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26/11 Mumbai Attack: अब तक कितनों को मिली सजा? कौन भारत लाया गया? कौन पाकिस्तान में खुला घूम रहा है?

26/11 Mumbai Attack: 'गोलियों की आवाज, जलते गुंबद, डर से कांपती सड़कों पर दौड़ते कदम, और आंखों में बस मौत का मंजर! कुछ ऐसा आलम था 26 नवंबर 2008 की शाम का। यह भारत के इतिहास की सबसे काली रातों में से एक बन चुका है। एक ऐसी घटना जिसने सिर्फ मुंबई नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। इस हमले ने मानवता, सुरक्षा, और भरोसे के हर पहलू को गहराई से चोट पहुंचाई। इस भयावह हमले में 166 से ज्यादा निर्दोष लोगों की मौत हुई और 300+ घायल हुए। कई परिवार उजड़ गए, अनगिनत सपने अधूरे रह गए।

अब 17 साल बाद, अमेरिका से हमले का मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का सहयोगी तहव्वुर हुसैन राणा का प्रत्यर्पण भारत की कूटनीतिक जीत साबित हो रहा है। अभी तक, राणा लॉस एंजिल्स के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद रहा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस हमले से जुड़े कितने दोषियों को सजा हुई? कौन अब भी पाकिस्तान में खुला घूम रहा है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स...

Tahawwur Rana Extradition

मुख्य आरोपी और उनकी स्थिति

1️⃣ डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाउद गिलानी(David Coleman Headley)

  • भूमिका: भारत में रेकी, टारगेट सेलेक्शन
  • गिरफ्तारी: अक्टूबर 2009, शिकागो एयरपोर्ट
  • सजा: 35 साल जेल (अमेरिका), भारत में ट्रायल नहीं हुआ

2️⃣ तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana)

  • भूमिका: हेडली को कवर देने वाला मास्टरमाइंड
  • गिरफ्तारी: 2009, अमेरिका
  • सजा: 14 साल (अमेरिका में पूरी कर चुका)
  • प्रत्यर्पण: 2025 में भारत लाए जा रहा

3️⃣अबु जिंदाल उर्फ सैयद ज़बीउद्दीन अंसारी (Hafiz Saeed) Abu Jindal (Syed Zabiuddin Ansari)

  • भूमिका: हमले के दौरान पाकिस्तान से आतंकियों को निर्देश देना
  • गिरफ्तारी: 2012, सऊदी अरब से भारत प्रत्यर्पित
  • स्थिति: मुंबई में मुकदमा जारी

4️⃣ हाफिज सईद (LeT प्रमुख) (Hafiz Saeed)

  • स्थिति: पाकिस्तान में नजरबंद, आतंकी फंडिंग के केस में 31 साल की सजा
  • 26/11 में भूमिका: मास्टरमाइंड के तौर पर आरोपी, भारत को नहीं सौंपा गया

5️⃣ज़कीउर रहमान लखवी (LeT का ऑपरेशनल हेड): Zakiur Rehman Lakhvi

  • स्थिति: पाकिस्तान में गिरफ्तार
  • सजा: 15 साल (आतंकी फंडिंग के लिए), भारत में केस नहीं चल पाया

6️⃣अजमल आमिर कसाब (Ajmal Amir Kasab)

  • गिरफ्तारी: 2008 में हमले के दौरान जिंदा पकड़ा गया
  • सजा: मौत की सज़ा
  • फांसी: 21 नवंबर 2012, पुणे की यरवदा जेल

अब तक भारत में कौन-कौन लाया गया?

  • अजमल कसाब (2008 में ही पकड़ा गया)
  • अबु जिंदाल (2012 में सऊदी से लाया गया)
  • तहव्वुर राणा (2025 में अमेरिका से लाया जा रहा है)

अब तक के फैसलों की स्थिति

26/11 से जुड़े कुछ आरोपियों को सज़ा मिल चुकी है, कुछ का ट्रायल अभी जारी है, और कुछ अब भी पाकिस्तान में मौजूद हैं। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव बना रहा है कि हाफिज सईद और लखवी जैसे आतंकी भी भारत को सौंपे जाएं या अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कार्रवाई हो।

तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है - 'हम न भूलते हैं, न माफ करते हैं।' अब जब NIA उसकी गवाही और सबूतों को भारतीय अदालत में पेश करेगी, तब 26/11 के और भी चेहरों पर से पर्दा उठने की उम्मीद है।

आइए एक नजर डालते हैं उस दर्दनाक मंजर पर...

वो शाम जब मुंबई थम गई...
बुधवार, 26 नवंबर 2008। आम दिनों की तरह मुंबई भागदौड़ में लीन थी। CST स्टेशन पर यात्री अपने घरों को लौटने की जल्दी में थे, ताज होटल में विदेशी मेहमान डिनर का आनंद ले रहे थे, और लियोपोल्ड कैफ़े में लोग बातचीत कर रहे थे।

लेकिन रात करीब 8:00 बजे, समंदर के रास्ते 10 पाकिस्तानी आतंकवादी कराची से नावों के ज़रिए मुंबई के कोलाबा इलाके में दाखिल हुए। उन्होंने चार समूहों में बंटकर चत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, लियोपोल्ड कैफ़े, नरीमन हाउस समेत छह स्थानों को निशाना बनाया।

गोलियों की गूंज और बम धमाके: शहर बना युद्धभूमि

CST स्टेशन पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में 58 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई। ताज होटल में विदेशी मेहमानों को बंधक बनाकर कमरों में आग लगा दी गई। लियोपोल्ड कैफ़े में खुलेआम गोलियां बरसाई गईं। नरीमन हाउस, जहां यहूदी परिवार रहते थे, उसे आतंकियों ने काबू में लेकर बंधक बना लिया।

नायक और बलिदान: जिन्होंने जान देकर दूसरों को बचाया

एटीएस चीफ हेमंत करकरे, अशोक काम्टे, और विजय सालस्कर जैसे वीर अधिकारी मुठभेड़ में शहीद हो गए। मेजर संदीप उन्नीकृष्णन (NSG कमांडो), जो ताज होटल में ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए, उनका अंतिम संवाद आज भी याद किया जाता है - 'Do not come up, I will handle them."

मुंबई ने फिर खुद को खड़ा किया

तीन दिन तक चली ये खौफनाक लड़ाई 29 नवंबर 2008 को खत्म हुई। लेकिन मुंबई ने हार नहीं मानी। इस शहर ने फिर मुस्कराना सीखा, उठ खड़ा हुआ - लेकिन उन जख्मों की टीस आज भी हर साल 26/11 को महसूस की जाती है।

26/11 के सबक: देश की सुरक्षा बदली

  • NSG का बेस मुंबई में बनाया गया।
  • समुद्री सुरक्षा को दोगुना मज़बूत किया गया।
  • इंटेलिजेंस एजेंसियों को बेहतर समन्वय के लिए फिर से ढाला गया।
  • NIA (National Investigation Agency) का गठन किया गया।

भारत के साथ एकजुट दुनिया, पाकिस्तान भी दबाव में आया

  • अमेरिका, इज़रायल, UK समेत कई देशों ने भारत के साथ एकजुटता दिखाई।
  • पाकिस्तान ने शुरुआत में कसाब की नागरिकता तक मानने से इनकार किया, पर बाद में दबाव में आकर मानना पड़ा।
  • आज तक हमले के असली मास्टरमाइंड हाफिज सईद और ज़की-उर-रहमान लखवी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं।

26/11 सिर्फ एक हमला नहीं था, यह भारत की आत्मा पर एक चोट थी। लेकिन इस दर्दनाक रात ने भी हमें सिखाया कि हमें डरना नहीं, डटकर लड़ना है। मुंबई ने फिर दिखा दिया - "The spirit of Mumbai never dies."

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