Muslim Voter: UP,दिल्ली से गुजरात तक कैसे बदल रहा पैटर्न, वोट बैंक बनकर नहीं रहना चाहते मुसलमान? 3 प्रमाण
Muslim Voter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब से राष्ट्रीय राजनीति में उतरे हैं, उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे को अपने काम का आधार बनाया है। बहुत कम लोगों को मालूम है कि मुसलमानों को बीजेपी से जोड़ कर मुख्यधारा में लाने की उनकी कोशिशें करीब दो दशकों से चल रही हैं, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। अब हमारे पास तीन राज्यों में बदले हुए चुनावी पैटर्न का प्रमाण है कि उनकी नीतियों पर मुसलमानों का एक वर्ग पूरी तरह से भरोसा करने लगा है।
2024 में लोकसभा चुनावों में जब खासकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का रिजल्ट सामने आया तो बीजेपी समर्थकों के एक एक वर्ग से 'सबका, साथ सबका विकास' के नारे के औचित्य पर सवाल उठने लगे। कहा जाने लगा कि पीएम मोदी जन-कल्याण में कभी भेदभाव नहीं चाहते, लेकिन मुसलमान फिर भी बीजेपी को हराने के एजेंडे पर वोट करते हैं। लेकिन, हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह सोच अब क्यों गलत पड़ने लगी है और मुसलमानों के एक वर्ग में किसी के वोट बैंक बनकर रहने की परंपरागत सोच खत्म होने लगी है।

Muslim Voter: पहला प्रमाण) गुजरात के शहरी निकाय चुनाव में बीजेपी के 130 मुस्लिम उम्मीदवारों में 82 को मिली जीत,21 निर्विरोध जीते
अभी हाल ही में गुजरात में नगरपालिकाओं के चुनाव हुए हैं। इन चुनावों में बीजेपी ने 66 नगरपालिकाओं में 130 मुसलमानों को टिकट दिया था। इनमें से 82 मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। अब भाजपा के अंदर में इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि जब मुसलमानों की बीजेपी से बेरुखी मिटने लगी है तो 2027 के विधानसभा चुनावों में क्यों न मुस्लिम उम्मीदवारों को भी आजमाया जाए?
गुजरात बीजेपी मीडिया सेल के संयोजक यग्नेश दवे ने ईटी को बताया है,'परिणाम स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अब अल्पसंख्यक आबादी पूरी तरह से बीजेपी के साथ हैं, यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC), ट्रिपल तलाक और वक्फ को लेकर विपक्ष की ओर हो-हल्ला मचाने के बावजूद।'
बीजेपी की उम्मीद बेवजह नहीं बढ़ी है। इन चुनावों में जिन 210 उम्मीदवारों को निर्विरोध जीत मिली है, उनमें से बीजेपी के 21 मुसलमान प्रत्याशी भी शामिल हैं।
Muslim Voter: दूसरा प्रमाण) दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुसलमानों के एक वर्ग ने भी बीजेपी को दिया वोट
गुजरात में शहरी निकाय चुनाव से ठीक पहले दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी हुआ है। यहां एक्सिस माय इंडिया के चुनाव बाद के एक सर्वे के मुताबिक बीजेपी को 5% मुस्लिमों ने वोट दिए हैं। चुनाव विश्लेषकों के लिए यह बहुत ही बदला-बदला पैटर्न है। मुसलमानों का एक बहुत बड़ा तबका ऐसा भी है, जिसने अब सिर्फ बीजेपी को हराने के इरादे से वोट देना बंद कर दिया है।
हम यह भी नहीं भूल सकते हैं कि दिल्ली में वोटिंग के बाद और मतगणना से पहले ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के प्रेसिडेंट मौलाना साजिद राशिद ने मीडिया के सामने खुद दावा किया था कि वह पहली बार बीजेपी को वोट देकर आए हैं।
Muslim Voter: तीसरा प्रमाण) यूपी में मुस्लिम बहुल सीट पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले एकमात्र हिंदू प्रत्याशी को मिले 77% वोट
अब पिछले साल नवंबर में यूपी में हुए विधानसभा उपचुनावों के नतीजों पर गौर करते हैं। यहां करीब 65% मुस्लिम जनसंख्या वाली कुंदरकी सीट पर एकमात्र हिंदू उम्मीदवार (बीजेपी के रामवीर सिंह) को डाले गए मतों में से 77% वोट मिल गए।
Muslim Voter: मुसलमानों को वोट बैंक मानने वाली पार्टियों के लिए बज गई खतरे की घंटी!
यह तीनों उदाहरण अबतक मुसलमानों को वोट बैंक मानकर अपना चुनावी एजेंडा सेट करने वाले दलों के लिए बहुत बड़ी सबक है। तथ्य यह है कि बीजेपी और आरएसएस (RSS) लंबे समय से मुसलमानों के एक वर्ग में पार्टी की नीतियों और उनकी सरकारों की ओर से उनके लिए किए जा रहे कार्यों को लेकर जागरूकता फैलाने में जुटे हुए हैं।
अभी तक यह कोशिशें पूरी तरह से बेकार नजर आ रही थीं, लेकिन अब मुसलमानों को बीजेपी को वोट देने को लेकर नजरिया बदलने लगा है।
Muslim Voter: मुसलमानों के बीच लंबे समय तक काम करने का अब बीजेपी और संघ को मिलने लगा है फायदा
मसलन, गुजरात में मुसलमानों के बीच पैठ बढ़ाने का अभियान बीजेपी ने 2007 के गुजरात विधानसभा चुनावों से ही शुरू कर दिया था। तब मोदी मुख्यमंत्री के तौर पर अपने तीसरे कार्यकाल के लिए वोट मांग रहे थे।
जहां तक गुजरात में शहरी निकाय चुनावों में मुसलमान उम्मीदवारों को टिकट देने की बात है तो यह प्रयोग बीजेपी 2008 से ही शुरू कर चुकी थी। लेकिन, उसका लाभ अब मिलना शुरू हुआ है।












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