काम की खबर: एक और सेवा के लिए अनिवार्य होगा आधार, वाहन मालिक जरूर पढ़ें
नई दिल्ली। केंद्र सरकार 'आधार' को एक अन्य सेवा में अनिवार्य करने की योजना बना रही है। गृह मंत्रालय के एक पैनल ने भारतीय राजमार्गों की सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए एक सुझाव दिया है। पैनल ने सिफारिश की है कि मोटर वहानों के रजिस्टेशन को उनके मालिक के आधार नंबर से जोड़ा जाए। इस पैनल ने एक केंद्रीय संस्था बनाने की सिफ़ारिश भी की है जो वाहनों के रजिस्ट्रेशन आधार से जुड़ने के बाद उनसे जुड़ी तमाम जानकारियों का रखरखाव करेगी। इससे सड़क सुरक्षा काफी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के पास भेजी सिफारिश
यह पैनल जुलाई-2017 में बनाया गया था। इसके मुखिया बीपीआरएंडडी (ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के महानिदेशक एपी महेश्वरी हैं। इसमें गृह और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ ही छह राज्यों के पुलिस महानिदेशक भी सदस्य हैं। इन राज्यों में पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और असम शामिल हैं।
अगर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें गृहमंत्रालय के पैनल की सिफारिशे मान लेते है, तो वाहन मालिकों को मोटर वाहनों के पंजीकरण के समय आधार से लिंक करवाना ही होगा।

बलात्कार और लूटपाट जैसी अन्य घटनाएं रोकने में मिलेगी मदद
इन सिफारिशों में दावा किया गया है कि माओवादी और अन्य आतंकियों द्वारा राजमार्गों पर हमले की स्थिति को नियंत्रित किया जा सकेगा। सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लग पाएगी। साथ ही महिलाओं के साथ वाहनों में छेड़छाड़-बलात्कार और लूटपाट जैसी अन्य घटनाओं को भी काफ़ी हद तक रोका जा सकेगा। हालांकि पैनल ने सीधे तौर पर मोटर वहानों को आधार से लिंक करने की सिफारिश नहीं की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, इस समिति ने सुझाव के बाद मोटर वाहनों के एक देशव्यापी डाटा तैयार हो जाएगा।

दिल्ली सरकार ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 'फिलहाल सभी सिफ़ारिशें पैनल के सदस्य राज्यों के महानिदेशकों के पास भेजी गई है। उनकी राय मिलने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई की जाएगी। पैनल के सभी सदस्य मिलकर सभी सिफ़ारिशों पर चर्चा करेंगे। इनमें से जिन्हें अंतिम रूप से स्वीकृत किया जाएगा उन्हें क्रियान्वयन के लिए केंद्र और राज्यों की सरकारों के सामने रखा जाएगा।' ड्राफ्ट को राज्यों के डीजीपी के पास भेज दिया गया है। फिलहाल उनके जबाव का इंतजार किया जा रहा है। दिल्ली के परिवाहन मंत्री ने इस प्रस्ताव की समर्थन किया है।












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