। 1987 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होकर उन्होंने राजनीति की मुख्य धारा में प्रवेश किया। एक वर्ष के भीतर ही उन्हें पार्टी की गुजरात इकाई का महामंत्री नियुक्त किया गया। तब तक उन्होंने एक अत्यंत कुशल संगठक के रूप में ख्याति अर्जित कर ली थी।

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उन्होंने सच्चे अर्थों में पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के चुनौतीपूर्ण कार्य का बीड़ा उठाया, जिसकी वजह से पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलना शुरू हो गया और अप्रैल, 1990 में केन्द्र में गठबंधन सरकार अस्तित्व में आई। यह राजनीतिक गठबंधन कुछ महीनों के अंतराल के बाद टूट गया, लेकिन 1995 में भाजपा अपने दम पर गुजरात में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता हासिल करने में सफल रही। तब से गुजरात में सत्ता की बागडोर भाजपा के हाथों में है।

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1988 से 1995 के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी की पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में स्थापित हुई, जिन्होंने गुजरात भाजपा को राज्य में सत्ताधारी पार्टी बनाने के लिए जमीनी कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था। इस दौरान, श्री मोदी को दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक, श्री लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक की लंबी रथयात्रा और दूसरी, देश के दक्षिणी छोर पर स्थित कन्याकुमारी से उत्तर में कश्मीर तक की यात्रा। 1998 में नई दिल्ली की सत्ता में भाजपा के उदय का श्रेय इन्हीं दो अत्यंत सफल घटनाओं को जाता है, जिसमें श्री मोदी की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।

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1995 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया और देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेवारी सौंपी गई, जो किसी भी युवा नेता के लिए बड़ी उपलब्धि की बात थी। 1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) के पद पर पदोन्नत किया गया। अक्टूबर, 2001 में भारत के सबसे समृद्ध और प्रगतिशील राज्यों में से एक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने तक वे अपनी सेवाएं महासचिव के तौर पर पार्टी को देते रहे। राष्ट्रीय स्तर पर उनके कार्यकाल के दौरान श्री नरेन्द्र मोदी को जम्मू एवं कश्मीर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य के अलावा उतने ही संवदनशील उत्तर-पूर्वी राज्यों सहित अन्य कई राज्यों में पार्टी की प्रदेश इकाईयों के मामलों को देखने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के दौरान श्री मोदी पार्टी के एक महत्वपूर्ण प्रवक्ता के तौर पर उभर कर सामने आए तथा कई महत्वपूर्ण घटनाओं के समय उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

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इस दौरान उन्होंने दुनियाभर के देशों में यात्राएं की और अनेक प्रतिष्ठित नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। इन अनुभवों से न सिर्फ उनके वैश्विक दृष्टिकोण का विकास हुआ, बल्कि भारत की सेवा करने तथा दुनिया में उसका सामाजिक-आर्थिक वर्चस्व स्थापित करने का जज्बा भी तीव्र बना। अक्टूबर, 2001 में पार्टी ने उन्हें गुजरात सरकार की कमान संभालने को कहा। 7 अक्टूबर, 2001 को जब श्री मोदी ने शपथ ग्रहण की, तब गुजरात जनवरी, 2001 में आए विनाशक भूकंप सहित अन्य कई प्राकृतिक आपदाओं के विपरीत प्रभावों से गुजर रहा था।

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हालांकि, कुशल रणनीतिकार श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का लाभ उठाते हुए से इन समस्याओं का पूरे जोश के साथ सामना करने का निश्चय किया। भूकंप प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास की कार्रवाई की बड़ी चुनौती उनके सामने थी। भुज मलबों का शहर बन गया था और हजारों लोग कामचलाउ आश्रयस्थानों में बिना किसी मूलभूत सुविधाओं के रह रहे थे। श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रतिकूल परिस्थितयों को किस तरह सर्वांगी विकास के अवसरों में तब्दील कर दिया, भुज शहर उसका जीता-जागता सबूत है।

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जब पुनर्निर्माण एवं पुनर्वास की कार्रवाई चल रही थी, तब भी श्री मोदी ने विशाल परिप्रेक्ष्य में मंथन का अभिगम छोड़ा न था। गुजरात ने हमेशा ही औद्योगिक विकास पर ध्यान केन्द्रीत किया। श्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वांगीण सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उपयुक्त तरीके से सामाजिक क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रीत कर उस असंतुलन को सुधारने का निर्णय किया और राज्य के सर्वांगी विकास के लिए पांच सूत्रीय रणनीति- पंचामृत योजना की परिकल्पना की।

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उनके नेतृत्व में शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य सेवा सहित अनेक क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन नजर आ रहा है। उन्होंने राज्य के भविष्य के लिए अपनी एक स्पष्ट दृष्टि बनाते हुए नीति आधारित सुधार कार्यक्रम शुरू किया। सरकार के ढांचे को पुनर्गठित कर गुजरात को सफलतापूर्वक समृद्धि के मार्ग पर ला दिया। उनके आशय और क्षमता का पता उनके सत्ता सम्भालने के 100 दिनों के भीतर ही चल गया। अपनी प्रशासनिक सूझबूझ, सपष्ट दूरदर्शिता और चारित्र्य के अखंडता सहित उनकी इन सभी कुशलताओं की वजह से दिसम्बर 2002 के आम चुनावों में भव्य विजय हासिल की और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटें जीतकर भारी बहुमत के साथ चुन ली गई। 2007 के चुनावों में भी फिर से एक बार श्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा को भारी बहुमत मिला।

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खास कमाल तो उन्होंने वाईब्रेंट गुजरात कार्यक्रम करके किया है जिसके द्वारा उन्होंने गुजरात को वैश्विक फलक पर रख दिया है। दुनियाभर के पूंजी निवेशकों के लिए गुजरात एक पसन्द का स्थल बन चुका है। 2013 की वाइब्रेंट गुजरात समिट में दुनियाभर के 120 देशों ने भाग लिया जो एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। गुजरात में पिछले कई वर्षों से दो आंकड़ों की वृद्धि दर है। जब गुजरात वृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर तेज गति से आगे बढ़ रहा है ऐसे में श्री मोदी एक मुसाफिर की तरह बिना थके समय की रेत पर अपने कदमों के निशान छोड़कर माइलस्टोन को स्माइलस्टोन में परिवर्तित करके विकास के पथ पर प्रयाण कर रहे हैं।

बेबुनियाद आरोपों को दरकिनार कर आगे बढ़ते रहे मोदी
आधारभूत स्तर से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी राजनैतिक यात्रा पर मात्र एक सरसरी नजर डाली जाए तो भी एक सक्षम नेता के तौर पर उनकी छवि स्वयं स्पष्ट हो जाती है। अगर एक नेता में नये विचार और आदर्श देखने हों तो श्री मोदी इसका सुन्दर उदाहरण हैं। सशक्त चारित्र्य, साहस, समर्पण और दूरदर्शिता से परिपूर्ण एक एक युवा किस प्रकार सृजनात्मक नेतृत्व की ऊंचाईयों पर पहुंच सकता है इसके आदर्श रोल मॉडल के तौर पर श्री मोदी उभर आये हैं। लोगों की सेवा के लिए अपार जोश, स्थिर उद्देश्य और लोगों का अपार स्नेह सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति को कम ही मिलता है जो श्री मोदी को मिला है। काफी अल्पसमय में वह एक ऐसे नेता के तौर पर उभर आये हैं जो भविष्य का निर्माण करने का सामर्थ्य रखते हैं।












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