Muharram 2020: रोज-ए-अशुरा आज, जानें क्या है इस दिन का महत्व
नई दिल्ली। इस्लामिक कैलेंडर में दो महीनों, रमजान और मोहर्रम का खास महत्व है। मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है और आज (29 अगस्त) मोहर्रम की दसवीं तारीख है। मोहर्रम की दसवीं तारीख इस्लामिक इतिहास में खास जगह रखती है। इस्लामिक इतिहास के मुताबिक, मोहर्रम की दसवीं तारीख को पैगंबर मोहम्मद के नवासे हुसैन को शहीद कर दिया गया था। इस दिन को रोज-ए-अशुरा कहते हैं। आशुरा का अर्थ दसवें है। आशूरा को दुनियाभर में मुसलमान गम और मातम का इजहार करते हैं। खासतौर से शिया मुसलमान मुहर्रम को ज्यादा महत्व देते हैं।
Recommended Video

अशुरा पर नहीं पहने जाते नए कपड़े, कोई सेलीब्रेशन नहीं होता
मोहर्रम में शिया समुदाय महीने की पहली से नौ तारीख तक रोजा रखते हैं, वहीं सुन्नी समुदाय के लोग 9वें और 10वें दिन रोजा रखते हैं। दोनों समुदाय में मोहर्रम मनाने के तरीकों में थोड़ा फर्क हैं। शिया समुदाय के लोग मोहर्रम में ना ही कोई खुशी मनाते हैं और ना ही किसी की खुशी में शामिल होते हैं। किसी भी तरह के सेलीब्रेशन इस महीने में नहीं होते। मुहर्रम में शियाओं में शादियां भी नहीं होतीं। सुन्नियों में भी महीने में मातम का इजहार किया जाता है लेकिन शरीर पर जंजीरों से वार कर खून निकालना और सड़कों पर ताजिया निकालने का रिवाज सुन्नियों में नहीं है।

क्या है हुसैन और उनके परिवार का इतिहास
हुसैन पैंगबर मोहम्मद की बेटी फातिमा और चौथे खलीफा हजरत अली के दूसरे बेटे थे। हुसैन के बड़े भाई हसन थे। हुसैन को शिया मुस्लिम अपना तीसरा इमाम मानते हैं। पैगंबर मोहम्मद के दुनिया से चले जाने के बाद उनके परिवार को कई तरही की लड़ाइयों का सामना करना पड़ा। हुसैन कम ही उम्र के थे जब उनके माता-पिता और फिर उनके बड़े भाई को भी कत्ल कर दिया गया। हसन की मौत के बाद यजीद निया से चले जाने के बाद दुश्मन हुसैन पर दबाव बनाने लगा कि वह उस वक़्त के जबरन खलीफा बने यजीद ने उन पर जुल्म शुरू कर दिए। माना जाता है कि 680 ई. में इमाम हुसैन ने मदीना छोड़ दिया और वहां से निकल गए लेकिन यजीद उनको जिंदा नहीं छोड़ना चाहता था।

करबला में बेदर्दी से कत्ल किए गए हुसैन
हुसैन मदीना छोड़ अपने कुछ साथियों के साथ इराक के शहर करबला में पहुंच गए। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक मोहर्रम की दो तारीख को कर्बला पहुंचे थे। मोहर्रम की सातवीं तारीख को उनका यजीद ने उनके काफिले का पानी बंद कर दिया और सिर झुकाकर उसे खलीफा मान लेने को कहा। जब हुसैन ने देखा कि यजीद से उनका सामना होना है, तो उन्होंने अपने साथियों से उन्हें छोड़कर चले जाने को कहा क्योंकि यजीद की फौज के सामने जीतना नामुमकिन था। कोई उन्हे छोड़कर नहीं गया, मुहर्रम की दसवीं तारीख को यजीद ने हमला किया और हुसैन के काफिले के 72 लोगों को मार डाला। इसके बाद से दुनियाभर के मुसलमान इस तारीख को रोज-ए-आशूरा के तौर पर मनाते हैं।
-
Gold Silver Rate Today: सोने चांदी में जबरदस्त गिरावट, गोल्ड 8000, सिल्वर 13,000 सस्ता, अब ये है लेटेस्ट रेट -
Silver Rate Today: चांदी में हाहाकार! 13,606 रुपये की भारी गिरावट, 100 ग्राम से 1 किलो की कीमत जान लीजिए -
Silver Rate Today: चांदी भरभरा कर धड़ाम! ₹10,500 हुई सस्ती, 100 ग्राम के भाव ने तोड़ा रिकॉर्ड, ये है रेट -
'Monalisa को दीदी बोलता था और फिर जो किया', शादी के 13 दिन बाद चाचा का शॉकिंग खुलासा, बताया मुस्लिम पति का सच -
Gold Rate Today: सोने के दामों में भारी गिरावट,₹10,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 22k से 18k के भाव -
Ravindra Kaushik Wife: भारत का वो जासूस, जिसने PAK सेना के अफसर की बेटी से लड़ाया इश्क, Viral फोटो का सच क्या? -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच धराशायी हुआ सोना! 13,000 सस्ता, 18K और 22k गोल्ड की ये है कीमत -
Mumbai Gold Silver Rate Today: सोने-चांदी की कीमतों में जारी है गिरावट, कहां पहुंचा रेट? -
Bengaluru Metro Pink Line: मेट्रो पिंक लाइन का शुरू हो रहा ट्रायल, जानें रूट और कब यात्री कर सकेंगे सवारी? -
Iran Vs America: ईरान की 'सीक्रेट मिसाइल' या सत्ता जाने का डर, अचानक ट्रंप ने क्यों किया सरेंडर -
15289 करोड़ रुपये में बिक गई राजस्थान रॉयल्स, कौन हैं खरीदने वाले काल सोमानी, IPL से पहले मचा तहलका -
US Iran War: 5 दिन के सीजफायर की बात, 10 मिनट में Trump का पोस्ट गायब! ईरान ने कहा- 'हमारे डर से लिया फैसला’












Click it and Unblock the Notifications