ख़स्ताहाल यूपी: 17 हज़ार से ज्यादा स्कूलों में एक-एक टीचर
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लाख दावे करें लेकिन आंकड़े कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं।
हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 17,602 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक मौजूद है। ये शिक्षक पूरे स्कूल का प्रबंधन और शिक्षा अकेले ही संभाले हुए हैं। इन हालातों को देखकर बच्चों के भविष्य का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है।

देहरादून से जारी हुई इस रिपोर्ट के मुताबिक पूरे देश में 1,05,630 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक मौजूद हैं। प्रदेशों की बात करें तो सबसे बुरे हालात मध्य प्रदेश के हैं, जहां यूपी से कुछ ज़्यादा 17,874 सरकारी स्कूलों में एक शिक्षक है।
ऐसे राज्यों की सूची में मध्य प्रदेश और यूपी के बाद तीसरे स्थान पर राजस्थान (13,575), चौथे स्थान पर आंध्र प्रदेश (9,540) और पांचवे पर झारखंड (7,391) है।
दिल्ली में भी मौजूद हैं ऐसे स्कूल
देश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति ऐसी है कि कोई राज्य ऐसा नहीं है, जहां एक भी अकेला शिक्षक मौजूद नहीं है। दूसरे राज्यों की तुलना में केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे स्कूलों की तादाद कम है। लेकिन राजधानी दिल्ली में भी ऐसे स्कूलों की संख्या 13 है।
बदनाम बिहार के हालात बेहतर
बीते दिनों अपने फर्ज़ी टॉपर्स को लेकर चर्चा में रहे बिहार की बात करें तो वहां के हालात यूपी-मध्य प्रदेश से कहीं बेहतर हैं। बिहार में 3,708 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक अध्यापक मौजूद है।
कैसे जवाब देगी अखिलेश सरकार?
उत्तर प्रदेश में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं और सरकारी स्कूलों के ऐसे भयावह आंकड़े विपक्षी दलों का हथियार बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्किल डवलपमेंट की बातें तो करते हैं लेकिन प्रदेश के स्कूलों की हालात ख़स्ता है। अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि देश के बाकी छात्रों की तुलना में यूपी के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कैसे बराबरी कर पाएंगे?
बीते 5 सालों के दौरान अखिलेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं। शिक्षा नीति को लेकर भी उनके पास कोई ठोस योजना नहीं है












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