मैसूर सिविक बॉडी ने CM सिद्धारमैया के नाम पर सड़क का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा, BJP ने बताया तुगलकी फरमान
Karnataka News: कर्नाटक के मैसूर शहर में एक सड़क का नाम बदलने के फैसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मैसूर सिटी कॉरपोरेशन ने ऐतिहासिक केआरएस रोड के एक हिस्से का नाम बदलकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के सम्मान में सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखने का प्रस्ताव दिया। हालांकि इस प्रस्ताव का भाजपा और जेडीएस समेत कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है।
विरोध में उठीं आवाजें
भाजपा ने इसे ऐतिहासिक विरासत का अपमान और अहंकारपूर्ण कदम करार दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मैसूरु की समृद्ध विरासत को धूमिल करना तुगलकी शासन का उदाहरण है। मुख्यमंत्री अपने नाम को अमर करने के लिए शहर की ऐतिहासिक पहचान को मिटा रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में ऐसा निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक मूल्यों का उल्लंघन बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की।
जेडीएस ने बताया राज्य का अपमान
जेडीएस ने भी इस कदम की कड़ी निंदा की और इसे कर्नाटक की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का अपमान बताया। पार्टी ने इस निर्णय को नैतिक और राजनीतिक दृष्टि से गलत ठहराते हुए कहा कि मैसूरु की सड़कों के नाम बदलने से न केवल शहर की ऐतिहासिक अखंडता को नुकसान होगा। बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का भी अपमान होगा।
सरकार ने मांगे सुझाव और आपत्तियां
निगम ने अपने निर्णय के बाद सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। हालांकि इस कदम को लेकर व्यापक स्तर पर नाराजगी और असहमति देखी जा रही है।
इतिहास बनाम वर्तमान की बहस
यह विवाद केवल सड़क के नामकरण तक सीमित नहीं है। यह मुद्दा ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने और वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को सम्मानित करने के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है। मैसूर जिसे कभी महाराजाओं और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता था। अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ रही है। यह स्पष्ट है कि सड़कों और स्थानों के नाम बदलने का निर्णय केवल प्रशासनिक नहीं। बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक निहितार्थ भी रखता है। क्या सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग का प्रस्ताव अमल में आएगा या इसे वापस लिया जाएगा। यह देखना बाकी है।












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