जिनेवा में प्रदर्शनकारियों का हिंसक प्रदर्शन, G7 Summit से पहले सड़कों पर क्यों उतरे हजारों लोग?

G7 Summit Protests 2026: फ्रांस के एवियन (Evian) शहर में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हालात तनावपूर्ण हो गए। रविवार, 14 जून को संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के पास हजारों प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें देखने को मिलीं।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें, पत्थर और पटाखे फेंके, जबकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के सात सबसे विकसित देशों के नेताओं का समूह G7 सम्मेलन के लिए फ्रांस में जुटने जा रहा है।

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सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, कनाडा और इटली के शीर्ष नेता शामिल होंगे। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी विशेष आमंत्रित देश के नेता के रूप में सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुलाया गया है।

क्यों हो रहा है विरोध?

DW की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रदर्शन एंटी-G7 गठबंधन द्वारा आयोजित किया गया था। इस गठबंधन में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन शामिल हैं, जो पूंजीवाद, वैश्वीकरण, आर्थिक असमानता और बड़ी शक्तियों की नीतियों का विरोध करते हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि G7 देशों की नीतियां दुनिया में आर्थिक असमानता बढ़ा रही हैं और विकासशील देशों के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसी वजह से हर साल G7 सम्मेलनों के दौरान विरोध प्रदर्शन आम बात माने जाते हैं।

शांतिपूर्ण मार्च से हिंसा तक, कैसे पहुंचा मामला?

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, करीब 20 हजार लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे। शुरुआत में मार्च शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहा था, लेकिन दोपहर बाद कुछ प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों के बाहर लगे सुरक्षा बोर्ड तोड़ दिए, खिड़कियां तोड़ीं और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने संयुक्त राष्ट्र की दूरसंचार इमारत को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, एक टेस्ला कार को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

जिनेवा में ही क्यों हुआ प्रदर्शन?

फ्रांस ने G7 सम्मेलन स्थल एवियन के आसपास बड़े विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने जिनेवा को अपना विरोध केंद्र बनाया। जिनेवा, एवियन से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कार्यालय हैं। इसी कारण प्रदर्शनकारियों ने दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस शहर को चुना।

G7 सम्मेलन को देखते हुए स्विट्जरलैंड और फ्रांस दोनों देशों ने सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी है। जिनेवा में हजारों पुलिसकर्मी और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। वहीं सम्मेलन स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

PM मोदी भी होंगे शामिल

G7 शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विशेष आमंत्रित नेता के तौर पर हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संघर्ष जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। हालांकि इस बार सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस मध्य पूर्व में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका संबंध और रूस-यूक्रेन युद्ध रहने वाला है। इन मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है।

दुनिया की नजर G7 Summit पर

जिनेवा में हुई हिंसक झड़पों ने सम्मेलन शुरू होने से पहले ही माहौल को गर्म कर दिया है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना होगी। वहीं पूरी दुनिया की नजर अब G7 सम्मेलन पर टिकी हुई है, जहां कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।

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