Bhojshala Offer Prayers: हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुरु हुई पूजा, धार में उमड़े श्रद्धालु

Bhojshala Hindus Offer Prayers: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद पर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस स्थल को मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार देते हुए कहा कि भोजशाला मूल रूप से राजा भोज और परमार वंश काल से जुड़ा देवी वाग्देवी (मां सरस्वती) का मंदिर है।

फैसले के बाद शनिवार, 16 मई की सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला परिसर पहुंचने लगे और पूजा-अर्चना की गई।

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फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन और पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं हिंदू संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे "ऐतिहासिक न्याय" बताया है।

सालों पुराने Bhojshala विवाद पर आया बड़ा फैसला

धार की भोजशाला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा। इस विवाद को लेकर कई वर्षों से अदालत में सुनवाई चल रही थी। इंदौर हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 15 मई को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि परिसर का ऐतिहासिक चरित्र मंदिर का है और यह भोज-परमार काल में निर्मित हुआ था। अदालत ने हिंदू समुदाय को यहां पूजा करने का अधिकार दिया।

ASI के पास ही रहेगा परिसर का नियंत्रण

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील अविरल विकास खरे ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है और यह दर्जा इसे 1904 से प्राप्त है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि परिसर का प्रशासन और निगरानी पूरी तरह ASI के पास ही रहेगी। उन्होंने बताया कि अदालत ने ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश में बदलाव किया है, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। अब परिसर का नियंत्रण ASI के पास रहेगा और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया गया है।

फैसले के बाद श्रद्धालुओं में खुशी

हाईकोर्ट के फैसले के बाद शनिवार सुबह कई श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और पूजा-अर्चना की। एक श्रद्धालु ने ANI से कहा, कई वर्षों बाद बिना किसी रुकावट के दर्शन करने का मौका मिला है। कोर्ट ने बहुत अच्छा फैसला दिया है। अब मैं रोज यहां पूजा करने आऊंगा। फैसले के बाद परिसर के बाहर भी लोगों की भीड़ देखने को मिली। कई लोगों ने इसे आस्था की जीत बताया।

हिंदू पक्ष ने बताया ऐतिहासिक फैसला

हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत ने ASI के पुराने आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा-इंदौर हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला परिसर राजा भोज से जुड़ा हुआ मंदिर है। हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार मिलना एक बड़ी जीत है। विष्णु शंकर जैन ने यह भी बताया कि अदालत में लंदन के संग्रहालय में रखी गई मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग का मुद्दा भी उठाया गया।

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Bhojshala Verdict Highlights: कोर्ट के फैसले की 5 बड़ी बातें

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और एएसआई के वकील अविरल विकास खरे ने कोर्ट के आदेश की मुख्य बातों को रेखांकित किया:

मंदिर का चरित्र: कोर्ट ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण (ASI Survey) के आधार पर माना कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से मां सरस्वती का मंदिर है, जिसे भोज-परमार राजवंश के दौरान बनवाया गया था।

पूजा का अधिकार: चरित्र निर्धारण के बाद, अदालत ने हिंदू समुदाय को परिसर में पूजा करने का पूर्ण अधिकार प्रदान किया।

2003 का आदेश रद्द: कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को आंशिक रूप से संशोधित/निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति थी।

ASI का नियंत्रण: परिसर अभी भी एक 'संरक्षित स्मारक' बना रहेगा और इसका पूरा प्रशासन एवं पर्यवेक्षण एएसआई के पास ही रहेगा।

वाग्देवी की प्रतिमा: कोर्ट ने लंदन के संग्रहालय में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाया है।

सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है मामला

हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं दाखिल की गई हैं। माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दे सकता है। इसी संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष की ओर से पहले ही कैविएट दायर की गई है, ताकि बिना उनकी बात सुने कोई अंतरिम आदेश न दिया जाए।

फैसले से पहले ही धार जिले में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। जिला प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा था कि अदालत के फैसले के मद्देनजर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।

क्या है भोजशाला का इतिहास?

भोजशाला को राजा भोज द्वारा स्थापित शिक्षा और संस्कृति का केंद्र माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार यहां मां सरस्वती की पूजा होती थी और यह संस्कृत अध्ययन का प्रमुख स्थान था। बाद में इस परिसर को लेकर विवाद शुरू हुआ और समय-समय पर यहां पूजा और नमाज दोनों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जाती रही। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है और आगे सुप्रीम कोर्ट में इसकी कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।

Dhar Bhojshala Verdict Today: MP हाईकोर्ट के फैसले से खत्म हुआ इंतजार, धार भोजशाला को मिला मंदिर का दर्जा
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