'हिंदुओं के साथ मिलकर मुसलमान अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करें'
नई दिल्ली। रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुद को मुगल शासक बहादुर शाह जफर का वंशज बताने वाले प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन टूसी ने कहा कि मुसलमानों को हिंदुओं से साथ हाथ मिलाकर मंदिर निर्माण में मदद करके भाईचारे की एक मिसाल देनी चाहिए। टूसी ने कहा कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक फैसला है। हर किसी को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। हिंदुओं और मुसलमानों को एक साथ मिलकर अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करना चाहिए जिससे की देश में धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक भाईचारे की मिसाल दुनियाभर में पेश की जा सके।

ऐतिहासिक फैसला
टूसी ने इससे पहले कहा था कि वह राम मंदिर निर्माण के लिए सोने की ईंट देंगे। शनिवार को कोर्ट के फैसले के बाद अपने वादे को एक बार फिर से उन्होंने दोहराते हुए कहा कि वह अपना वादा पूरा करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोने की ईंट मंदिर निर्माण के लिए देंगे। उन्होंने कहा कि मैं अपने वादे पर अब भी कायम हूं, जब भी मंदिर की नींव रखी जाएगी, मैं सोने की ईंट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दूंगा। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए विवादित स्थल को मंदिर निर्माण के लिए देने की बात कही है। साथ ही कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन अयोध्या में देने का फैसला दिया है।

मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन
अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाते हए कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अयोध्या जमीन विवाद पर फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को रामलला विराजमान के हवाले कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए उचित जगह पर 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराए।

कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट को माना
आपको बता दें कि शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड को अगल से 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया। संविधान की धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में न्याय करने और फैसले को पूरा करने के लिए ऐसे आदेश देने का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने अपने फैसले में कुछ बड़ी बातें कही हैं। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा विचार करने योग्य है लेकिन एएसआई की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता। एएसआई की रिपोर्ट से पता चलता है कि खुदाई में मिला ढांचा गैर इस्लामिक था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि एएसआई ने ये नहीं कहा है कि विवादित परिसर में मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई।












Click it and Unblock the Notifications