ब्रेस्ट टैक्स क्या है? जिसकी महिला लिबरेशन पार्टी की नेता ने हिजाब पर लगाए गई रोक से की है तुलना
'मुलक्करम' या ब्रेस्ट टैक्स क्या है,जिसका हिजाब विवाद के बीच महिला लिबरेशन पार्टी की नेता ने की है तुलना ब्रेस्ट टैक्स क्या है? जिसकी महिला लिबरेशन पार्टी की नेता ने हिजाब पर लगाए गई रोक से की है तुलना
बेंगलुरू, 14 फरवरी। कर्नाटक के उडुपी के एक सरकारी कालेज में शुरू हुए हिजाब विवाद का असर अब पूरे भारत में नजर आ रहा है। इसको लेकर जहां राजनीतिक संगठन और देश के लोग दो धड़ों में बंट गए हैं वहीं इस मुद्दे पर पाकिस्तान अन्य कुछ विदेशी देश इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वहीं तमिलनाडु में महिला लिबरेशन की महिला नेता ने हिजाब बैन का विरोध करते हुए इसकी तुलना ब्रेस्ट टैक्स से कर दी है। आइए जानते हैं ये 'मुलक्करम' या ब्रेस्ट टैक्स क्या है?

तिरंगा हिजाब पहनकर जमकर प्रदर्शन
बता दें कर्नाटक सरकार द्वारा कालेजों के क्लासरूम में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध तमिलनाडु में भी किया गया। यहां कालेज की छात्राओं और कई संगठनों की महिलाओं ने तिरंगा हिजाब पहनकर जमकर प्रदर्शन किया।

हिजाब पननने से रोके जाने को ब्रेस्ट टैक्स से की तुलना
अन्य मुस्लिम संगठनों के अलावा महिला लिबरनेशन पार्टी की नेता सबरीमाला ने सबरीमाला इस विरोध में भाग लेते हुए कहा हिजाब पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि महिला छात्र शिक्षित न हों। इसके साथ ही उन्होंने कहा मुस्लिम छात्राओं को क्लासरूम के अंदर हिजाब पननने से रोका जाना 'मुलक्करम' या ब्रेस्ट टैक्स जैसा था।

क्या है 'मुलक्करम' या ब्रेस्ट टैक्स
'मुलक्करम' या ब्रेस्ट टैक्स किसी दूसरे विदेशी देश की नहीं बल्कि ये भारत में एक समय में महिलाओं पर लगाए जाने वाला कर था। 19 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत के केरल राज्य के त्रावणकोर में ये कर महिलाओं पर लगाया जाता है।

महिलाओं को अपने स्तन ढकने के लिए देना पड़ता था कर
ये ब्रेस्ट टैक्स त्रावणकोर साम्राज्य द्वारा निचली जाति की महिलाओं पर लगाए गए कर का एक रूप था। निम्न समुदाय की महिलाओं को अपने स्तनों को ढकने की इजाजत नहीं थी। अपने स्तनों को ढकने के लिए उन्हें ब्रेस्ट टैक्स देना पड़ता था।

नंगेली नाम की लड़की ने विरोध में काट दिया थे अपने स्तन
1924 तक ये टैक्स लिया जाता रहा। इसके बाद नंगेली नाम की एक महिला ने इस कर के खिलाफ आवाज उठाते हुए इस कर का विरोध किया। राजा के मुंशी जब उसके गांव में आकर उससे उसके स्तनों को ढकने के लिए कर मांगा तो नंगेली ने अपना ब्रेस्ट काट कर राजा के मुंशी के सामने रख दिया।

नंगेली के बलिदान के बाद ये कर समाप्त हुआ
नंगेली का स्तन कटने से उसका खूब खून बहने लगा और उसकी मौत हो गई। स्तन काटने के बाद मौत की खबर बहुत तेजी से लोगों में फैली और कई आवाज उठी जिसके बाद ये टैक्स माफ कर दिया गया। मंगोली ने अपना बलिदान देकर निचले तबके की महिलाओं को इस कर से मुक्त करवाया। इसके बाद इस कर को समाप्त करने के लिए बलिदान देने वाली नंगेली को वीरांगना के तौर पर सम्मान दिया जाता है।

जानें क्या है हिजाब विवाद
कर्नाटक के उडुपी के एक सरकारी कालेज में हिजाब पहनकर आई 6 छात्राओं को गेट पर रोका गया जिसके बाद उन्होंने विरोध जताया क्योंकि उन्हें हिजाब पहनकर क्लास में जाने से मना किया गया।उन्होंने इसे अपना संवैधानिक अधिकार बताते हुए कहा कि उन्हें इसे पहनने से कोई नहीं रोक सकता। वहीं कुछ छात्राएं कोर्ट चली गई। कालेजों में हिजाब बनाम भगवान शुरू हो गया और चंद दिनों में इसको लेकर पूरे देश भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। फिलहाल इस मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है।












Click it and Unblock the Notifications