MP New CM: सिर्फ 'यादव' नहीं, 'हिंदुत्व' का सॉलिड चेहरा भी हैं MP के अगले सीएम, BJP तो खेल गई!
Madhya Pradesh New CM Mohan Yadav: बीजेपी ने मोहन यादव पर मध्य प्रदेश में दांव लगाकर ओबीसी की सबसे बड़ी जाति को साधने की कोशिश की है, इस बात में कोई दो राय नहीं है। लेकिन, बीजेपी के लिए मोहन यादव का कट्टर हिंदुत्व वाला चेहरा उससे कम मायने नहीं रखता है।
पार्टी देख चुकी है कि कट्टर हिंदुत्व की छवि वाले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस तरह से राज्य के सारे सियासी समीकरणों को ध्वस्त करने में सफलता पाई है। आज योगी की लोकप्रियता सारे सामाजिक ताने-बाने को तोड़कर उससे कहीं ऊपर उठ चुकी है। दबी-जुबान में यह भाजपा-विरोधी भी स्वीकार करते हैं।

मोहन यादव की जाति से बड़ी है उनकी हिंदुत्व वाली छवि
मोहन यादव का नाम तय होना, भले ही बीजेपी की ओबीसी राजनीति के मुताबिक है, लेकिन आरएसएस की विचारधारा पर चलने वाली पार्टी के लिए इनकी शख्सियत उससे भी बढ़कर है। अगर सोशल मीडिया पर गौर करें तो यह बात संघ के विचारधारा के कट्टर-विरोधी और समर्थक दोनों की प्रतिक्रियाओं से जाहिर हो रही है।
एक यूजर लिखता है, 'केवल मोहन यादव नहीं, कट्टर हिंदू आरएसएस कार्यकर्ता डॉक्टर मोहन यादव कहो!.....फायर हैं, फायर'। कोई लिख रहा है कि अब 'भोजशाला' पर फैसला होकर रहेगा। कोई इन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' बताते नहीं थक रहा है। तो कोई इनकी आलोचना करने की वजहें खोजने में लगा है।
भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मोहन भागवत का व्यक्तित्व?
अगर बीजेपी के नजरिए से देखें तो पार्टी में उनकी ट्रेनिंग अखिल भारतीय विध्यार्थी परिषद से ही शुरू हुई है। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विचारों को जीकर यहां तक पहुंचे हैं। इसकी शारीरिक शिक्षा का असर उनकी तलवारबाजी वाले वीडियो में नजर आता है। सबसे खास ये है कि वे बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के रहने वाले हैं और वहीं की जनता ने उन्हें चुना भी है।
भाजपा के लिए यह कितना मायने रखता है, इसका अंदाजा 2014 के लोकसभा चुनावों में ही लग चुका है, जब प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए नरेंद्र मोदी बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी पहुंच गए थे।
खुद मोहन यादव की बात करें तो उनके कुछ बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। जैसे एक जगह वह कहते सुनाई पड़ रहे हैं- ''बाबा महाकाल तुम्हें छोड़ने वाला नहीं है...... जहां से आए हो वहीं गाड़ देंगे....'।
उज्जैन की कुछ विवादित घटनाओं पर वह कहते सुने गए, '....एक बात कान खोलकर सबको समझ लेना चाहिए कि ये हिंदुस्तान है, यहां पर आप बाबा साहेब के संविधान के अनुसार ही काम करेंगे....भारत की धरती पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाएंगे तो कुचले जाओगे......हम मुल्ला और मौलवियों को आग्रहपूर्वक कह देना चाहते हैं...नवाज कराओ...तालीम दो...लेकिन ये बता दो कि ये हिंदुस्तान है.......अरे ये देश है जो तुम्हारी बदतमीजियां सहकर भी तुमको सहारा देता है....'
योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता में दिख चुका है भाजपा को फायदा
2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर देखें तो भाजपा की रणनीति तय है। तथ्य ये है कि योगी आदित्यनाथ अपने ऐक्शन और रियेक्शन की वजह से दूसरे राज्यों में भी उत्तर प्रदेश जितने ही लोकप्रिय हैं। उनकी बुल्डोजर पॉलिटिक्स का फायदा भाजपा को तीनों राज्यों के चुनावों में मिला है।
हिंदुओं को जातियों में बांटने वाली राजनीति की काट हैं मोहन यादव?
पार्टी को इस बार के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से जातिगत जनगणना के मुद्दे पर सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है। इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने एक तरह से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की है कि बीजेपी जातियों की इस तरह की गिनती के लिए तैयार नहीं है।
जबकि, भाजपा की सोच है कि विपक्ष का असली एजेंडा हिंदु वोटों का विभाजन करना है, ताकि बीजेपी के ध्रुवीकरण के हथियार की धार कुंद की जा सके। शायद ऐसे में भाजपा को मोहन यादव जैसे अपने मंजे हुए कार्यकर्ता से काफी उम्मीदें हो सकती हैं।












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