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Tahawwur Hussain Rana: 'इसे मत खिलाना बिरयानी', सोशल मीडिया पर क्यों कह रहे हैं लोग?

Tahawwur Hussain Rana: मुंबई पर 2008 में हुए आतंकवादी हमलों की यादें आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं। अब एक बार फिर वही जख्म तब हरे हो गए जब खबर आई कि उस हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत लाया जा रहा है। जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। कई यूजर्स ने साफ कहा कि राणा को किसी तरह की खास सुविधा न दी जाए, जैसी अजमल कसाब को दी जा रही थी।

अफवाह थी कि अजमल कसाब को जेल में 'बिरयानी' दी जा रही है और उसकी सभी सुख-सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। इन चीजों को लेकर लोगों का गुस्सा साफ दिखा। लोगों का कहना है कि आतंकियों के साथ नरमी नहीं, सख्ती होनी चाहिए। वहीं इस बहस के बीच एक बार फिर उस सच्चाई की भी बात हो रही है जो कई सालों बाद सामने आई है - क्या वाकई कसाब को बिरयानी मिली थी? या यह सिर्फ एक झूठी कहानी थी, जो लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए फैलाई गई?

Tahawwur Hussain Rana

चाय वाले की भावनाएं आईं सामने

इस माहौल में 26/11 के हमलों के दौरान कई लोगों की जान बचाने वाले एक स्थानीय चाय वाले की भावनाएं भी लोगों तक पहुंची हैं। उन्होंने साफ कहा कि राणा जैसे आतंकी को कोई विशेष सुविधा नहीं मिलनी चाहिए, चाहे वो सुरक्षा हो या खाना। उनका कहना है कि कसाब जैसे आतंकियों को भी कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिलना चाहिए था।
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कसाब और बिरयानी की सच्चाई क्या है?

कसाब को मटन बिरयानी मिलने की बात अक्सर चर्चाओं में रही है, लेकिन इस दावे को अब पूर्व आईपीएस अधिकारी मीरान चड्ढा बोरवणकर ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी किताब 'मैडम कमिश्नर: द एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ ऑफ एन इंडियन पुलिस चीफ' में बताया कि कसाब को जेल में कभी भी कोई खास खाना नहीं दिया गया। वह उस समय महाराष्ट्र जेल विभाग में एडिशनल डीजी थीं और कसाब की फांसी की निगरानी उन्होंने खुद की थी।

कसाब को मिली थी सख्त निगरानी में जेल सुविधा

बोरवणकर ने बताया कि कसाब की सुरक्षा और आहार को लेकर बेहद सख्ती बरती गई थी। डॉक्टरों और जेल स्टाफ ने तय किया था कि उसे सिर्फ वही खाना दिया जाएगा जो नियमों में तय है। कोई मटन बिरयानी या स्पेशल खाने का सवाल ही नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने ये भी बताया कि कसाब का व्यवहार शुरू में आक्रामक था लेकिन बाद में वह शांत हो गया था और सवालों का जवाब देने की बजाय मुस्कुराता रहता था।

फर्जी खबरों से सतर्क रहने की जरूरत

इस पूरे मामले में एक बार फिर यह बात सामने आई है कि हमें बिना पुष्टि के किसी भी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए। कसाब को बिरयानी देने की खबरें अफवाह थीं, लेकिन वो कई सालों तक चर्चा में रहीं। अब जब तहव्वुर राणा को भारत लाया जा रहा है, तो कसाब के मामले से सबक लेकर न्याय और हिरासत से जुड़ी बातों को सोच-समझकर देखना जरूरी है।
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