Explained: यूपी में करीब 65% मुस्लिम आबादी वाली सीट पर BJP को कैसे मिले 77% वोट?

Kundarki election result 2024: उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 9 सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को मिली सफलता की चर्चा कुंदरकी सीट पर इसकी ऐतिहासिक जीत का जिक्र किए बिना अधूरी है। बीजेपी ने इन चुनावों में खुद 9 में से 6 और उसकी सहयोगी आरएलडी ने एक सीट जीती है और सपा को मात्र 2 सीटों से संतोष करना पड़ा है। लेकिन, मुस्लिम-बहुल कुंदरकी सीट पर बीजेपी का सपा उम्मीदवार को हरा देना, मौजूदा राजनीतिक माहौल में 'असंभव' दिखता है।

करीब 65% मुस्लिम आबादी वाली सीट पर भारतीय जनता पार्टी को इतनी बड़ी कामयाबी के क्या कारण रहे, इस पर बात करने से पहले वहां के चुनाव परिणाम के आंकड़े देख लेना जरूरी है।

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करीब 65% मुस्लिम आबादी वाली सीट पर BJP को 77% वोट
इस बार के उपचुनाव में 9 सीटों में सबसे ज्यादा कुंदरकी में करीब 58% वोट पड़े। इस सीट से चुनाव लड़ने वाले कुल 12 उम्मीदवारों में अकेले बीजेपी के रामवीर सिंह ही हिंदू थे, बाकी सभी 11 प्रत्याशी मुसलमान थे। सपा ने यहां मोहम्मद रिजवान को उतारा था और बसपा, आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) और एआईएमआईएम ने भी अपने उम्मीदवार खड़े किए थे।

भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह को कुल 1,70,371 वोट मिले,जो कि कुल मतदान का 76.71% है। वहीं सपा प्रत्याशी रिजवान को सिर्फ 25,580 वोट प्राप्त हुए जो मात्र 11.52% है। पोस्टल बैलेट वोट में भी बीजेपी के ही उम्मीदवार ने बाजी मारी है। इसी नतीजे की वजह से ये विश्लेषण जरूरी है कि एक मुस्लिम-बहुल सीट पर भाजपा ने 1993 के चुनावों के बाद ऐसा कमाल कैसे कर दिया।

कैसे मु्स्लिम-बहुल सीट पर बीजेपी ने तोड़े सारे मिथक
मुख्य तौर पर ऐसी चार ऐसी वजहें सामने आ रही हैं, जिसकी वजह से बीजेपी ने कुंदरकी में असंभव सी लगने वाली जीत को संभव बना दिया। इसमें सबसे बड़ा फैक्टर शेखजादाओं का लग रहा है। दप्रिंट की एक रिपोर्ट में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया है कि कुंदरकी में लगभग 80,000 शेखजादा मुसलमान हैं।

उनके मुताबिक,'उन्हें मुस्लिम राजपूत माना जाता है और रामवीर सिंह भी राजपूत हैं। प्रचार के दौरान हमने इस बात पर जोर दिया कि हम एक हैं, क्योंकि हम सभी राजपूत हैं। यही कि हमारे पूर्वज एक ही हैं। यह हमारे हक में काम कर गया।'इतना ही नहीं, बीजेपी की स्थानीय इकाई ने हर बूथ पर दो मुसलमान एजेंट की भी तैनाती की थी, ताकि उसके वोट इधर-उधर ना खिसकें।

भाजपा नेता के अनुसार,'वे मुस्लिम वोटरों को उनके घरों से बीजेपी को वोट देने के लिए लेकर आए। किसी तरह से वे मुसलमानों के एक वर्ग को समझा लिया। कुंडरकी में 57.7 फीसदी वोट पड़े हैं, जिसका मतलब है कि मुसलमानों का अधिकतर वोट बीजेपी को पड़ा है।'

बर्क ने किया सपा का बेड़ा गर्क!
कुंदरकी से पिछली बार सपा के जिया उर रहमान बर्क जीते थे, जो पार्टी के दिग्गज और दिवंगत नेता शफीकुर्रहमान बर्क के पोते हैं। इस साल संभल लोकसभा सीट से जिया उर रहमान बर्क के जीतने की वजह से यह सीट खाली हुई थी। मुरादाबाद जिले में आने वाली कुंदरकी संभल लोकसभा सीट का ही हिस्सा है।

उपचुनाव में भी बर्क का ही परिवार यहां से अखिलेश यादव की पार्टी से टिकट मांग रहा था। लेकिन, अखिलेश ने 71 वर्षीय मोहम्मद रिजवान पर दांव लगाना उचित समझा। वैसे रिजवान यहां से तीन बार (2002,2012,2017) सपा के टिकट पर जीत भी चुके थे।

सपा के अंदर के लोगों का कहना है कि टिकट नहीं मिला तो रिजवान को बर्क के परिवार का समर्थन भी नहीं मिला। एक सपा नेता के मुताबिक,'बर्क साहब के परिवार का इस क्षेत्र के मुसमानों में अच्छी प्रतिष्ठा है। कुंदरकी मुरादाबाद जिले में है, लेकिन संभल लोकसभा सीट का हिस्सा है, जहां से जिया उर रहमान बर्क मौजूदा सांसद हैं। इसलिए, वे क्यों चाहेंगे कि उनकी जगह कोई दूसरा नेता ले ले? हालांकि, सांसद कुछ सभाओं के लिए आए, लेकिन वह काफी नहीं था।'

इल्मा अफरोज के मामले ने भी बिगाड़ा सपा का गेम!
यहां सपा के मुस्लिम प्रत्याशी की अप्रत्याशित हार का एक कारण आईपीएस अधिकारी इल्मा अफरोज के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को भी बताया जा रहा है। वह कुंदरकी की ही रहने वाली हैं और चुनावों के दौरान भी अपने गृहनगर में ही रहीं, ऐसा बताया जाता है।

वह हिमाचल प्रदेश की बड्डी की एसपी हैं, लेकिन वहां के कांग्रेस एमएलए राम कुमार चौधरी के साथ कथित विवाद के चलते कांग्रेस की सरकार ने उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया है। स्थानीय बीजेपी के लोगों ने इस मुद्दे को भी खूब उठाया और आरोप लगाए कि एक महिला अफसर के बचाव के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी सामने नहीं आए।

यहां तक कि यूपी के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने भी चुनाव प्रचार के दौरान उनके साथ हुए 'अन्याय' का मुद्दा उठाया। वे कुंदरकी में बीजेपी के प्रभारी भी हैं।

मुरादाबाद से बीजेपी महिला मोर्चा की एक नेता ने कहा,'हमने मुस्लिम महिलाओं के बीच इल्मा का मुद्दा उठाया। अखबारों की कटिंग दिखाकर हमने बताया कि कैसे कुंदरकी की एक बेटी भुगत रही है। वे (अखिलेश यादव) इस मुद्दे को अपने मित्र राहुल के सामने उठा सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि वे मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करते हैं। कुछ हद तक हमारी अपील काम कर गई.....'

बीजेपी प्रत्याशी का प्रचार अभियान
भाजपा से जुड़े लोगों का कहना है कि कुंदरकी में पार्टी की जीत में खुद रामवीर सिंह के चुनाव प्रचार के तरीके ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुरादाबाद के एक वरिष्ठ मुस्लिम नेता के मुताबिक, 'कुंदरकी के मुस्लिम-बहुल इलाकों में प्रचार के दौरान रामवीर मुस्लिम टोपी रखे रहे। वे न सिर्फ मुसलमानों के घरों में गए, बल्कि उनके वलीमा (निकाह भोज) में भी शिरकत की।'

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उन्होंने बताया, 'भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की मदद से उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा मुस्लिम कार्यकर्ताओं की एक टीम बनाई, जिन्होंने न सिर्फ उनके लिए प्रचार किया, बल्कि स्थानीय मौलानाओं और प्रभावशाली मुसलमानों से उनकी बैठकें भी करवाईं।'

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