8.81 लाख से ज्यादा भारतीयों ने पिछले 7 साल में छोड़ी नागरिकता, सरकार ने दी पूरी डिटेल

नई दिल्ली, 14 दिसंबर: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि पिछले सात वर्षों में 8.81 लाख से ज्यादा लोग भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में तेलंगाना राष्ट्र समिति के सांसद कोथा प्रभाकर रेड्डी के एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, 'विदेश मंत्रालय के पास उपलब्ध सूचना के अनुसार पिछले सात साल में 30 सितंबर, 2021 तक 8,81,254 भारतीय अपनी नागरिकता का त्याग कर चुके हैं।' गृह मंत्रालय ने इस संबंध में जो पूरा ब्योरा दिया है, उसके हिसाब से 2019 में सबसे ज्यादा भारतीय ने अपनी नागरिकता का परित्याग किया और 2020 में ऐसा करने वालों की संख्या सबसे कम रही, जिसका कारण कोविड महामारी मानी जा रही है।

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    Indian citizenship: 7 साल में 8.81 लाख से ज्यादा लोगों ने छोड़ी citizenship | वनइंडिया हिंदी
    In seven years, 8,81,254 people gave up Indian citizenship, the central government informed the Parliament

    इस साल 30 सितंबर तक 1,11,287 ने छोड़ी नागरिकता
    गृह मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक साल 2015 में कुल 1,31,489 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी, 2016 में 1,41,603, 2017 में 1,33,049, 2018 में 1,34,561, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,248 और इस साल 30 सितंबर तक 1,11,287 लोग भारतीय नागरिकता छोड़ चुके हैं। टीआरएस सांसद रेड्डी ने अपने सवाल में यह भी पूछा था कि क्या नागरिकता छोड़ने की प्रक्रिया को आसान किया गया है। इसपर गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस साल अगस्त से एक ऑनलाइन पोर्टल ऐक्टिवेट किया गया है, इस प्रक्रिया को सामान्य बनाने के लिए। राय ने कहा कि 'सिटीजनशिप ऐक्ट, 1955 के सेक्शन 8 के तहत जिसे सिटीजनशिप रूल, 2009 के नियम 23 के साथ पढ़ा जाए, भारतीय नागरिकता छोड़ी जा सकती है।'

    100 लाख से ज्यादा भारतीय विदेश में रह रहे हैं
    गृह राज्यमंत्री ने यह भी बताया कि 2016 से 2020 के बीच 10,645 विदेशी नागरिकों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन दिया है, जिसमें सबसे ज्यादा पाकिस्तान (7,782) और अफगानिस्तान (795) से हैं। उन्होंने एक और बड़ी जानकारी ये दी कि इस समय 100 लाख से ज्यादा भारतीय दूसरे देशों में रह रहे हैं।

    सीएए पर नियम नोटिफाई होना बाकी
    केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में आई है, जब गृह मंत्रालय ने कहा है कि पूरे देश में नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन्स (एनआरसी) तैयार करने को लेकर उसे अभी फैसला लेना है। हालांकि, सरकार ने कहा है कि जो सीएए के दायरे में आते हैं, वह उसके नियम नोटिफाई होने के बाद आवेदन कर सकते हैं। यह कानून वैसे तो 10 जनवरी, 2020 से ही लागू हो चुका है, लेकिन इसके लिए नियम तैयार करने के लिए मोदी सरकार ने फिलहाल जनवरी, 2022 तक के लिए समय मांगा हुआ है।

    बता दें कि सीएए के खिलाफ देशभर में जो विरोध प्रदर्शन हुए थे, उसका सबसे गंदा नजारा 2020 की शुरुआत में दिल्ली दंगों में दिखाई पड़ा था। इस कानून के तहत 31 दिसंबर, 2014 से पहले तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। लेकिन, इसके विरोधी लोग इसे असंवैधानिक बताने पर लगे हुए हैं।

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