सेक्स करने से फैल रहा है मंकीपॉक्स? जानें डॉक्टरों ने क्या दी सलाह

नई दिल्ली, 26 जुलाई: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मंकीपॉक्स को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद इस बीमारी को लेकर लोगों में कई तरह की चिंताएं देखने को मिल रही हैं। लोगों में इस बीमारी से जुड़ी कई सेक्सुअल बिहेव्यर चिंताएं देखने को मिली हैं। अभी तक सामने आए मामलों के विश्लेषण से पता चला है कि, वायरस किसी भी प्रकार के निकट संपर्क के माध्यम से फैल सकता है। जिसमें चुंबन, स्पर्श, सेक्स या गुदा मैथुन शामिल है। दरअसल दिल्ली में 31 साल के युवक में मंकीपॉक्स वायरस की पुष्टि हुई है। पूछताछ के बाद युवक ने बताया था कुछ दिनों पहले वो शिमला की एक पार्टी में गया था।

इन वजहों से भी फैल सकता है मंकीपॉक्स

इन वजहों से भी फैल सकता है मंकीपॉक्स

सूत्रों के मुताबिक ये युवक पार्टी में ही किसी विदेशी के संपर्क में आया जोकि पहले से ही मंकीपॉक्स से इंफेक्टेड था/थी। आशंका जताई जा रही है कि युवक के अंदर वायरस सेक्सुअल इंटरकोर्स के जरिए ही फैला है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार चकत्ते, शरीर के तरल पदार्थ (जैसे मवाद, या त्वचा के घावों से रक्त) और पपड़ी विशेष रूप से संक्रामक हैं। इसका वायरस लार के माध्यम से भी फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति की वस्तुओं के संपर्क में आना, जैसे कपड़े, बिस्तर, तौलिये - या खाने के बर्तन जैसी वस्तुएं से भी ये बीमारी फैल सकती है।

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    इतने दिनों में दिख जाते हैं लक्षण

    इतने दिनों में दिख जाते हैं लक्षण

    शारीरिक संपर्क के माध्यम से फैलने वाली इस बीमारी को लेकर यह चिंता है कि क्या शारीरिक रूप से संचरित रोग लोगों के यौन जीवन को प्रभावित कर सकती है। वहीं जिन लोगों के यह बीमारी हुई है, उनके अंदर इस बीमारी के लक्षण 2 से लेकर 4 सप्ताह के अंदर देखने को मिले। लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जो लोग एसिम्टोमैटिक हैं वे बीमारी को प्रसारित कर सकते हैं या नहीं।

    इस तरह के सेक्स से फैल सकता है मंकीपॉक्स

    इस तरह के सेक्स से फैल सकता है मंकीपॉक्स

    सर गंगा राम अस्पताल में इंटेंसिविस्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉ धीरेन गुप्ता ने कहा कि, यौन संपर्क के दौरान मंकीपॉक्स फैलता है। सेक्स के दौरान मंकीपॉक्स से संक्रमित शख्स के साथ ओरल, गुदा और वजाइनल सेक्स या जननांगों को छूना से ये बीमारी प्रसारित होती है। इसके साथ-साथ गले लगाने, मालिश करने और चुंबन के साथ-साथ लंबे समय तक आमने-सामने संपर्क से भी वायरस फैलने का खतरा है। कोई शख्स इस वायरस से तब भी संक्रमित हो सकता है जब वह किसी संक्रमित मरीज द्वारा सेक्स संबध बनाने के दौरान इस्तेमाल किये गए बिस्तर, तौलिये और सेक्स टॉय के संपर्क में आ जाए।

    क्या कहना है डॉक्टरों का ?

    क्या कहना है डॉक्टरों का ?

    विशेषज्ञों का कहना है कि कई या गुमनाम यौन साथी होने से मंकीपॉक्स के संपर्क में आने की संभावना बढ़ सकती है। अपने सेक्स पार्टनर की संख्या सीमित रखने से जोखिम की संभावना कम हो सकती है। वहीं, फोर्टिस अस्पताल वसंत कुंज के निदेशक और डॉ. मनोज शर्मा ने कहा कि, ‘मंकीपॉक्स सेक्स के दौरान अंतरंग संपर्क से फैलता है। यह संक्रमित व्यक्ति के जननांगों को छूने के साथ-साथ मौखिक, योनि और गुदा मैथुन से भी फैल सकता है।

    क्या कंडोम के इस्तेमाल से मदद मिलेगी?

    क्या कंडोम के इस्तेमाल से मदद मिलेगी?

    डॉ. मनोज शर्मा ने कहा, यह गले लगाने, चूमने या संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए बिस्तर, कपड़े या वस्तुओं के संपर्क में आने से फैल सकता है। इसलिए कंडोम का उपयोग करने जैसे बैरियर प्रभावी नहीं हैं। सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट दीपाली भारद्वाज ने कहा, मंकीपॉक्स सेक्स से फैल सकता है। बता दें कि, न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट में सामने आया है कि मंकीपॉक्स संक्रमण वाले करीब 98% मरीज समलैंगिक पुरुष या बाईसेक्सुअल पुरुष हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या मंकीपॉक्स एक यौन रोग है।

     कॉन्टैक्ट डिजीज होने की वजह से भी यह बीमारी फैल सकती है

    कॉन्टैक्ट डिजीज होने की वजह से भी यह बीमारी फैल सकती है

    संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि मंकीपॉक्स के ज्यादातर मामले पुरुषों में मिले हैं, लेकिन अभी हम इसे सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज नहीं कह सकते हैं। इस बात पर रिसर्च चल रही है कि क्या ये एक यौन रोग है। लहारिया का कहना है कि यौन संबंध बनाते समय दो लोग करीब आते हैं, ऐसे में कॉन्टैक्ट डिजीज होने की वजह से भी यह बीमारी फैल सकती है।

    क्या समलैंगिक सेक्स ना करने से इस बीमारी को रोका जा सकता है?

    क्या समलैंगिक सेक्स ना करने से इस बीमारी को रोका जा सकता है?

    डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सही नहीं है। मंकीपॉक्स संक्रमित किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का निकट शारीरिक संपर्क रखने वाला कोई भी व्यक्ति इससे संक्रमित हो सकता है। फिर वह किसी भी जेंडर का हो। डब्ल्यूएचओ बताता है कि किसी बीमारी के कारण लोगों को कलंकित करना अस्वीकार्य है। कोई भी जो संक्रमित हो गया है, या जो अस्वस्थ लोगों की देखभाल में मदद कर रहा है। इस तरह की बातें उसके लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। लोगों उन्हें गलत नजरिए से देखने लगेंगे।

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