Mukul Roy Death Reason: कैसे हुई मुकुल रॉय की मौत? 5 साल पहले पत्नी ने भी इसी वजह से छोड़ी थी दुनिया
Mukul Roy Death Reason: एक दुखद खबर पश्चिम बंगाल से है, तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार (23 फरवरी, 2026) सुबह निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे, कल तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और वह कई बीमारियों से जूझ रहे थे। मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय ने बताया कि 'उनके पिता को दिल का दौरा पड़ा और सुबह 1.30 बजे उनका निधन हो गया।'
आपको बता दें कि 5 साल पहले उनकी पत्नी कृष्णा रॉय का भी चेन्नई के एक अस्पताल में कार्डिएक अरेस्ट के चलते ही निधन हुआ था। पिता के निधन पर बेटे ने कहा कि 'हम मुकुल रॉय का पार्थिव शरीर दोपहर करीब 12 PM बजे विधानसभा ले जाएंगे।'

'TMC के बड़े नेता रोज़ बातचीत करते थे और उनकी सेहत पर नज़र रखते थे, BJP से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया सिर्फ़ सौमित्र खान एक बार उनसे मिलने आए थे।'
बंगाल के कद्वार नेताओं में से एक थे Mukul Roy
बंगाल के कद्वार नेताओं में से एक रहे मुकुल रॉय ने दूसरी UPA सरकार के दौरान शिपिंग मंत्रालय और बाद में रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया था, तृणमूल कांग्रेस के निर्माण से पहले, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे। 2017 और 2021 के बीच, रॉय ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी थी, रॉय 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से BJP MLA चुने गए थे लेकिन कुछ ही महीनों में TMC में वापस आ गए थे।
साल 2021 में छोड़ी थी भाजपा, TMC में हुई थी घरवापसी
लेकिन इसके बाद में ये मामला कोर्ट पहुंचा था, जहां उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत MLA के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था, हालांकि घर वापसी के बाद पार्टी में उन्हें पुराना वाला रूतबा हासिल नहीं हुआ।
तृणमूल कांग्रेस में कभी नंबर दो थे Mukul Roy
'बंगाल की राजनीति के चाणक्य' कहलाने वाले रॉय तृणमूल कांग्रेस में कभी नंबर दो हुआ करते थे, बंगाल और दिल्ली दोनों में पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते थे। 2011 में जब टीएमसी ने 34 साल के वाम शासन समाप्त किया, तो रॉय ने पार्टी मजबूत की थी।
हालांकि, शारदा चिटफंड और नारद स्टिंग ऑपरेशन मामलों से उनका नाम जुड़ने के बाद वे विवादों में घिर गए थे। पिछले कुछ वक्त से वो डिमेंशिया समेत कई बीमारियों से जूझ रहे थे और इसी कारण सक्रिय राजनीति से दूर हो गए थे।












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