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जम्मू कश्मीर: घाटी में 2020-2022 के बीच 9 कश्मीरी पंडितों की हुई हत्या, सबसे अधिक मौत इस साल

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया कि 2020 से 2022 तक पिछले तीन वर्षों के दौरान घाटी में मारे गए कश्मीरी पंडितों की कुल संख्या 9 है।

Kashmiri Pandits

jammu and kashmir Kashmiri Pandits: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जानकारी दी कि 2020 से 2022 के दौरान कश्मीर घाटी में कुल नौ कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई है। नौ में से, कश्मीरी राजपूत समुदाय का एक व्यक्ति सहित चार कश्मीरी पंडितों को 2022 में मारा गया। चार को 2021 में और एक को 2020 में मार दिया गया था। कांग्रेस सांसद राजमणि पटेल को एक लिखित उत्तर देते हुए बुधवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ये आंकड़ें दिए।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आगे कहा कि सरकार की "आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस" की नीति के तहत काम कर रही है। उन्होंने ये भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है। मंत्री नित्यानंद राय ने यह भी बताया कि आतंकवादी हमलों में 2018 में 417 से 2021 में 229 तक "काफी गिरावट" आई है।

"क्या यह सच है कि हर साल जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा पर बड़ी राशि खर्च की जाती है", इस सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कहा, कई एजेंसियां और संगठन हैं जो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। यह देखते हुए कि इस उद्देश्य के लिए व्यय का विवरण केंद्रीय रूप से नहीं रखा जाता है। राय ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 2019 से 2021 के बीच जम्मू और कश्मीर की पुलिस पर सुरक्षा संबंधी व्यय के रूप में कुल 2,814.095 करोड़ रुपये खर्च किए है।

मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इन तीन सालों के दौरान हुए कुल व्यय में से 2021 में 936.095 करोड़, 2020 में 611 करोड़ रुपये और 2019 में 1,267 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। नित्यानंद राय ने कहा कि गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए कई उपाय किए हैं, जिसमें रणनीतिक बिंदुओं पर चौबीसों घंटे नाका लगाना, राष्ट्र-विरोधी तत्वों के खिलाफ कानून को सख्ती से लागू करना, घेरा और तलाशी अभियान तेज करना शामिल है।

मंत्री नित्यानंद राय ने आगे बताया आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए, आतंकवादियों को समर्थन देने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों पर निगरानी और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करना, जम्मू और कश्मीर में सक्रिय सभी सुरक्षा बलों के बीच वास्तविक समय के आधार पर खुफिया सूचनाओं को साझा करना, दिन और रात तैनाती के जरिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना शामिल है।

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