Nandini vs Amul: कर्नाटक में 'नंदिनी' के लिए बवाल, जानिए अमूल ने क्या कहा?
कर्नाटक में दुग्घ उत्पादकों के बीच छिड़ी जंग को लेकर कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं। वहीं अब गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

Nandini vs Amul: कर्नाटक में इन दिनों दूध को लेकर जंग जारी है। कर्नाटक में अमूल (Amul) के प्रोडक्ट्स को उतारने की बात होते ही विवाद शुरू हो गया। अब राज्य को लोकल ब्रांड नंदिनी को बचान के लिए जंग छिड़ चुकी है। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड (GCMMF) के निदेशक जयन मेहता ने कहा है कि अमूल की नंदिनी से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। जीसीएमएमएप के निदेशक ने कहा, "हमारे जो दूध के दाम मुंबई, दिल्ली में हैं उन्हीं दामों पर हम बेंगलुरु के लोगों को देना चाह रहे हैं। हमारे दूध, दही के दाम उनके(नंदनी) दामों से अधिक हैं। अमूल के बेंगलुरु में जाने से नंदनी को कोई असर नहीं होगा ऐसा उनके MD ने भी स्वीकारा है। दोनों के बीच कोई स्पर्धा नहीं है।"
कर्नाटक में लोकल ब्रांड नंदिनी (Nandini) को बचाने के लिए मुहिम तेज होने लगी है। कर्नाटक में शुरू हुई जंग ने सियासी रंग ले चुकी है। लोग इसके लिए सड़कों पर भी उतर रहे हैं। कर्नाटक के लोगों को कहना है राज्य में लोकल दूध ब्रांड नंदिनी को खत्म करने की साजिश की जा रही है। ऐसे में अमूल के एमडी जयन मेहता कहा है कि हमारे दूध, दही के दाम उनके(नंदनी) दामों से अधिक हैं। ऐसे में कोई प्रतिस्पर्धा की गुंजाइश नहीं है।
गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ लिमिटेड के एमडी जयन मेहता ने कहा, "हमारे जो दूध के दाम मुंबई, दिल्ली में हैं उन्हीं दामों पर हम बेंगलुरु के लोगों को देना चाह रहे हैं। हमारे दूध, दही के दाम उनके(नंदनी) दामों से अधिक हैं।अमूल के बेंगलुरु में जाने से नंदनी को कोई असर नहीं होगा ऐसा उनके MD ने भी स्वीकारा है। दोनों के बीच कोई स्पर्धा नहीं है। अमूल अपनी आइसक्रीम कर्नाटक में नंदनी के प्लांट में बना रहा है। पिछले साल हमने 100 करोड़ रुपए की आइसक्रीम नंदनी के दूध से नंदनी के प्लांट में बनाई और कर्नाटक और दक्षिण भारत के बाजार में बेचा था।"
नंदिनी की शुरुआत कैसे?
कर्नाटक में नंदिनी फेमस मिल्क ब्रांड है। कर्नाटक कॉपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड (KMF) के पास नंदिनी का कंपनी पर मालिकाना हक है। नंदिनी देश का दूसरा सबसे बड़ा डेयरी को-ऑपरेटिव है। इसकी नींव साल 1955 में कोडगू जिले में पहले डेयरी के तौर पर रखी गई। शुरुआत में इसकी क्षमता 50 हजार लीटर प्रति दिन थी। साल 1974 में कर्नाटक डेयरी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इसके काफी बढ़ावा मिला।
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